21 जनवरी शुक्रवार को माघी संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत जिसका नहाय खाय कल:-
*21 जनवरी शुक्रवार को माघी संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत जिसका नहाय खाय कल:-*
*और चन्द्रार्घ्य शुक्रवार को रात्रि 8:40 पर:- आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
*परसों शुक्रवार को माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस बार संकष्टी चतुर्थी का व्रत माघ कृष्ण तृतीया उपरांत चतुर्थी 21 जनवरी शुक्रवार को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, सौभाग्य और शोभन योग, सर्व देवमय साक्षात सर्व मंगलकारक अभिजीत के सूर्य प्रातः 9:23 से सौभाग्य सुंदरी व्रत के साथ किया जाएगा। यह चतुर्थी सौभाग्यवती स्त्रियों के साथ साथ कुंवारी कन्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष लाभदायक होगा। यह चतुर्थी साक्षात माता गौरी के साथ भगवान गणेश को समर्पित की जाएगी। इस संकष्टी चतुर्थी के दिन 9:23 से ही सूर्य का अभिजीत नक्षत्र में प्रवेश हो रहा है। साथ ही इसी दिन सौभाग्य सुंदरी व्रत भी हो रहा है जिसमे भगवान गणेश का पूजन करने से जीवन की सारी विघ्न बाधाएं दूर हो जाती हैं। और जीवन मे अखंड सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है। वैसे तो पूरे वर्ष में अधिमास लेकर 13 संकष्टी गणेश चौथ की प्रधानता है। प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष में चतुर्थी तिथि को संकष्टी गणेश चौथ के व्रत किए जाते हैं। किन्तु भाद्र पद और माघ मास की चतुर्थी का अत्यधिक महत्व है।*
इस संकष्टी चतुर्थी व्रत में पूजा का विशेष महत्व होता है….।
कृष्ण पक्ष के चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस दिन भगवान गणेश की पूजन किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख शांति बनी रहती है। भगवान गणेश की कृपा से घर में शुभता आती है कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं सफलता प्राप्त होती है। भगवान गणेश अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
चतुर्थी के दिन सायं स्नानादि करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें। उसके बाद *एक चौकी को लेकर पहले गंगाजल से उसे शुद्ध करें उसके बाद चौकी पर साफ पीला कपड़ा बिछाएं, तत्पश्चात उस पर गणेश जी की मूर्ति को विराजमान करें। भगवान गणपति के सामने धूप-दीप प्रज्वलित करें। उसके बाद तिलक करें और भगवान गणेश की यथा संभव पूजन कर पीले-फूल की माला और तिल का लड्डू अर्पित करें। भगवान गणेश को दूर्वा प्रिय है। दूर्वा एवं दुभ की माला अर्पित करने से वे बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं इसलिए चतुर्थी के दिन उन्हें दूर्वा की माला भी अर्पित करें। गणेश जी को तिल और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। और आरती करें।*
*गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए गणेश अथर्वशीर्ष, स्तोत्र, चालीसा, गणेश स्तुति का पाठ करें। रात्रि में 8:39 पर के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत को पूर्ण करें।*
*आपके सम्पूर्ण प्रसन्नता एवं सर्व साफल्यता के लिए सिद्धि विनायक और मनोकामना महादेव से प्रार्थना पूर्वक आपको हमारी सहृदय हार्दिक शुभकामना..*
*हरि ॐ गुरुदेव..!*
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*ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
*शुभम बिहार यज्ञ ज्योतिष आश्रम*
*रजिस्टार कालोनी , पश्चिम करगहिया रोड कालीबाग बेतिया*
*ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
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