आर्थिक संकट से जूझता श्रीलंका, मित्रों ने छोडा साथ सहायता के लिए भारत पर नजर
श्रीलंका वर्तमान में सबसे खतरनाक आर्थिक गिरावट से जूझ रहा है। श्रीलंका का विदेश भंडार इस वक्त अपने ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। घटते विदेशी मुद्रा भंडार, बेतहाशा बढ़ती कीमतों और भोजन सामग्री की कमी की संभावनाओं के बीच राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे की सरकार कुछ भी करने को तैयार है। श्रीलंका के नेता इन हालात के लिए कोरोना को जिम्मेवार ठहरा रहे हैं, लेकिन आलोचक इसके लिए सरकार को ही दोषी ठहरा रहे हैं। विपत्ति काल में श्रीलंका सरकार की निगाह भारत की ओर है।
श्रीलंका के आर्थिक संकट का असर उसके विदेश नीति पर भी पड़ रहा है। श्रीलंका की विदेश नीति में बदलाव देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि चीन की ओर जाता श्रीलंका अब भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने की जुगत में है। इसके पीछे ड्रैगन की कर्ज नीति और भारत की मोदी सरकार की पड़ोसी मुल्कों के साथ सकारात्मक रुख की नीति जिम्मेदार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेबरहुड फर्स्ट पालिसी भारत के पड़ोसी मुल्कों के साथ बेहतर संबंध बनाने की पहल रंग लाई। श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की श्रीलंका यात्रा इसी कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए। श्रीलंका में नई सरकार के गठन के ठीक बाद भारत ने सभी मतभेदों को भुलाकर एक सकारात्मक पहल की।

