Fri. Apr 24th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

डांवाडोल है “न्याय का तराजु” रो रहा है अदालत : बिम्मी कालिन्दी शर्मा

 

(व्यग्ंय) बिम्मी कालिन्दी शर्मा, बीरगंज। न्याय का तराजु डांवाडोल है । बेचारा अदालत अपने उपर हुए अन्याय के कारण खुद रो रहा है । देश के नागरिक कंहा जाएं ? न्यायाधीश का चोला एक बार मिलता है और ईसी चोले में इमानदार भी बने घपला भी करें सम्भव नहीं है । ईसी लिए प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमसेर ने इमान का चोला उतार फेंका और सरे आम अपनी बेईमानी का नंगापन सब को दिखा दिया । अब उन के नंगेपन से बांकी न्यायाधीश आहत हैं कि कंही उनकी भी कलई न खूल जाए । ईसी वजह से वह बगूला भगत बन कर हडताल कर के न्याय को ही कटघरे में ल्याए । अब बेचारा न्यायालय खुद न्याय मांग रहा है पर गांधारी की तरह आंख मे पट्टी बंधी हूई न्याय की देवी मुस्कुरा रही है ।
राजनीति में शक्ति पृथकीकरण के सिद्दांत को कार्यपालिका, ब्यवस्थापिका और न्यायपालिका के संतुलन बनाए रखने के लिए जरुरी माना जाता है । पर सत्ता के भागबंडे ने शक्ति पृथकिकरण का ही चीरहरण कर दिया । न्याय देने वाला न्यायाधीश जब बनियागिरी करने लगे और सत्ता का मोलमलाई कर के तर माल खा जाए तब न्यायालय न्याय का मंदिर नहीं रह जाता वह मछली बाजार बन जाता हैं जंहा से संडाधं आने लगता है । अभी वही हो रहा है । कहने को तो एक सडी हुई मछली मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है कहा जाता है पर अदालत रुपी पोखर की तो सारी की सारी मछलियां गंदी और सडी हुई है ।
देश के नागरिक न्याय के लिए व्याकुल है । सरकार यह अदालत का मामला कह कर पल्ला झाड रही है । सरकार बनाने और अपनी सत्ता टिकाए रखने के लिए विभिन्न राजनीतिक दल के नेताओं ने अनेक तिकडम लगा कर जालझेल किया । जब पानी शीर से उपर चला गया और अदालत का किचड सत्ता के गलियारे तक पहुंच गया ईस देश के प्रधानमंत्री को शक्ति पृथकिकरण अचानक याद आया और पल्ला झाड कर खिसक लिए ।
दुनिया में कंही न होने वाला नौटँकी ईसी देश मे होता है । अदालत के सारे कामकाज ठप कर के न्यायाधीश और वकिल हडताल पे उतर आए और अब सडक पर प्रदर्शन कर रहें हैं । बेंच और बार के बीच ‘वार’ शुरु हो चूका है । अब बेंच हिलेगी या बार टुटेगा देखना यही है । अन्याय को न्यायालय ने ही पुनर्भाषित कर के अन्य-आय का माध्यम बना दिया है । सब को न्यायाधीश या प्रधान न्यायाधीश बनना है ईसी लिए एक दुसरे का पैर खींच रहे है । न्यायाधीश बन कर भी कोई न्याय का देउता नहीं बनेगा । बस न्याय का तराजु अपने हाथ में ले कर बनियागिरी करेगें और अपना पेट भरेगें । सारा खेल ईसी पापी पेट और खाली तिजोरी को भरने के लिए है । देश और जनता जाए भांड में ।
न्याय के मंदिर में ही न्याय भीख मांग रहा है । क्यों कि अन्याय, अनियमितता और अपराध चारों तरफ पसर चूका है । मालपोत, भन्सार और कर कार्यालय तो मूफ्त में यूहीं बदनाम है । सब से ज्यादा भ्रष्ट तो अदालत हैं । जहां न्यायाधीश अपने मन माफिक मुद्दो का किनारा करते हैं या निर्णय सुनाते है । यदि न्यायाधीश को मोटी रकम भेटं में दी गई तो सारे अपराध से वरी होगू नहीं तो जिंदगी भर जेल की चक्की पिसते रहो । न्यायाधीश न्याय का बाल बाल चीर कर न्याय देता है और अपराधियों का बाल भी नहीं बांका होता । बस नोट कि गड्डी दिखाओ और न्याय पाओ । न्याय और नोट एक दुसरे के पुरक हो गए है ।
अदालत का तमाशा देख कर मदारी भी अपना तमाशा दिखाना भूल गया है । क्यों कि न्यायाधीश ही मदारी बन कर नयाय के भालु को अपने मन मुताबिक नचा रहे हैं । शायद न्याय, ईमान, नैतिकता और विवेक नेपाल के लिए बने ही नहीं न ईस को किसी और देश से आयात ही किया जा सकता है । सब को जैसे भी हो पैसे कमाने है और अपने सात पुस्तों के लिए रखने है । जितने बेईमान और नीच बनेगें पैसे उतने ही ज्यादा झोली में फूल की तरह गिरेगेः । ईसी लिए न्यायाधीश और वकिलों ने नैतिकता और ईमान त्याग दी है । संसद को पुनर्जीवित करने के लिए जो नाटक पर्दे के पिछे किया गया था उसका पटाक्षेप पर्दे के आगे मंच में सबके सामने हो रहा है । ईसी लिऊ सब हक्के बक्के है । और आंखें चुधिंया गयी है सब की न्याय के मंदिर मे ईतनी ज्यादा गंजागोल और भ्रष्टाचार देख कर । न्याय का मंदिर अब अन्याय का अखाडा बन गया है । ईस से अब कोई न्याय की उम्मीद रखना बेकार है । न्याय का तराजु उपर निचे ईसी लिए है कि यहां न्याय हमेशा बेईमानी के हाथों हिलता रहा है । न्याय का पलडा हलका और अन्याय का पलडा भारी है । अदालण रणक्षेत्र बना है और कोई कृष्ण नहीं हो जो ईस से सभी को त्राण दे सके । सभी अन्याय की अग्नि में अपने स्वार्थ की रोटी सेंक रहे है ।

यह भी पढें   जनता समाजवादी पार्टी,  नेपाल द्वारा संविधान में संशोधन के लिए 30 सूत्रीय सुझाव
बिम्मी शर्मा

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

1 thought on “डांवाडोल है “न्याय का तराजु” रो रहा है अदालत : बिम्मी कालिन्दी शर्मा

  1. अत्यंत सामयिक!
    यथार्थ का बहुत ही सुंदर चित्रण!
    आदरणीया बिम्मी शर्मा जी को हार्दिक बधाई एवं अनंत मंगलकामनाएं!🙏🏼🙏🏼

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed