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13 नवम्बर शनिवार को अक्षय नवमी:- आचार्य राधाकान्त शास्त्री

 

आचार्य राधाकान्त शास्त्री* का​र्तिक शुक्ल नवमी 13 नवम्बर शनिवार को अक्षय नवमी का व्रत पूजन एवं किया जाएगा।* इस दिन किया गया पुण्य अक्षय हो जाता है। इस अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहा जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय नवमी के दिन ही सतयुग का आरंभ हुआ था। इस दिन आंवले के वृक्ष की भी पूजा होती है। चुकी इसी दिन से सतयुग आरम्भ हुआ था, अतः इस दिन आंवले के पेड़ पर भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है और अपने जीवन मे सतयुग आने की कामना की जाती है। अक्षय नवमी के दिन स्नान, पूजा और दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
कहा गया है कि अक्षय नवमी के दिन किया जाने वाला सभी शुभाशुभ कर्म अक्षय हो जाते हैं अतः इस दिन सभी पुण्य कर्म , दान यज्ञ , पूजा पाठ आदि भी अक्षय हो जाता है।
अक्षय नवमी का महत्व :-
अक्षय नवमी का पर्व आंवले में विष्णु निवास से सम्बन्ध रखता है।
इसी दिन कृष्ण ने कंस का वध भी किया था और धर्म की स्थापना की थी।
इसी दिन आंवले को अमरता वरदान प्राप्त हुआ था। इसी कारण इसको धात्री फल भी कहा जाता है।
इस दिन आंवले का सेवन करने से और आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन करने से सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
इस दिन आंवले में विष्णु निवास होने से आंवले के वृक्ष के पास विशेष तरह की पूजा उपासना भी की जाती है।
इस दिन पवित्र नदी या गंगाजल से प्रातः काल में स्नान करके पूजा करने का संकल्प लें।
प्रार्थना करें कि आंवले की पूजा से आपको सुख,समृद्धि और स्वास्थ्य का वरदान मिले।
आंवले के वृक्ष के निकट पूर्व मुख होकर,जल, वस्त्र, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन कर उसमे जल डालें।
वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें,और कपूर से आरती करें।
वृक्ष के नीचे ब्राह्मण, अतिथि, और निर्धनों को भोजन कराएं एवं यथा शक्ति दान कर स्वयं भी भोजन करें।
*अक्षय नवमी का अक्षय पुण्य सबको मिले, अक्षय नवमी के पुण्य प्रभाव से सबकी सभी मनोकामना पूर्ण हो।*

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ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
*व्हाट्सएप नं.- 9934428775

 

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