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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दिमीर जेलेंस्की की रुस से भावुक अपील, दुनिया ने हमें छोडा अकेला

 

Ukraine 'always ready' to face provocations: President

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दिमीर जेलेंस्की ने अपने संबोधन में रूसी नागरिकों से भी मदद की अपील की। इस दौरान उन्होंने रूसी भाषा का इस्तेमाल किया। उनकी अपील का हिंदी अनुवाद –

‘मैंने आज का दिन रूसी संघ के राष्ट्रपति को फोन कॉल से शुरू किया। जवाब में मौन मिला। यह मौन डोनबस में होना चाहिए था। इसीलिए मैं रूस के सभी नागरिकों को संबोधित करना चाहूंगा –

हम 2,000 किमी लंबी आपसी सीमा से बंटे हैं। इसकी एक ओर आपके 2 लाख सैनिक और 1 हजार सशस्त्र वाहन हैं। आपके नेतृत्व ने उन्हें कदम आगे बढ़ाकर दूसरे देश की सीमा में जाने की सहमति दी है। यह कदम एक बड़े युद्ध में बदल सकता है। कोई भी वजह, कोई भी भड़काने वाली बात, चिंगारी, सब कुछ जलाकर राख कर सकती है। आपसे कहा गया है कि यह आग यूक्रेन के लोगों को आजादी दिलाने वाली है… लेकिन यूक्रेन के लोग स्वतंत्र हैं।

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आपसे कहा गया है कि हम नाजी हैं, लेकिन वे लोग नाजीवाद का समर्थन कैसे कर सकते हैं जिन्हाेंने नाजीवाद पर जीत के लिए 80 लाख लोगों की कुर्बानी दी? हम नाजी कैसे हो सकते हैं? यह बात मेरे दादाजी से पूछिये जो सोवियत रूस की पैदल सेना में पूरे युद्ध के समय शामिल रहे और एक कर्नल के रूप में स्वतंत्र यूक्रेन उनका देहांत हुआ। आपसे कहा गया कि हम रूसी संस्कृति से नफरत करते हैं। हम किसी संस्कृति से कैसे नफरत कर सकते हैं?

… पड़ोसी तो हमेशा एक दूसरे को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करते हैं। इससे हम पूरी तरह न अलग-थलग हो जाते, न पूरी तरह एक-दूसरे में घुल-मिल जाते हैं। बेशक हम अलग हैं, लेकिन यह दुश्मन बनने की वजह नहीं होती…

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आप तर्क की बात सुनिए। यूक्रेन के लोग शांति चाहते हैं, यूक्रेन के अधिकारी शांति चाहते हैं, इसके लिए वे सब कुछ कर रहे हैं… हम युद्ध नहीं चाहते।

फिर भी हम पर हमला हुआ, किसी ने हमारी जमीन छीनने की कोशिश की, हमारी आजादी, जीवन, हमारे बच्चाें का जीवन छीनना चाहा तो हम खुद की रक्षा करेंगे। हम हमला नहीं करेंगे, लेकिन खुद की रक्षा करेंगे। हम पर हमला करके आप हमारा चेहरा देखेंगे, हमारी पीठ नहीं।

युद्ध का मतलब दुख, रक्त, मिट्टी और हजारों, बल्कि लाखों की मौत होता है। आपसे कहा गया कि यूक्रेन रूस के लिए खतरा है। ऐसा न पहले था, न आज है, न भविष्य में होगा। लेकिन युद्ध यह गारंटी खत्म कर रहा है। किसी को भी सुरक्षा की गारंटी नहीं रहेगी। हम में सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा? लोगों को। कौन यह युद्ध सबसे कम चाहता है? लोग। कौन है जो यह सब रोक सकता है? लोग। यह लोग आपके बीच ही हैं, मुझे यकीन है।

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मैं जानता हूं कि मेरा यह भाषण रूस के टीवी पर नहीं दिखाया जाएगा। लेकिन रूस के लोगों को इसे देखना चाहिए। उन्हें सच जानना जरूरी है। सच यही है कि बहुत देर हो जाए, उससे पहले यह रुकना चाहिए।

अगर रूस का नेतृत्व शांति की मेज पर आकर हमारे साथ नहीं बैठना चाहता, तो शायद वह आपके साथ ऐसी मेज पर बैठे। क्या रूसी युद्ध चाहते हैं? मैं इस सवाल का जवाब देना पसंद करूंगा लेकिन जवाब आप पर निर्भर है… रूसी संघ के नागरिकों पर निर्भर है।’

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