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नेपाल में चीनी जासूस की सक्रियता

madhesh khabar
 
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सन् ६२ की पे्रतबाधा और ड्रैगन का फैलता जहर

नेपाल के खुफिया अधिकारियों ने एक चीनी जासूस की पहचान की है जो अमेरिकी आर्थिक सहायता मिलेनियम चैलेंज कोऑपरेशन के खिलाफ दुष्‍प्रचार करने में लगा हुआ था। यह गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई है जब नेपाल अमेरिकी सहायता पर अंतिम फैसला लेने वाला है। नेपाली मीडिया के मुताबिक चीनी खुफिया एजेंसी एमएसएस ने अमेरिकी सहायता को खारिज करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है।

खबर हब की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी नागरिक निंग लिन का नाम नेपाल के सुरक्षा अधिकारियों की लिस्‍ट में सबसे ऊपर है जो देश में अमेरिकी आर्थिक सहायता MCC के खिलाफ दुष्‍प्रचार करने में लगे हुए हैं। नेपाली खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि लिन नाम का यह चीनी नागरिक ड्रैगन की खुफिया एजेंसी एमएसएस का अधिकारी है। उसके पास दो पासपोर्ट है और माना जा रहा है कि वह चीन के हुबेई प्रांत से आया है

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रिपोर्ट में चीन के जासूसी का पूरा कच्‍चा चिट्ठा
नेपाल की 50 पेज की खुफिया रिपोर्ट में चीन के जासूसी का पूरा कच्‍चा चिट्ठा दिया गया है। इसमें 5 पेज तो केवल लिन के बारे में डिटेल है। इसमें उसकी गतिविधियां, संपर्क, लोगों से रिश्‍ते, उसका काम करने का तंत्र, नेपाली नेताओं और पत्रकारों के नाम शामिल हैं। एक उच्‍च पदस्‍थ नेपाली सूत्र ने कहा, ‘हमारी एक महीने तक चली जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि लिन चीनी खुफिया एजेंसी एमएसएस का अधिकारी है और उसका पूरा विवरण जल्‍द ही सरकार को दिया जाएगा।’

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एमएसएस चीन की खुफिया एजेंसी है जो विदेशों में खुफिया सूचनाएं इकट्ठा करने और जासूसी का काम करती है। नेपाल के सुरक्षा अधिकारी लंबे समय से चीनी जासूसी नेटवर्क की जांच कर रहे हैं और हाल ही में उन्‍होंने यह रिपोर्ट तैयार की है। इस दस्‍तावेज में जोर देकर कहा गया है कि नेपाल के अन्‍य देशों से संबंध खराब हो जाएं, इसके लिए चीन नापाक साजिश रच रहा है और तनाव को बढ़ा रहा है। इसमें खासतौर पर अमेरिका है और चीनी जासूस अमेरिकी सहायता एमसीसी के खिलाफ दुष्‍प्रचार कर रहे हैं और जमकर पैसा खर्च कर रहे हैं।

चीनी जासूस राजनयिक, पत्रकार के रूप में काम कर रहे
डेनमार्क में राजदूत रह चुके राजनीतिक विश्‍लेषक विजयकांत कहते हैं कि यह चीन के नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्‍तक्षेप का स्‍पष्‍ट उदाहरण है। उन्‍होंने कहा, ‘नेपाल भूराजनीतिक प्रतिद्वंदिता में फंस गया है और चीन की नेपाल में बढ़ती गतिविधि इसका परिणाम है।’ विजयकांत ने कहा कि नेपाल जैसे देश के लिए एमसीसी की जरूरत है। नेपाल की खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पूरी जासूसी का मास्‍टरमाइंड और इसमें शामिल लोग नेपाल में ही हैं। चीनी जासूस राजनयिक, पत्रकार और यहां तक कि बिजनसमैन के रूप में काम कर रहे हैं। बता दें कि चीन एमसीसी की जगह पर चाहता है कि नेपाल उसके बेल्‍ट एंड रोड प्रॉजेक्‍ट को बढ़ाए जो दुनियाभर में अपने कर्ज के जाल के रूप में कुख्‍यात है।

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