नेपालगन्ज के मधेशी समुदाय में भुर्की पूजन
नेपालगन्ज,(बाँके जिला) पवन जायसावाल कार्तिक २० गते ।
मधेशी समुदाय में दीपावली के अन्तिम दिन मंगलवार को यम द्धितीया अर्थात् भैया दुईज में भुर्की पूजन धूम धाम के साथ मनाया गया ।
मधेशी समुदाय की महिलाएँ अपने– अपने दादा, भैया को टीका लगाकर चुरा, भुर्की और मिठाई खिलाकर भैया दूइज मनाया गया । 
इसमे घर के आँगन में गाय का गोबर से लीप पोत करके भाई का चित्र बनाकर बनायी जाती है, नदी तलाव, पर्बत, बाघ, भालु, सर्प, बन जगंल का भी चित्र बनाती है , जंगलों में मिलने वाला कुश लगायत बिभिन्न काँटों को राखकर उस के उपर सिलौटा रखके पूजा करने का चलन है । और भाइयों को किसी प्रकारकी बाधा अडचन बाधा, भालु, सर्प, जगलों के काँटा पैर में न चुभे इस लियें सभी का चित्र बनाकर पूजा करने का चलन रहा है ।
सिलौटा के उपर चामल का आँटा से नदी बनाकर उसमें धर्म के भाईका मुर्ती बनाकर पूजा करने का चलन है । गाँव टोला पडोसी के सभी महिलाएँ एकजुट होकर के सामुहिक रुपों में भुर्की पूजा करने के बाद में भोजन करने का परम्परा रहा है । 
उसी अवसर पर भाई को बहन को सुख, समृद्धि और शान्ति के लियें बिभिन्न प्रकार की कथा, कहानी भी सुनायी जाती है । 
भुर्की पूजन के समय में दिदी, बहन लोंग अपने– अपने दादा भैया का सुख, शान्ति, उन्नति, सुस्वास्थ्य, प्रगति लगायत की कामनाए भी करती है ।
पूजा करके चुरा भुर्की दूर दूर में रहने वाले दादा भैया को कार्तिक पुर्णिमा तक खिलाने का प्रचलन रहा है ।
इसी तरह बाके जिला नेपालगन्ज के सदरमुकाम से करीब ८ किलोमीटर पूर्व में रहा कम्दी गाबिस का सिंधनिया गाँव की मधेशी समुदायकी महिलाए ने सामूहिक रुप में मंगलवार को भैया दूइज (भुर्की पूजन की । सीमावर्ती क्षेत्र भारत में भी बडा धूमधाम के साथ मनाया गया है ।

