आम निर्वाचन २०७९ः विकल्प की तलाश में है सप्तरी या ‘इनमें से कोई नहीं’ : कंचना झा

कंचना झा, हिमालिनी नोवेम्बर अंक।
सप्तरी का अपना ही इतिहास रहा है । सप्तरी जहाँ से बहुत से विद्वान, साहित्यकार, और राजनीतिज्ञ आते हैं । हम शान से कहते हैं कि हम सप्तरी से आते हैं । सप्तरी राजविराज कभीे गढ़ रही है राजनीति की । गजेन्द्र नारायण सिंह का नाम लें या लें नाम रामराजा प्रसाद जी का । राजविराज ये वो शहर है जो जाना जाता है नेपाल के पहले टाउन प्लानिंग सिटी के रूप में । यानी प्लान करके बसाया हुआ शहर । इस शहर की बात करें या करें बात सप्तरी की, तो अभी हाल में सप्तरी की अवस्था बहुत ही नाजुक है । पूरा शहर गंदा और अव्यवस्थित है । कहने को कुछ अच्छे होटल और अस्पताल को बनाया गया है, मगर इन दोनों की अवस्था दयनीय ही कह सकते हैं । वहाँ के लोगों को अभी भी इंतजार है एक ऐसे नेता की जो सप्तरी आ कर केवल और केवल सप्तरी के विकास की ओर अपना ध्यान दें । वो बात करें अपने शहर अपने गाँव की । वो करें विकास कृषि की, किसानों की अवस्था में सुधार लाए । जिस किसान की फसल से हम अपनी पेट की भूख शांत करते हैं वही किसान कई दिनों तक भूखा रह जाता है । उस किसान को भूखे पेट सोना नहीं पड़े । इस ओर उनका ध्यान जाए ।
कहते हैं किसी भी शहर या देश के विकास में राजनीति बहुत अहम भूमिका निभाती है । तो बहुत बार ऐसा भी देखा गया है कि, देश या शहर की खराब स्थिति या कहें कि शहर को बेकार या तबाह कर देने में भी राजनीति का ही हाथ होता है । चुनाव का समय ही ऐसा होता है जहाँ नेता कभी नहीं पहुँचे रहते हैं, वहाँ भी पहुँच जाते हैं । तब दो ही बातें होती हैं या तो जनता आक्रोश में आती है या फिर कार्यकर्ता सबकुछ अपने उपर लेकर बात को आई–गई कर देते हैं । एक तो प्रदेश नम्बर दो, दूसरा सप्तरी और क्षेत्र –२ साथ ही नेपाल का पहला टाउन प्लांनिग सिटी राजविराज । उपेन्द्र यादव, डॉ. सिके राउत, और जय प्रकाश ठाकुर । इन तीनों के बीच जबरदस्त टक्कर है । सच कहें तो सप्तरी या कहें कि मधेश की जनता ही इसबार उतनी उत्साहित नहीं है चुनाव को लेकर । जातियता और समुदाय को लेकर राजनीति करने वाले नेताओं के प्रति अब की जनता सतर्क हो रही है ।
वैसे तो सप्तरी निर्वाचन क्षेत्र नम्बर २ में लगभग ९३,००० हजार मतदाता हैं । जिसमें राजविराज ३८,२२१ महदेवा १६,८५०, तिलाठी कोईलाड़ी–१९,६४१ तथा छिन्नमस्ता १७,७५७ मतदाता हैं । इसमें बहुत से पार्टी के, नेता के कार्यकर्ता तथा चमचे भी होंगे । इतना तय है कि आम मतदाता की सोच इस बार बदली है, वो असल नेता को चुनना चाहती है, मगर विवशता देखिए कि विकल्प नहीं है उनके पास ।
बात हो रही है यहाँ सप्तरी की, तो यह समझना ज्यादा जरूरी है कि आखिर सप्तरी की जनता जिसे हम आम आदमी या फिर मतदाता कहते हैं वो क्या चाहती है ? सवाल था कि आप किसे और क्यों वोट करेंगे इस बार के निर्वाचन में ? जबाब कुछ इस तरह का आया ।
राजविराज के संजोग देव का कहना है कि – बहुत पेशोपेश में हूँ कि क्या करुँ, क्या नहीं ? वोट किसी को भी दूँ संतुष्टि नहीं मिलेगी कि हाँ मैंने एक ऐसे व्यक्ति को चुना जिसे आने वाले समय में हमारी याद आएगी । मेरी से मतलब कि मैं अपनी बात नहीं कर रहा हूँ मैं बात कर रहा हूँ उन बुढ़ी माँओं की जिन्हें वो बहुत तरह के प्रलोभन दे रहे हैं कि मैं ये करूँगा, वो करूँगा । उनके पैर छूते हैं, भूखे नंगे बच्चों को गोद में ले कर पुचकारते हैं जब वो लौट कर नहीं आते या हमारे दुख में शामिल नहीं होते तो फिर काहे का वोट । सपना क्यों दिखाना ?
