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भारत – नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्रों का बदलता डिमोग्राफी- दोनों देशों के लिये खतरा : ललित झा

 

सीमा से ललित झा । भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा दुनियाँ की सबसे शांत स्थिर सुरक्षित एवम् पूर्णतः खुली अंतराष्ट्रिय सीमा के रूप में सदियों से विख्यात रही है जहाँ सीमा के दोनों तरफ शांतिप्रिये लोग निवास करते हैं. वैसे तो भारत नेपाल के बीच अंतराष्ट्रिय सीमा के भूगोल का इतिहास समय समय पर परिवर्तित होता रहा है मगर मौजूदा सीमा का निर्धारण 1816 से लेकर 1860 के बीच हुआ है,इस तरह से यह अनोखा अंतराष्ट्रिय सीमा लगभग 1751 कि. मि. लम्बा व 206 वर्ष प्राचीन है l 1751 किमी लम्बी इस अंतराष्ट्रिय सीमा पर मौजूद शांति सौहार्द, खुलापन और भाईचारा के कारण लोग इसे दो मित्र देशों को जोड़नेवाली अंतराष्ट्रिय सीमा भी कहते हैं l सीमा के दोनों तरफ आम लोगों के बीच प्रायः ऐसी धारणा रही है की यह अंतराष्ट्रीय सीमा भारत नेपाल को बिभाजीत नही अपितु जोड़ती है l

 

इसका तात्पर्य यह है कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भले ही यह भारत नेपाल को अलग करती है मगर सामाजिक सांस्कृतिक धार्मिक एबम भौगोलिक रूप से यह दोनों देश के लोगों को आपस में जोड़ती है l सीमा के दोनों तरफ समाज एक है, संस्कृति, धर्म, और आर्थिक गतिविधियाँ सभी एक समान है, l यही नही दोनों देश के समाज की चुनौतियाँ भी साझा व समान है l दोनो देश के लोग रोटी से लेकर बेटी तक, रिश्ता नाता से लेकर बाढ़ की विभीषिका जैसी चुनौतियाँ तक, सभी एक दूसरे से साझा करते हैं इसलिए यह अंतराष्ट्रीय सीमा इतना शांत स्थिर सुरक्षित व खुला है जहाँ दोनों देशों की सुरक्षा के लिए कभी कोई खतरा उत्पन्न नही हुआ लेकिन अफसोस विगत कुछ वर्षों से हमेशा शांत व खुला रहनेवाला यह अंतराष्ट्रीय सीमा कुछ अलग ही कारणों से सुर्खियां बन रही है l हाल के कुछ घटनाओ से ऐसा प्रतीत होता है जैसे इस अंतराष्ट्रिय सीमा पर सदियों से कायम शांति स्थिरता एबम भाईचारा को किसी भारत नेपाल मित्रता के दुश्मनों की नजर लग गयी है l 11 जुन 2022 को भिठामोर से दो चीनी नागरिक लु लैंग और यु हैलेंग की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हो गया है कि इस खुली अंतराष्ट्रिय सीमा पर कुछ भारत के विरोधी देश योजनावद्ध रूप से कार्य कर रहे हैं तथा इस अंतराष्ट्रिय सीमा पर मौजूद शांति एबम खुलेपन का फायदा उठाकर भारत व नेपाल दोनों देशों के विरुद्ध षड्यंत्र कर रहे हैं ताकि भारत की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाया जा सके l इसके लिए पाकिस्तान और चीन पिछले कई वर्षों से गुपचुप तरीके से योजनावद्ध होकर एक साथ कई मोर्चे पर कार्य कर रहा है l भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा से सटे नेपाल के क्षेत्रों की जहाँ एक तरफ “डिमोग्राफी” को बदला जा रहा है, सीमावर्ती क्षेत्रों का तेजी से इस्लामिकरण किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे ” नार्को टेरोरिज्म” के सुरक्षित अड्डा मे तब्दिल किया जा रहा है ताकि अपेक्षाकृत शांत समझे जानेवाले इस उत्तरी सीमा से भारत के भूराजनीतिक एबम सामरिक हितों को नुकसान पहुंचाया जा सके l
भारत विरोधी तत्वों के लिये भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा बहुत अनुकूल हो गया है क्योंकि भारत पाकिस्तान सीमा, भारत बांग्लादेश सीमा तथा भारत चीन सीमा पर भारतीय सुरक्षा एजेंसीयों द्वारा की गयी जबरदस्त सुरक्षा इंतजाम एवम् तारबंदी के कारण इस सीमा से घुसपैठ लगभग असंभव हो गया है ऐसे में नेपाल के रास्ते भारत में घुसपैठ करना करवाना एक अच्छा विकल्प बन कर उभरा है l आज जहाँ एक तरफ चीन नेपाल में अपनी मजबूत उपस्थिति का फायदा उठाकर सीमावर्ती क्षेत्रों में न सिर्फ स्लीपर सेल का मजबूत नेटवर्क स्थापित कर रहा है वरन इसके जरिये चीन अपने खुफिया एजेंटों को भारत में अबैध घुसपैठ भी करवा रहा है ताकि भारत में रह कर भारत के सरकार के खिलाफ माहौल तैयार कर भारत को आर्थिक व राजनीतिक रूप से अस्थिर किया जा सके l इसके लिये चीन गंभीर प्रयास कर रहा हैl इस अंतराष्ट्रिय सीमा पर हो रहे विभिन्न प्रकार की घटनाएँ यह बताने के लिए काफी है कि बॉर्डर पर कितनी खतरनाक परिस्थितियाँ उत्पन्न हो रही है l

