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नागरी लिपि विश्वलिपि बनने में पूर्णतया सक्षम : डॉ यादव

 

मनुमुक्त ट्रस्ट द्वारा अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि-सम्मेलन आयोजित

नारनौल। राजभाषा हिंदी की लिपि होने के कारण नागरी को राजलिपि का संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। यह कहना है सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के कुलपति डॉ उमाशंकर यादव का। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट, नारनौल (हरियाणा) द्वारा, नागरी लिपि परिषद्, नई दिल्ली के सौजन्य से, स्थानीय सैक्टर- 1, पार्ट-2 स्थित मनुमुक्त भवन में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि-सम्मेलन’ में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि विश्व की सर्वोत्तम लिपि होने के कारण नागरी विश्वलिपि बनने में पूर्णतया सक्षम है। नागरी लिपि परिषद्, नई दिल्ली के अध्यक्ष और पूर्व कुलपति डॉ प्रेमचंद पतंजलि ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में स्पष्ट किया कि भारतीय भाषाओं के लिए सर्वाधिक उपयुक्त लिपि नागरी ही हो सकती है। महात्मा गांधी के इस विचार को क्रियान्वित करने में परिषद् महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस अवसर पर नागरी लिपि परिषद्, नई दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष और पुणे (महाराष्ट्र) के विख्यात शिक्षाविद् डॉ शहाबुद्दीन शेख, महामंत्री डॉ हरिसिंह पाल और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक (हरियाणा) में हिंदी-विभाग की अध्यक्ष डॉ पुष्पा के अतिरिक्त नई दिल्ली के ओमप्रकाश आचार्य, हैदराबाद (तेलंगाना) के डॉ जेएल रेड्डी, रायपुर (छत्तीसगढ़) की डॉ मुक्ता कौशिक, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) की रश्मि श्रीवास्तव और दादरी (हरियाणा) डॉ अशोककुमार ‘मंगलेश’ ने भी नागरी लिपि के स्वरूप, विकास और महत्त्व पर प्रकाश डाला। चीफट्रस्टी डॉ रामनिवास ‘मानव’ के प्रेरक सान्निध्य तथा अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, नारनौल के जिला अध्यक्ष डॉ जितेंद्र भारद्वाज के कुशल संचालन में संपन्न हुए इस भव्य समारोह में अलवर (राजस्थान) के वरिष्ठ कवि संजय पाठक, रेवाड़ी के प्रो मुकुट अग्रवाल और मंडी अटेली के डॉ सीएस वर्मा ने अपने मधुर गीतों द्वारा कार्यक्रम को रसमय बना दिया, वहीं डॉ ‘मानव’ ने, अपने दोहों के माध्यम से, नागरी लिपि के स्वरूप और स्थिति पर इस प्रकार प्रकाश डाला-“लिपियों में लिपि नागरी, अद्भुत और अनूप। आकर्षित सबको करे, इसका मानक रूप।।” इस अवसर पर आयोजित वर्चुअल सत्र में काठमांडू नेपाल की डॉ श्वेता दीप्ति, केलानिया (श्रीलंका) के डॉ लक्ष्मण सेनेविराठने, स्टाॅकहोम (स्वीडन) के सुरेशचंद्र पांडे, पोर्ट ऑफ स्पेन (त्रिनिडाड) के डॉ शिवकुमार निगम, वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) की डॉ एस अनुकृति और चेन्नई (तमिलनाडु) की डॉ राजलक्ष्मी कृष्णन ने सहभागिता की। समारोह के अंत में सभी संभागी विद्वानों को, नागरी लिपि के विकास में उनके उल्लेखनीय योगदान के दृष्टिगत, अंगवस्त्र, स्मृति-चिन्ह और सम्मान-पत्र भेंटकर ‘डॉ मनुमुक्त ‘मानव’ विशिष्ट नागरी-सम्मान’ से नवाजा गया। समारोह में नागरी लिपि परिषद्, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष डॉ परमानंद पांचाल को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। समारोह में लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के संजय श्रीवास्तव, मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट, नारनौल की ट्रस्टी डॉ कांता भारती, बाल कल्याण परिषद्, चंडीगढ़ के राज्य नोडल अधिकारी विपिन शर्मा, रेवाड़ी के प्रोफेसर बलबीर सिंह और डॉ प्रवीण कुमारी, हरियाणा व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष बजरंगलाल अग्रवाल, निगरानी समिति के पूर्व चेयरमैन और मनोनीत पार्षद् महेंद्र गौड़, पीएनबी के पूर्व प्रबंधक बनीसिंह यादव, पूर्व प्राचार्य डॉ सुमेरसिंह यादव, किशनलाल शर्मा, कृष्णकुमार शर्मा, पुष्पलता शर्मा, गोविंद व्यास, डॉ कृष्णा आर्या, प्रो हितेश कुमार, डॉ महताब सिंह, परमानंद दीवान, डॉ सुनील भारद्वाज, धर्मवीर विद्यार्थी, सत्यवीर चौधरी आदि महानुभावों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।

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