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भारत और नेपाल कोशी बैराज और सुरक्षा और सिंचाई विषयों पर सहयोग बढ़ाएंगे

 

भारत नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजना संयुक्त समिति की पटना में हुई 10वीं बैठक के दूसरे दिन बुधवार को कोसी और गंडक परियोजनाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर दोनों देशों के बीच विचार-विमर्श हुआ। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जल संसाधन सचिव संजय कुमार अग्रवाल कर रहे थे। नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां के जल संसाधन एवं सिंचाई विभाग के डायरेक्टर जनरल सुशील चंद्र आचार्य ने किया।
सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि भारत नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजना संयुक्त समिति की बैठक में कोसी और गंडक परियोजनाओं से संबंधित सभी मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। दोनों देशों के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत एवं कारगर बनाने के तरीकों पर सहमति बनी। साथ ही सभी तरह के आकस्मिक मुद्दों के निराकरण के लिए त्वरित समन्वय पर जोर दिया गया।
कोसी बराज के साथ अपस्ट्रीम में पूर्वी एफलक्स बांध 32.00 किमी की लंबाई में बना है, जबकि पश्चिमी एफलक्स बांध 12.00 किमी लंबाई में है। कोसी बराज के डाउन स्ट्रीम में पूर्वी कोसी तटबंध 125 किमी की लंबाई में तथा पश्चिमी कोसी तटबंध 110.00 किमी लंबाई में है। इन तटबंधों के निर्माण से बिहार और नेपाल के बहुत बड़े भूभाग को बाढ़ से सुरक्षा मिलती है।
इसी तरह कोसी बराज से दो नहरं पूर्वी कोसी नहर और पश्चिमी कोसी नहर निकलती हैं। इनसे नेपाल के सप्तरी जिले और बिहार के सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, मधुबनी तथा दरभंगा जिलों में सिंचाई की सुविधा प्रदान की जाती है। गंडक बराज का उद्देश्य बड़े इलाके को बाढ़ से सुरक्षा और सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल-विद्युत उत्पादन है।
इस परियोजना से उत्तर बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिले को गंडक तथा उसकी सहायक नदियों में आने वाली बाढ़ से सुरक्षा तथा बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल में कुल 15.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में वार्षिक सिंचाई के साथ-साथ 30 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होता है। बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में सचिव के अलावा इंजीनियर इन चीफ रविंद्र कुमार शंकर, ईश्वर चंद्र ठाकुर, विदेश मंत्रालय के शैलेंद्र के अलावा केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार के कई पदाधिकारी शामिल हुए।

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