सीमा पर मधवापुर से चीनी नागरिक की गिरफ्तारी

वैसे तो इस अंतराष्ट्रिय सीमा पर भारत द्वारा वर्ष 2001 मे अर्ध सैनिक बल एस. एस. बी को तैनात किया गया था वही नेपाल द्वारा ए. पी.एफ. को तैनात किया गया था l कभी पूर्णतः खुला रहने वाले इस अंतराष्ट्रिय सीमा पर आज चार स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था किया गया है l भारतीय सुरक्षा एजेंसी एस एस बी की करीब 511 बी. ओ. पी.तथा नेपाल की ओर से ए. पी. एफ. की 220 बी. अो. पी. संचालन में है, बावजूद इसके कभी चिनियाँ जासूस के अबैध घुसपैठ को लेकर तो कभी पाकिस्तानी नागरिकों के घुसपैठ के कारण तो कभी ड्रग्स, जाली नोट और हथियारों की तस्करी के कारण, यह सीमा समय समय पर सुर्खियां बनती रही है l लगभग 180 वर्षों तक भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा पूर्णतः अनगार्डेड था जहाँ सिर्फ नाम मात्र की सुरक्षा थी, उस दौर में यह सीमा हमेशा शांत स्थिर व सुरक्षित रही मगर आश्चर्य है कि जब से यहाँ सुरक्षा बंदोवस्त् सुदृढ़ किया गया है, तब से यहाँ सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ काफी बढ़ गयी है l भारत और नेपाल की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण इस सीमा पर सामाजिक आर्थिक एबम धार्मिक परिदृश्य मे आये गंभीर बदलाव के कारण यह काफी संवेदनशील हो गया है l मजबूत भारत नेपाल संबंध के लिए जरूरी इस खुला सीमा पर सामाजिक आर्थिक और धार्मिक परिदृश्य मे आये बदलाव का संकेत और संदेश काफी स्पष्ट और गंभीर है जिसका विवेचना आवश्यक है अन्यथा निकट भविष्य में इस सीमा पर गंभीर अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है जो भारत और नेपाल दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है l

