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संसद् बिघटन को बदर कर अदालत ने राष्ट्रपति का अधिकार प्रयोग किया हैः ओली

 
केपीशर्मा ओली/फाईल तस्वीर

विराटनगर, ८ नवम्बर । नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपीशर्मा ओली ने दावा किया है कि सर्वोच्च अदालत ने सेटिङ मिलाकर अन्यायपूर्ण तरीके से संसद् बिघटन को बदर करने का असंवैधानिक और अलोकतान्त्रिक निर्णय लिया है । उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र के भीतर है । सोमबार विराटनगर में आयोजित पार्टी कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए उन्होंने ऐसा दावा किया है ।
पूर्व प्रधानमन्त्री भी रहे अध्यक्ष ओली ने कहा– ‘संसद् बिघटन को किस तरह बदर किया गया है, आज वहीं लोग (न्यायाधीश) ही बता रहे हैं । पता चलता है कि यह सब सेटिङ में हो रहा है । किस को मन्त्री बनाना है, किस को कहाँ नियुक्त करना है, यह सब तो सामने आ चुका है । अन्य रहस्यपूर्ण सेटिङ भी हो सकता है, जो बाहर आना बांकी ही है ।’
अध्यक्ष ओली ने कहा कि आज न्यायालय अपनी मर्माद से बाहर हो चुका है । उन्होंने कहा– ‘हम लोगों से अदालती फैसला मानने से कुछ होनेवाला नहीं है । न्यायालय का सम्मान रह सके, ऐसी फैसला होना चाहिए ।’ अध्यक्ष ओली ने कहा कि संसद् बिघटन कर प्रधानमन्त्री नियुक्ति करते वक्त सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रपति का अधिकार प्रयोग किया है । उन्होंने आगे कहा– ‘लोकतान्त्रिक प्रणाली में हम लोग कामना करते हैं कि न्यायालय स्वतन्त्र हो सके । लेकिन दुःख के साथ कहना पड रहा है– सम्मानित अदालत से इसतरह का निर्णय आया है । सम्मानजनक और निष्पक्ष फैसला नहीं हुआ है, संविधान अनुसार भी नहीं है । संविधान से बाहर जाकर फैसला आया है ।’

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