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कार्तिक के पूर्व संध्या रात्रि में सभी देवी देवताओं का पृथ्वी पर आगमन और कार्तिक विशेष महात्म्य”

 

*पवित्र कार्तिक मास इस वर्ष 21 अक्टूबर गुरुवार से शुरु हो रहा है। जो 19 नवंबर शुक्रवार तक रहेगा।*
इस मास में विविध व्रत अनुष्ठान स्नान दान-पुण्य, और दीपदान विशेष फलदायी होगा।
*कार्तिक मास में ही अक्षय नवमी के दिन सतयुग की उत्पत्ति हुई अर्थात इसी महीने से सतयुग आरम्भ हुआ, और इसी मास में शिव पुत्र ने तारकासुर राक्षस का वध किया था, इसलिए इसका नाम कार्तिक पड़ा, अतः इस मास किये जाने वाले व्रत प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण एवं विशेष फलदायी होता है, जो विजय देने वाला है। प्रति वर्ष शरद पूर्णिमा के रात महारास दर्शन के लिए सभी देवता, सभी देवी, सभी तीर्थ, के साथ पवित्र नदियों सरोवरों के साथ पृथ्वी पर आते है। और 1 मास तक पृथ्वी पर वास करते हैं। इसी कारण से सभी स्थानों पर सम्पूर्ण कार्तिक मास भर ब्रह्मचर्य , सत्य, अहिंसा नियम तप पूर्वक पूरे श्रद्धा भक्ति पूर्वक ब्रह्म मुहूर्त में कार्तिक स्नान की शुरुआत, एवं विभिन्न पर्वों और दान-पुण्य का सबसे बड़ा महीना कार्तिक मास कार्तिक मास होता है। इसकी शुरुआत 1 नवम्बर रविवार से हो रही है, इस पवित्र महीने में घर तथा मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान करने का बड़ा ही महत्व है, श्रद्धालु भक्त- तुलसी और शालिग्राम का पूजन करेंगे और देव आराधना के साथ धन-संपत्ति, व्यापार-कारोबार में वृद्धि के लिए पूजा-अर्चना कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करेंगे।इस माह में 25 नवंबर को जहां देवउठनी एकादशी पर देव जागेंगे, वहीं 30 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा तक कई प्रमुख व्रत व त्योहार भी आएंगे।*
*इस मांह में तुलसी में साक्षात् मां लक्ष्मी का निवास माना गया है। इस चलते कार्तिक मास मेंं तुलसी के समीप दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। ऋतु चक्र के आधार पर भी इस माह का अधिक महत्व है क्योंकि कार्तिक मास से लोगों का खान-पान और पहनावा पवित्र, उत्साह पूर्ण एवं सादगी पूर्ण हो जाता है।*

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*कार्तिक मास के प्रमुख व्रत पर्व इस प्रकार से है* –

*अशून्य शयन व्रत-*
22 अक्टूबर शुक्रवार को,

*करवाचौथ-* 24 अक्टूबर रविवार को रात्रि 7:51 बजे अर्घ्य दान,

*अहोई अष्टमी-*
28 अक्टूबर गुरुवार को

*रम्भा एकादशी व्रत-*
1 नवम्बर सोमवार को

*धनतेरस-पूजन*
2 नवम्बर मंगलवार को

*हनुमान जयंती, और नरक चतुर्दशी-*
3 नवम्बर बुधवार को

*दीपावली, महाकाली पूजा -*
4 नवम्बर गुरुवार को
दिन में 1:38 के बाद से,
कुम्भ मीन लग्न- शाम 4:37 बजे तक,
वृष मिथुन लग्न- 6:14 बजे से 10:241 तक,
सिंह/ कन्या लग्न- 12:42 से 4:00 तक।
*दरिद्र निस्तारण:-*
रात्रि शेष 4 बजे से 5 बजे तक।

*गोवर्धन पूजा और अन्नकूट-*
5 नवम्बर शुक्रवार को
प्रातः 6:30 बजे से

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*भैयादूज, चित्रगुप्त पूजा दवात पूजा, और यमद्धितीया-*
6 नवम्बर शनिवार को प्रातः 6:31 से

*वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी एवं सूर्यषष्ठी व्रतारम्भ:-*
8 नवम्बर सोमवार को,

*सूर्यष्ठी व्रत खरना:-*
9 नवम्बर मंगलवार को,

*सूर्यषष्ठी व्रत सायं अर्घ्य*
10 नवम्बर बुधवार को सायं 4:27 से 5:15 तक।

*प्रातः अर्घ्य एवं व्रत पारणा -*
11 नवम्बर गुरुवार को प्रातः 6:30 से,

*गोपाष्टमी-*
12 नवंबर शुक्रवार को,

*अक्षय नवमी-*
13 नवंबर शनिवार को,

*प्रबोधिनी एकादशी* 15 नवम्बर सोमवार को,

*तुलसी विवाह -* 15 नवम्बर, सोमवार संध्या 6 बजे से रात्रि 12 बजे तक।

*भौम प्रदोष 13 व्रतं -*
16 नवम्बर, मंगलवार को,

*श्री वैकुण्ठ चतुर्दशी*
17 नवम्बर बुधवार को,

*व्रत पूर्णिमा श्री महाविष्णु पूजा एवं श्री काशी विश्वनाथ प्रतिष्ठा दिनम् एवं देव दीपावली महोत्सवः*
18 नवम्बर गुरुवार को,

*कार्तिक स्नान पूर्णिमा*
19 नवंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा ।

*घर पर एवं विभिन्न मंदिरों में पूरे एक महीने तक स्नान, व्रत, पूजन, एवं दीपदान की शुरुआत हो जाएगी। इस माह में पितरों के निमित्त भगवान राधा दामोदर का पूजन करने के बाद तर्पण अवश्य करना चाहिए। इस मास में दीपदान से वंश वृद्धि होती है। पुष्कर सहित अन्य तीर्थ स्थलों पर पूरे महीने श्रद्धालुओं की रौनक रहेगी और दीपदान होगा। कार्तिक मास अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष फलदायी होता है। 12 महीनों में कार्तिक भगवान विष्णु का मास है। अतः इस मास के व्रत पूजन से माता महालक्ष्मी और श्री हरि विष्णु अत्यंत प्रसन्न होकर मन चाहा वरदान देते हैं। इस मास के आरंभ होने के पूर्व रात्रि में श्री कृष्ण और राधा ने महारास किया था इस कारण सभी देवता देवी पूरे 1 माह तक पृथ्वी लोक पर वास करते हैं। इसमें आने वाले नक्षत्र-ग्रह योग, तिथि पर्व का क्रम धन, यश-ऐश्वर्य, लाभ, उत्तम स्वास्थ्य दायक होते हैं। अतः इस मास का किया गया व्रत, पूजन, अनंत गुण फलदायक होता है। कार्तिक मास शास्त्र गणना के आधार पर वर्ष आरंभ का समय माना जाता है। इसी मास में अक्षय नवमी के दिन सतयुग की उत्पत्ति हुई अर्थात इसी महीने से सतयुग आरम्भ हुआ, अतः अपने घरों एवं समाज मे सतयुग की स्थापना करने के लिए इस महीने में भगवान श्री हरि से किया गया व्रत पूजन प्रार्थना सर्व सिद्धि दायक एवं विशेष फलदायी होता है।*

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*सम्पूर्ण कार्तिक मास के व्रत प्रभाव से भगवती महालक्ष्मी भगवान श्री हरि विष्णु, सभी देवता, देवी एवं नक्षत्र-ग्रह योग, तिथि पर्व सबके लिए धन, यश-ऐश्वर्य, लाभ, उत्तम आयु आरोग्यता, नौकरी व्यवसाय, सुख शांति, सन्तति सन्तान देने वाला हो…*

ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री

 

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