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अंतराष्ट्रिय सीमा पर बदलता “डिमोग्राफी”– एक सुरक्षा एजेंसी द्वारा सीमा पर किये गये अध्यन व सर्वेक्षण में काफी चौकाने वाली जानकारी सामने आयी है l प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा पर सामाजिक आर्थिक तथा धार्मिक संरचना में काफी तेजी से बदलाव हो रहा है जो हैरान करनेवाला है l नेपाल का कुल 27 जिला भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा पर स्थित है l दोनो देशों के बीच प्रगाढ़ मैत्रिपूर्ण रिश्तों के लिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नेपाल के इस सीमावर्ती जिलों के डिमोग्राफी मे बदलाव सोचनीय है l वर्ष 2011 के जनगणना के अनुसार नेपाल में मुस्लिमों की आवादी करीब 11 लाख 64 हजार थी जो कुल जनसंख्या का करीब 5 प्रतिशत होता है l हालांकि वर्ष 2022 के जनगणना का धार्मिक तथ्यांक अब तक जारी नही किया गया है मगर एक अनुमान के मुताबिक नेपाल के कुल जनसंख्या मे मुस्लिमों की आवादी लगभग 12 से 14 प्रतिशत के करीब होगी l नेपाल में मौजूद मुस्लिमों मे से करीब 95 प्रतिशत मुस्लिम आवादी भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा पर मौजूद नेपाल के इसी सीमावर्ती जिलों तथा मधेश प्रदेश मे ही निवास करती है l


