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नागरिकता विधेयक के संबंध में पूर्व जर्नेलों के साथ विचार–विमर्श होना असंवैधानिक हैः डा. भट्टराई

डा. बाबुराम भट्टराई, फाईल तस्वीर

काठमांडू, २५ अगस्त । नेपाल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टराई ने कहा है कि नागरिकता विधेयक संबंधी विषय को लेकर राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी पूर्व जर्नेलों के साथ विचार–विमर्श कर रही हैं, यह उनका असंवैधानिक गतिविधि हैं । डा. भट्टराई ने सामाजिक संजाल में लिखा है– ‘समाचार आ रहा है कि नागरिकता विधेयक संबंधी विषय को लेकर राष्ट्रपति ने सैनिक–पूर्व सैनिक अधिकारियों के साथ विचार–विमर्श किया है, अगर यह सच है तो यह नेपाल की संविधान के विपरित है ।’
डा. भट्टराई को मानना है कि चुनाव की पूर्व संध्या में किसी एक पार्टी को सहयोग करने की उद्देश्य से यह हो रहा है । उन्होंने कहा है कि अगर राष्ट्रवादी उत्तेजना फैला कर अमूक राजनीतिक दल को सहयोग करना ठीक नहीं है । उन्होंने यह भी कहा है कि वर्तमान संविधान ने कहीं भी राष्ट्रपति को स्वविवेक प्रयोग करने का अधिकार नहीं दिया है ।
स्मरणीय है, कुछ दिन पहले सरकार ने नेपाल नागरिकता विधेयक (प्रथम संशोधन) २०७९ प्रमाणीकरण के लिए राष्ट्रपति समक्ष से पेश हुआ था । लेकिन उक्त विधेयक में राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी ने संसद् में पुनर्विचार करने के लिए भेज दिया था । लेकिन उक्त विधेयक को हुबहु पुनः राष्ट्रपति के समक्ष पेश किया है । इसी विषय को लेकर राष्ट्रपति भण्डारी ने बुधबार सैनिक अधिकारियों के साथ विचार–विमर्श की थी ।

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