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एमसीसी विरोध : मुख्य कारण राष्ट्रवाद अथवा भारत या चीन ?

 
mcc बिरोध का दृश्य

 

नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और गठबंधन के नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड ने पिछले वर्ष सितंबर में अमेरिका को पत्र लिख कर कहा था कि वे चार-पांच महीने में इस समझौते को संसद का समर्थन दिला देंगे, लेकिन अब तक इसे नेपाल की संसद में मंजूरी नहीं मिल सकी। इससे अमेरिका की नाराजगी बढ़ गई है। नेपाल में समझौते के विरोध को देखते हुए अमेरिका ने इसे रद करने की धमकी दी है। बाइडन प्रशासन का तर्क है कि अब वह और प्रतिक्षा नहीं कर सकता है। अमेरिका का कहना है कि यदि फरवरी तक इस समझौते को मंजूरी नहीं मिली तो वो 50 करोड़ डालर की इस सहायता को वापस ले लेगा।

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दरअसल, जब ये समझौता हुआ तो अमेरिका ने कहा था कि इसमें भारत को भी भरोसे में लेना होगा। इसकी बड़ी वजह यह है कि बिजली ट्रांसमिशन लाइन नेपाल के गुटवल से गोरखपुर तक बिछेगी। इसको लेकर भी नेपाल सरकार में शामिल कम्‍युनिस्‍ट पार्टियां विरोध कर रही है। कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का कहना है कि जब समझौता नेपाल और अमेरिका के बीच हुआ है, तो इसमें भारत को क्यों बीच में लाया जा रहा है। कम्‍युनिस्‍ट पार्टी भारत के विरोध में यह प्रचार कर रही हैं। उनका तर्क है कि यह नेपाल की स्‍वतंत्र विदेश नीति के लिए ठीक नहीं है।

हाल के दिनों में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियों और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में काफी अच्छे संबंध रहे हैं। यहां की सियासत में चीन एक बड़ा फैक्‍टर है। नेपाल में चीन का दखल काफी बढ़ा है। इसलिए इस समझौते से चीन को भी जोड़कर देखा जा रहा है। हाल में चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स में इस समझौते को लेकर चेतावनी दी गई थी। इस लेख में कहा गया है कि विकास कार्यक्रम की आड़ में यह चीन के विरुद्ध एक रणनीति है। अमेरिका दक्षिण एशिया में नेपाल जैसे छोटे देशों को चीन के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहता है।
सरकार में शामिल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी यह स्‍थापति करने में जुटी हैं कि यह समझौता चीन के असर को रोकने के लिए किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि अमेरिका और नेपाल के बीच हुए इस समझौते को लेकर कुछ दुष्प्रचार भी देखने को मिल रहा है। यह कहा जा रहा है कि अमेरिका इस मदद के बहाने नेपाल में अपने सैन्य अड्डे बना सकता है। कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के नेता यह संदेश दे रहे हैं कि यह चीन को रोकने की अमेरिकी रणनीति है। उनका कहना है कि इससे नेपाल की एकता और अखंडता को खतरा उत्‍पन्‍न हो सकता है। इसी के चलते नेपाल में इस समझौते का विरोध हो रहा है।

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प्रो. हर्ष वी पंत

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