वर्ष 2011 के जनगणना के तथ्यांक के अनुसार नेपाल के रौतहट मे 19.7%, बांके मे 19%, कपिलवस्तु मे 18.2%, पर्सा मे 14.5%, महोत्तरी मे 13.3%, बारा मे 13% एबम सुनसरी मे 11.5% मुस्लिम आवादी रहती थी और पिछले एक दशक में इसमें तेज वृद्धि लगातार जारी है ये सभी अंतराष्ट्रिय सीमा पर अवस्थित नेपाल के सीमावर्ती जिले है l एक ठोस अनुमान के मुताबिक वर्ष 2022 की जनगणना मे इन जिलों मे मुस्लिमों की जनसंख्या करीब 25 से 30 प्रतिशत होने की संभावना हैl ऐसा नहीं है कि नेपाल के इन सीमावर्ती जिलों में सिर्फ मुस्लिमों की जनसंख्या मे ही तेज वृद्धि हो रही है बल्कि इन जिलों में मदरसा और मस्जिदों की संख्या में भी आश्चर्यजनक वृद्धि हुयी है l  चौकानेवाली वात ये है कि इन मदरसों के संचालन हेतु विदेशों से भारी मात्रा में पैसा आता है l सऊदी अरब, कुवैत, कतार, पाकिस्तान और तुर्की से विभिन्न माध्यमो से इन मदरसों के संचालन हेतु अरबों रुपया भेजा जा रहा है l नेपाल के सीमावर्ती जिलों मे अवस्थित कई मदरसे ऐसे है जिनका एक वर्ष का वार्षिक बजट 100 करोड़ से अधिक है l जनकपुर के एक मदरसा का वार्षिक बजट सौ करोड़ से अधिक है और हैरानी की बात ये है कि ऐसे एक नही कई मदरसे है l पर्सा, महोत्तरी, धनुषा, सिरहा, सप्तरी जैसे सीमावर्ती जिलों में ऐसे कई मदरसे है जिनका निर्माण करोड़ो के आर्थिक लागत से हुआ है l अब सवाल ये उठता है कि सीमावर्ती जिलों में निर्मित किला जैसे इन मदरसों के निर्माण का असली उद्देश्य क्या है? इस किलेनुमा मदरसों का निर्माण कौन और किस मकसद से करवाया जा रहा है?? इन महत्वपूर्ण सवालों का जवाव नेपाल सरकार द्वारा गठित विशेष जाँच दल की रिपोर्ट से मिलता है l दरअसल समाज कल्याण परिषद मे व्याप्त अनियमितता की जांच हेतु सरकार द्वारा साउन १८,२०७५ मे पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री मोहन रमन भट्टराई के नेतृत्व में एक विशेष जाँच दल का गठन किया गया था l इस जाँच दल का रिपोर्ट काफी गंभीर, चिंताजनक व आँखें खोलनेवाली है l इस रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ वर्ष 2074-75 मे 42 अरब रुपया विदेशों से नेपाल भेजा गया था l आयोग ने अपनी जाँच रिपोर्ट में इस बात का इशारा किया है कि विदेशों से नेपाल भेजे गए इन अरबों रुपयों मे से अधिकांश का स्रोत अज्ञात है, जो आतंकी संगठनो का हो सकता है , इन पैसों का इस्तेमाल सीमावर्ती क्षेत्रों में गगनचुंबी, किलेनुमा मदरसा मस्जिद, चर्च, और गुम्बा निर्माण में हो रहा है l नेपाल मे अंतराष्ट्रिय आतंकी संगठनों का INGO के माध्यम से संदिग्ध लगानी होने की भी सूचना है l जाँच आयोग ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि isi, अलकायदा, अल्फलाही, जमात उद दावा, जे एम बी और pfi जैसा आतंकी संगठन ingo के माध्यम से नेपाल में पैसा भेज रहा हैl इन पैसों का इस्तेमाल कई तरह से होता है l जहाँ एक तरफ इस पैसे से नेपाल के सीमावर्ती जिलों में बड़े बड़े अलीशान रणनीतिक महत्व के मदरसे मस्जिद का निर्माण किया जा रहा है वही दूसरी तरफ यह पैसा हवाला के माध्यम से भारत के सभी प्रमुख जगहों तक पहुँच रहा है जिसका इस्तेमाल भारत में आतंकवाद को फैलाने व आतंकी घटनाओ को आंजम् देने मे किया जा रहा है l आजकल भारत में होने वाले प्रायः सभी आतंकी घटनाओ मे अंतराष्ट्रिय सीमा से सटे नेपाल के इन सीमावर्ती जिलों मे मौजूद मदरसे मस्जिदों की भूमिका सामने आती रही है, चाहे आतकियों को ट्रेनिंग देना हो या उसे ठहराना या फिर बड़ा बड़ा मीटिंग आयोजित करना, इन सब मे सीमावर्ती क्षेत्र के मदरसों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है l सीमावर्ती क्षेत्र के जानकारों की माने तो सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी isi, चिनियाँ खुफिया एजेंसी SSB(state security bureao) का इन क्षेत्रों में मजबूत नेटवर्क फैल रहा है l ये अपने स्लीपर सेल की मदद से अपने मकसद को अंजाम देते हैं l ऐसा नहीं है कि ऐसी स्थिति सिर्फ नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों की ही हैं बल्कि भारतीय सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति भी कमोवेश वैसा ही हैं , अंतराष्ट्रिय सीमा पर अवस्थित भारत के सिर्फ मधुबनी जिले में ही मदरसा और मस्जिदों की संख्या 1000 से अधिक है. ठीक सीमा पर अवस्थित बिहार के जयनगर थाना क्षेत्र मे 40 , लदानियाँ मे 30, बासोपट्टी मे 50, देवधा मे 36, तथा हरलाखी थाना क्षेत्र में कुल 105 से अधिक मदरसे और मस्जिद है जिनमें से अधिकांश अनिबंधित है l मुम्बई बम विस्फोट से लेकर आज तक भारत में हुये सभी बड़े आतंकी हमले मे इन क्षेत्रों के लोगों तथा मदरसों की भूमिका सामने आती रही है, मधुबनी के बासोपट्टि से आतंकी कमाल अंसारी, फहीम, करीम टुंडा, चंपारण से यासीन भटकल जैसे दुर्दांत आतकियों की गिरफ्तारी इन सीमावर्ती क्षेत्रों से हो चुकी हैl नेपाल की तरह भारत के पश्चिमी एबम पूर्वी चंपारण, सीतामढी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, कटिहार किशनगंज समेत बंगाल एबम उत्तर प्रदेश के दर्जनों जिले ऐसे है जहाँ मुस्लिमों की आवादी मे अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है l सिर्फ उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में 257 से अधिक मदरसे मस्जिद मौजूद है और दिन ब दिन इनकी संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि जारी है l नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्ष 2018 मे मस्जिद की संख्या 738 थी जो 2021 मे बढ़कर 1000 से अधिक हो गयी हैl उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मदरसा, मस्जिद और मुस्लिमो की जनसंख्या मे अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है और धीरे धीरे काफी सुनियोजित तरीके से सीमावर्ती क्षेत्रों का डिमोग्राफी को चेंज किया जा रहा है l

