भारत ही नही पूरा विश्व ने एक सच्चा इंसान खो दिया : हिमालिनी की ओर से श्रद्धांजलि

काठमांडू, 9 नोवेम्बर 2021। भारत के प्रथम ‘चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ’ बिपिन रावत आज दिनांक 8 दिसम्बर को कुन्नूर, तमिलनाडु में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में शहीद हो गए। इत्तफाक से बिपिन रावत का सेन्य सफ़र 16 दिसम्बर 1978 को गोरखा 11राइफल्स की 5वीं बटालियन से शुरू हुआ था। एक कर्तव्य परायण फ़ौजी एवं देश के प्रति समर्पण व निष्ठा रखते हुए आपने भारतीय सेना में अनेक पदों को गौरवान्वित किया। अंततः भारतीय सेना के सर्वोच्च पद पर पहुंचे और 31दिसम्बर 2016 को देश के 27वे चीफ़ ऑफ़ आर्मी नियुक्त हुए और तीन वर्ष इस पद पर रहने के उपरांत 31 दिसम्बर 2019 को इस्तीफा दे दिया। परन्तु 1 जनवरी 2020 को इन्हें भारत का पहला ‘चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ’ (CDS) नियुक्त किया गया जिसके अंतर्गत थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों के बीच तालमेल करना था और रक्षा मंत्री और गृहमंत्री के मुख्य सलाहकार की भूमिका निभाना था।
चार दशकों से भी अधिक अपने सैन्य सेवा में आपने की सम्मान प्राप्त किए जिसमें विशिष्ट सेवा मैडल, युद्ध सेवा मैडल आदि शामिल है। बिपिन रावत ने भारत में ही नहीं अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सेवाएं दी । वे कोंगो के UN Mission के भागीदार थे और उसी वक्त उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेवाएं देने का मौका मिला – और 7000 लोगों की जानें बचाई। बिपिन रावत का जन्मदिन 16 मार्च 1958 को देहरादून में हुआ और प्रारंभिक शिक्षा शिमला के उपरांत देहरादून और अमेरिका में हुई। बिपिन रावत को फुटबॉल के साथ साथ लिखने का भी बहुत शौक था। आपके लेख देश विदेश में बहुत रूचि से पढ़े जाते हैं। उनका यह मानना था – “पद कोई भी हो, उसे सही तरीके से निभाने के लिए टीम वर्क बहुत जरूरी है”

उनके इस अक्समात निधन से भारत ही नही पूरा विश्व ने एक अभूतपूर्व सैनिक और एक सच्चा इंसान को खो दिया।
प्रधानमंत्री मा० श्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन पर अपने शोक सन्देश में कहा – “जनरल बिपिन रावत एक उत्कृष्ट सैनिक, सच्चे देशभक्त थे, उन्होंने हमारे सशस्त्र बलों और सुरक्षा तंत्र में बहुत योगदान दिया। युद्ध-नीति-विषयक मामले पर उनकी अंतर्दृष्टि और दृष्टिकोण असाधारण थे। उनके निधन से मुझे गहरा दुख पहुंचा है। ओम् शांति”: मुकेश भटनागर।
हिमालिनी परिवार की ओर से हार्दिक श्रद्धांजलि।
8.12.2021


