भैरहवा लुम्बिनी मे वाइट जेड से बना बुद्ध मूर्ति का भब्य स्वागत
हिमालिनी संवाददाता /रूपन्देही । भैरहवा : लुम्बिनी गार्डेन फाउण्डेशन के सहयोग में रूपन्देही के भैरहवा स्थित गौतमबुद्ध अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल में रखने के लिए ढाई अर्ब रुपैया लागत से अधिक बुद्धमूर्ति भैरहवा में पहुंचा ।भैरहवा और लुम्बिनी में बुद्धमूर्ति का नगरवासी ने किया भब्य स्वागत । सिद्धार्थ उद्योग बाणिज्य संघ भैरहवा और लुम्बिनी होटल संघ नेपाल के अगुवाई में बिभिन्न संघ संस्था द्धारा भैरहवा भन्सार बेलहिया से गौतमबुद्ध मूर्ति का किया नगरपरिक्रमा । भैरहवा भन्सार कार्यालय से सुरु हुआ नगर शोभा यात्रा आँखा अस्पताल, देवकोटा चोक, मिलन चोक, नारायण पथ होते बुद्धचोक से लुम्बिनी पहुंचने के बाद बौद्ध भिक्षु ने बौद्ध विधि मंत्र द्धारा पुर्जा अर्चना के बाद लुम्बिनी मे परिक्रमा के बाद उक्त मूर्ति को भैरहवा स्थित गौतम बुद्ध अंतराष्ट्रीय बिमानस्थल में लाया गया । उक्त बुद्ध मूर्ति का इसी कार्तिक १४ गते राष्ट्रपति बिद्यादेवी भण्डारी द्धारा अनावरण करने का कार्यक्रम तय हुआ है लुम्बिनी गार्डेन फाउण्डेशन ने बताया है ।
साढे दो अर्ब रुपैयाँ से अधिक मूल्य का ‘ह्वाइट जेड’ धातु से निर्मित बुद्ध मूर्ति गौतमबुद्ध बिमानस्थल में रखा गया ।
म्यान्मारस्थित खानीसम्बन्धी कम्पनी मालविन ग्रुप द्वारा निर्मित एक हजार आठ सौ किलो तौल का उक्त बुद्ध मूर्ति लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिका और स्पेनस्थित लुम्बिनी गार्डेन फाउन्डेसन के पहल तथा नेपाल सरकार के स्वीकृति में रखा गया है ।
बुद्धमूर्ति अनावरण कार्यक्रम में स्पेन के एक्स्ट्रेमादुरा प्रदेशसभा के अध्यक्ष ब्लान्सा मार्टिन, डेल्गाडो और प्रदेश के दुई मन्त्री का आने कार्यक्रम तय हुआ है लुम्बिनी गार्डेन फाउण्डेशन ने जानकारी दिया है । उक्त बुद्ध मूर्ति एक दशमलव नौ मिटर उचाइ और ६० सेन्टिमिटर चौडाइ का है । बुद्ध मूर्ति में प्रयोग हुआ बहुमूल्य धातु ‘ह्वाइट जेड’ का इस समय अन्तर्राष्ट्रिय बजार मूल्य प्रतिग्राम १२ अमेरिकी डलर है ।म्यान्मारस्थित खानीसम्बन्धी कम्पनी मालविन ग्रुप ने स्पेनस्थित लुम्बिनी गार्डेन फाउन्डेसन को दो करोड १६ लाख अमेरिकी डलर (साढे दो अर्ब नेपाली रुपैयाँ) बराबर का उक्त मूर्ति सहयोगस्वरूप दिया है ।राष्ट्रियसभा के अध्यक्ष गणेश तिमिल्सिना के नेतृत्व में लुम्बिनी सांस्कृतिक नगरपालिका प्रमुख मनमोहन चौधरीलगायत के टोली ने स्पेन के एक कार्यक्रम में भाग लेने गए थे उसी कार्यक्रम बीच मूर्ति रखने के विषय औपचारिक रूप में आगे बढ़ा था ।