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फाइल चित्र

 

ऐसा नहीं है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सिर्फ मुस्लिमों की आवादी ही बढ़ रही है बल्कि यहाँ ईशाइ व बौद्ध लोगों की जनसंख्या मे भी तेज वृद्धि देखी जा रही है l खासकर नेपाल के मधेश प्रदेश के धनुषा, सिरहा, सप्तरी, सुनसरी, महोत्तरी, सर्लाही जैसे जिलों में l वैसे तो पूरे नेपाल में ईशाइ और बौद्ध की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है यह वृद्धि दर नेपाल के सीमावर्ती जिलों में कुछ ज्यादा ही हैंl मधेश मे ईशाइ मिशनरियों की सक्रियता बहुत ज्यादा बढ़ गयी है , सिरहा, धनुषा सप्तरी जैसे जिलों में सुनियोजित रूप से धर्मांतरण तेज गति से हो रहा है जिससे इन सीमावर्ती जिलों में इशाइयों की जनसंख्या मे भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है l स्थानीय लोगों का कहना है कि आज से पाँच वर्ष पूर्व सिरहा जिला मे एक भी चर्च या प्रार्थना घर नही था मगर आज सिर्फ सिरहा मे 10 से अधिक चर्च संचालित है, धनुषा जिला मे भी 20 से अधिक चर्च संचालन में है जहाँ पहले एक भी चर्च नही था l स्थानीय लोगों का कहना है कि यूरोपियन यूनियन तथा अमेरिका से जुड़े NGO, INGO तथा मानव अधिकार संस्थाओ द्वारा मानव अधिकार प्रशिक्षण के नाम पर मधेश के दलित और महादलित आवादी को तेजी से ईशाइ बनाया जा रहा है l मधेश मे दलित आवादी का काफी तेजी से धर्मांतरण हो रहा है, इसके लिए दर्जनों ngo, ingo इस क्षेत्र में कार्यरत हैं l स्थानीय लोगों के अनुसार धन तथा बच्चों को शिक्षा का प्रलोभन देकर दलितों तथा गैर दलितों को ईशाइ बनाया जा रहा है जिस कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में चर्च की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है l इसके साथ ही बौद्ध लोगों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, पहले मधेश के जिलों में बौद्ध की जनसंख्या नगण्य थी मगर पिछले कुछ वर्षों में बौद्ध धर्मावलंबियों की संख्या में तेज वृद्धि हुयी है विशेष कर महेंद्र राजमार्ग के इर्दगिर्द. अब मधेश मे भी बौद्ध धर्म से जुड़े गुम्बा और झंडे नजर आने लगे हैं . खबर तो ये है कि इन क्षेत्रों में बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के पीछे चीन है l दरअसल चीन ये चाहता है कि चीन प्रायोजित बौद्ध धर्म का विस्तार मधेश समेत पुरे नेपाल में हो ताकि नेपाल चीन के बीच धार्मिक रिश्तों की कबायद की जा सके. मधेश और नेपाल में विभिन्न निर्माण परियोजनाओ पर कार्यरत चीनी निर्माण कंपनी की सहायता से चीन अपने इस मकसद को अंजाम दे रहा है l उपरोक्त तथ्यों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्रों का डिमोग्राफी बदला जा रहा है, सीमावर्ती का इस्लामिकरण, ईशाइकरण और बौधिकरण किया जा रहा है lइससे सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांखिकिये असंतुलन उत्पन्न हो रहा है l इसका भारत और नेपाल दोनों देशों की सुरक्षा पर गंभीर व दुरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है l

