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जनकपुरधाम में उमंगोत्सव पर्व एवम् प्रेमोत्सव पर्व पर मिलन समारोह और कवि गोष्ठी का आयोजन

 

जनकपुर धाम, 12 मार्च ।कल मिति 2078 फाल्गुन 27 गत्ते शुक्रवार को उमंगोत्सव पर्व के पूर्व संध्या में जनकपुर धाम के सीता पैलेस होटल में जहां एक ओर ब्रह्मर्षि महिला मिलन समारोह आयोजित किया गया था वहीं जनकपुर धाम के जनक चौक पर खुले आसमान के नीचे मैथिली साहित्यकार सभा तथा जनचेतना अभियान के संयुक्त तत्वावधान में प्रेमोत्सव के स्वागत हेतु काव्य गोष्ठी की आयोजना की गई थी। दोनो ही कार्यक्रम अपने अपने स्थान से जनकपुर के आवोहवा को गुलालों से जीवंत कर दिया। कोरोना के दनक से सहमें आम जन मानस के भीतर जनक चौक के खुले प्रांगण से लोगों में खुशियां और उमंग भरने का काम मैथिली कवियों ने किया। प्रेम, सौहार्द, शालीनता तथा जोगिरा सरररर के जोशीले धुन ने चौक से आवत जावत कर रहे हजारों लोगों के ध्यान को आकर्षित करता रहा। उधर एकही रंग और ढंग में सजी मिथिलानियों के द्वारा सीताराम विवाह को स्मरण करते हुए होली मिलन समारोह को राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य बुलंद व्यक्तित्व, स्पष्ट वक्ता, मृदुलाभाषी, सहृदयी श्रीमती विद्या सिन्हा जी के प्रमुख आतिथ्य तथा श्रीमती रेखा राय के दिव्य उद्घोषणों ने उपस्थित दिव्य ब्रह्मर्षि मिथिलानियोँ के हृदय को आह्लादित कर दिया। ब्रह्मर्षि समाज महिला मंच के अध्यक्ष श्रीमती विभा पांडे के अध्यक्षता में उपस्थित रूप, लावण्य और सौंदर्य की निधि ब्रह्माणियों के टोली को देखने पर ऐसा लगता था, मानो इंद्रलोक जनकपुर के धरा पर उतर आया है। सीता स्वयंवर के समय जिस प्रकार रंगभूमि का दृश्य था वही पुनरुक्ति होते दिख रहा था। गोश्वामी बाबा तुलसीदास ने लिखा है,” रंगभूमि जब सिय पगुधारी देखि रूप मोहे नरनारी।” इसके साथ साथ दहेज जैसे कुरीतियों पर भी जमकर विरोध किया गया। वैसे आजकल दहेज लेकर अपनी आत्मा को बेचने वाले भी आज बड़ी जोर शोर से दहेज के विरोध में वक्तव्य देते मिल जाएंगे। आज के कार्यक्रम में महिला के प्रति पुरुष के द्वारा किया जा रहा बदसलूकी, अत्याचार, मारपीट, अपमानित तथा हिंसा हत्या जैसे पासाविक कृत्य के पीछे शराबी, नसेड़ी, जुएडी संस्कार को जिम्मेवार ठहराया गया, जिस के सामाजिक प्रमाणीकरण हेतु ब्रह्मर्षि समाज के आधार स्तंभ सर्वमान्य महान आत्मा श्री रामरतन मिश्रा जी के विशिष्ट आतिथ्य में इस समारोह सुशोभित तथा सुसंपन्न किया गया। उक्त समारोह में पुरुष के प्रति नारियों के मन में उपजे भीषण विरोध को देखते हुए वहां उपस्थित पुरुषों ने इसे अपने विरुद्ध सुनियोजित षडयंत्र कह सच्चाई से मुख मोड़ते दिखे। जो की कमजोर पक्ष रहा। कार्यक्रम को अपनी मधुर स्वर से सराबोर करते हुए श्रीमती शोभा शर्मा ने स्वागत गान प्रस्तुत कर उपस्थित सभी सहभागियों को एक दूसरे के हृदय के करीब लाने का काम किया। इस कार्यक्रम को संगीतमय बनाने के लिए श्री शिवपूजन राय जी के नेतृत्व में आए मंडली ने होली के मधुरिम फुहार से सबको सराबोर कर दिया। यह, वह समारोह था, जो विश्राम को प्राप्त होने के वावजूद भी सब एक दूसरे से गले मिल रहे थे। शुभकामनाएं और बधाईयां अर्पण किया जा रहा था। खुशियां बांटी जा रही थी। गुलाल उड़ाए जा रहे थे। अबीर लगाई जा रही थी। मिठाईयां खिलाई जा रही थी। वास्तव में वह दृश्य अति ही मनमोहक लग रहा था। जो आज के इस कार्यक्रम में शामिल होने से वंचित रह गए उन्हें एक वर्ष तक प्रतीक्षा करना होगा।

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नीचे के इस मूल मंत्र के साथ आज के इस कार्यक्रम को पूर्ण विश्राम दिया गया।
‘ जो टूट गए संबंध कभी, फिर से उनका उद्धार करो।
जो साथी पथ में रूठ गए, उन से फिर आंखे चार करो।।
तुम पहल करो आलस छोड़ो, टूटे संबंधों को जोड़ो।।।
दायित्वम शरणम् गच्छामि…..।

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