इसका भारत और नेपाल पर पड़ने वाला प्रभाव और परिणाम— भारत नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में उत्पन्न हो रहे जानसांखिकिये असंतुलन से भारत और नेपाल दोनों के सुरक्षा एबम स्थिरता पर काफी दूरगामी प्रभाव पड़ने की आशंका है क्योंकि प्रायः ऐसा देखा जा रहा है कि जिन क्षेत्रों में मुस्लिमों की आवादी 30 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाता है वहाँ अन्य लोगों के लिए रहना मुश्किल हो जाता है, वहाँ से अन्य धर्मावलंबियों का पलायन होने लगता है l मदरसे और मस्जिदों के प्रभाव के कारण वहाँ लोग इस्लामिक कानून लागू करने का प्रयास करने लगते हैं या फिर वहाँ काफी उपद्रव करते हैं l इन क्षेत्रों में मौजूद हजारों मदरसा और मस्जिद मे पढ़ने वाले बच्चे बड़े होकर जेहादियों का फौज बन सकते हैं l मदरसा की भूमिका के संदर्भ में मशहुर इस्लामिक विद्वान तथा केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का कहना है मौजूदा मदरसा शिक्षा बच्चों और समाज के लिए ठीक नहीं है, वहाँ बच्चों को शिखाया जाता है कि ईश निंदा की सजा गला काटना है l मदरसों में बच्चों को मजहबी तालीम देकर जेहादी बनाया जाता है. उन्होंने मदरसा शिक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि 14 वर्ष तक के बच्चों को मदरसा शिक्षा के बदले समान्य शिक्षा दिया जाना चाहिए लेकिन मदरसे मे बच्चों को कट्टरपंथ की शिक्षा दिया जा रहा है, जिससे जेहादियों की फौज तैयार किया जा रहा है l जानकारों की माने तो मदरसा से मजहबी तालीम लेकर निकले यही बच्चे आतंक के बीजाणु बनते हैंl विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सीमावर्ती क्षेत्र के कुछ खाश पॉकेट मे लश्कर् ए तोएबा, जमात उद दावा जैसे आतंकी संगठन अपना गाँव बसाने की योजना पर कार्य कर रहा है जहाँ सब कुछ उसके मन मुताबिक व सुविधा के अनुसार हो.. क्षेत्र में मुस्लिम आवादी बढ़ने से उत्पन्न दुष्प्रभाव का ताजा उदाहरण बिहार का किशनगंज कटिहार तथा झारखंड के गढ़वा, पलामू, जामतारा, गुमला, और राँची जिला है जहाँ की स्थियों से इन सीमावर्ती क्षेत्रों मे उत्पन्न हो सकने वाली जटिलता व सुरक्षा चुनौतियाँ की कल्पना किया जा सकता है l बिहार और झारखंड के इन जिलों में मुस्लिम आवादी अधिक होने के कारण वहाँ के कई स्कूलों में इस्लामिक कानून जबरन लागू कर दिया गया है, समान्य स्कूल को अबैध तरीके से जबरन उर्दू स्कूल बना दिया गया है और अब वहाँ साप्ताहिक अवकाश रविवार के बदले शुक्रवार को घोषित किया गया है ,, हैरानी की बात यह है कि यह सब सरकार ने नही बल्कि स्थानीय मुस्लिम लोगों ने अपने जनसंख्या के बल पर जबरन किया है l कल ऐसी स्थिति भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा पर उत्पन्न नही होगी इसकी क्या गारंटी है? संकेत तो साफ है सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवाद की नर्सरी लगाई जा रही है l

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अरबों रुपया की लागत से निर्मित बड़े बड़े मदरसे- मस्जिद किसी खास मकसद से तैयार किये गये हैं ताकि गजवा ए हिन्द मे इसका प्रयोग सामरिक व रणनितिक दृष्टिकोण से किया जा सके l हाल ही मे बिहार पुलिस और NIA द्वारा फुलवारीसरीफ, पटना, दरभंगा, मधुबनी और चंपारण से गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ मे गजवा ए हिन्द- 2047 नामक खतरनाक योजना में भी इन सीमावर्ती क्षेत्र के मदरसों की भूमिका सामने आ रही है l SDPI, pFI, जमात उद दावा और दावत ए इस्लाम जैसी आतंकी व प्रतिबंधित संगठनों ने नेपाल के रौतहट, बारा पर्सा, कपिलवस्तु और सुनसरी जैसे जिलों में अपना विशेष ठिकाना बनाया हुआ है l अंतराष्ट्रिय सीमा पर ऐसी जटिल परिस्थितियों मे भारत एबम नेपाल दोनों को खतरा उत्पन्न हो गया है. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत नेपाल के इन सीमावर्ती जिलों मे खास मकसद से रोहिग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों को भी बसाया जा रहा है, भारत नेपाल के सीमावर्ती शहरों में हजारों की संख्या में रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिम चोरी छिपे रह रहे हैं तथा स्ट्रीट भेंडर के रूप में कार्य करते हुए छिप कर रह रहे हैं l इसके साथ ही ईशाइ और चीन प्रायोजित बौद्ध धर्मावलंबियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि इस सीमावर्ती क्षेत्र के भूराजनीतिक एबम सामरिक परिस्थितियों को और जटिल बना रहा है, जिससे भविष्य में दोनों देशों को बहुआयामी सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पर सकता है l अतः जरूरत इस बात की है भारत और नेपाल की सरकारों को चाहिए की सीमावर्ती क्षेत्र में उत्पन्न हो रहे ” डिमोग्राफीक असंतुलन पर गंभीरता से विचार करे अन्यथा भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा पर शांति एबम स्थिरता पर खतरा उत्पन्न हो जायेगा l सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि सीमा पर तैनात SSB और APF के बीच रणनीतिक सहयोग और समन्क्य बढ़ाया जाना चाहिए l सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्य करने वाले संदिग्ध NGO, INGO की भूमिका की जाँच व निगरानी की जानी चाहिए, अबैध हवाला कारोबार पर अंकुश लगाया जाना चाहिए, साथ ही बड़े बड़े किलेनुमा मदरसों की भूमिका व उपयोगिता की जाँच होनी चाहिये ताकि पता चल सके असल में वहाँ हो क्या रहा है ? वैसे तो यह सर्व विदित है कि सीमावर्ती क्षेत्र भू राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील होता है l सीमावर्ती क्षेत्रों में उत्पन्न हो रही इन चुनौतियों पर यदि गंभीरता पूर्वक ध्यान नही दिया गया तो आने वाले वर्षों में भारत नेपाल अंतराष्ट्रिय सीमा अस्थिर और असुरक्षित सीमा मे बदल सकता है जो प्रगाढ़ भारत नेपाल मैत्री संबंध के लिये भी घातक सावित हो सकता है l सीमावर्ती क्षेत्रों में डिमोग्राफीक बदलाव स्वतः स्फुर्त नही है बल्कि यह भारत और नेपाल के खिलाफ एक गहरी साजिश के तहत किया जा रहा है ताकि गजवा ए हिन्द के साजिश पर अमल किया जा सके l भारत और नेपाल के सुरक्षा एजेंसीयों को मिलकर संयुक्त रूप से इसके खिलाफ मिलकर कार्य करना चाहिए ताकि अंतराष्ट्रिय सीमा को अंतराष्ट्रिय आतंकवाद का हॉटबेड बनने से रोका जा सके अन्यथा बहुत देर हो जायेगी l

ललित झा
राजनीतिक संपादक, हिमालिनी

 

 

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