लेकिन अब सोचने की बात यह है कि वोट तो देना है तो मेरा है सिंपल फार्मूला – महंत ठाकुर या राजेन्द्र महतो की बात करें तो ये दोनों ही या इनके उम्र के जो कोई भी नेता हैं वो सक्रिय नहीं है । उम्र का तकाजा भी हो सकता है । इनके पास संगठन नहीं है । चाहे किसी की भी बात करें एकता बिल्कुल ही नहीं है । सबको साथ लेकर चलना नहीं आया इन्हें । और सबसे अहम बात कि उपयुक्त व्यक्ति को इन्होंने कभी जगह नहीं दिया । अच्छी छवि, पढ़े लिखे व्यक्ति को नहीं चुनकर अपने अपने लोगों को जगह देते हैं ।
अब दूसरा है तो वह प्रतिशोध की आग में जल रहा है । सच कहें तो उसके पास अपना कुछ एजेण्डा ही नहीं है । ढुलमुल प्रवृति का है । कभी मधेश की बात करता है तो कभी ओली बा का बन जाता है । एक तरह से कहें तो विश्वासी नहीं है ।
लेकिन इतना तो तय है कि मैं ऐसे व्यक्ति को चूनूंगा जो सदन में हमारी बात को रख सकता है । कम से कम मधेश के मुद्दा को आगे बढ़ा सकता है । जिस मधेश के नाम पर अपना रोजी रोटी चला रहा है कुछ तो बात रख सकता है । मधेश लड़ाई को जारी रखने वाला मुख्य नायक तो है । अपनी बात को बेहिचक रख सकता है । हम इतना तो समझे कि एक मजबूत व्यक्ति को सदन तक पहुँचाया है हमने । हाँ ये जरुर है कि मैं उनसे संतुष्ट नहीं हूँ लेकिन फिर दूँ तो किसे ? अपने अधिकार का प्रयोग करुँ तो कैसे ? सच कहूँ तो असमंजस में हूँ ।
राजविराज की रश्मि झा का कहना है कि – ऐसे व्यक्ति को वोट करुँगी जो सप्तरी का विकास करें । शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा को प्राथमिकता में रखे । स्वरोजगार की बात हो, राजविराज जो अभी तक जाना जाता है नेपाल की सबसे पुरानी और पहली प्लांनिग सिटी के रूप में, जो आजतक नहीं बना । हम आज भी उसका सपना देख रहे हैं । एक उम्र गुजर गई चाहते हैं कि, अबकी बार जो भी आए या जिसे भी मैं वोट करुँ वो उस सपना को पूरा करे ।
विद्यानंद बेदर्दी कहते हैं कि –ऐसे व्यक्ति को तो हरगिज वोट नहीं करुँगा जो मेरी मातृभाषा को गाली दे । कहते हैं कि माँ का आँचल सबसे सुरक्षित होता है अपने बच्चे के लिए । और वही बच्चा बड़ा होकर अपनी माँ को गाली दे और वैसे व्यक्ति को हम चुनें तो हम भी अपनी माँ के उतने ही दोषी होंगे जितना की हमारा उम्मीदवार है । सबसे दुखद तो यह कि उसने एक बार भी अपनी गलती के लिए माफी नहीं मांगी । हम सभी मतदाताओं के लिए दुर्भाग्य की बात यह है कि हमारे पास आप्सन नहीं है । अब क्या करें आधा सड़ा आलु या फिर पूरा सड़ा हुआ आलु दोनों में से किसी एक को तो चुनना है तो क्यों न आधा सड़ा आलु को चुने । कम से कम आधा सड़ा हुआ आलु ये तो कह रहा है न कि हम विकास करेंगे । भाषा को प्राथमिकता देंगे । पहचान सहित की संघीयता की बात तो करता है । मेरी सोच है कि मैथिली और मिथिला की बात हो, मिथिला परम्परागत रूप में आगे बढ़े । एक बहुत बड़ी आशा और विश्वास के साथ मैं आधा सड़ा हुआ आलु को ही वोट दूँगा ।
इंदिरा श्रेष्ठ का कहना है कि – ऐसे तो जैसे ही चुनाव के नजदीक आने लगते हैं, उम्मीदवार अपनी–अपनी ओर से प्रलोभन देना शुरू कर देते हैं । जो कभी हमारे दरवाजे पर आते नहीं हैं, जिन्हें हम केवल और केवल समाचारों में सुनते हैं, टी.वी पर देखते हैं वो हमारे सामने आकर बड़े सादगी से अपने आप को वोट करने की बात करते हैं । कभी पार्टी तो कभी जाति को लेकर बात करते हैं । तो सावधान अब वो पहले वाली जनता नहीं हैं हम । हम जातिवाद, पार्टीवादी होकर मतदान नहीं हैं करनेवाले । इसबार हम व्यक्ति देखकर ही वोट करेंगे । जो हमारे साथ हमेशा खड़ा रहता है, चाहे पार्टी बड़ी हो या छोटी, जाति में हमसे ऊँची जाति के हो या छोटी जाति के हम वोट जाति, पार्टी को नहीं व्यक्ति को देंगे ।
इसी तरह धर्मेन्द्र साह कहते हैं कि – मैं तो तंग आ चुका हूँ इन उम्मीदारों से जिनकी उम्र नहीं रह गई है कि, वो देश के विकास के बारे में सोच सकें । समय के साथ विकास करने के तरीके अलग हो गए हैं । अब अगर आप नए जमाने के तकनीक को नहीं समझेंगे तो आप काम नहीं कर सकते हैं । ऐसे हमारे बहुत से नेता हैं जिन्हें नई तकनीकी समझ में नहीं आती है । मैं तो कहती हूँ कि नयी पीढी आए, नए लोगों को जगह मिले । नई सोच को जगह दें । यानि कोई भी युवा आए चाहे वो मेरी जाति का हो न हो मुझे फर्क नहीं पड़ता । मैं युवा को ही वोट करुँगा । देश के भविष्य वहीं है वहीं चाहे तो देश को एक नए ऊँचाई की ओर ले जाए ।
सविना यादव कहती हैं कि – सच कहूँ तो कभी–कभी लगता है कि किसी को वोट नहीं करूँ । क्या होगा वोट करने से । ये नेता जो आज घर–घर जाकर अपना राग अलाप रहे हैं वो कल चाहे जीते या हारे फिर दुबारा तो आने वाले हैं नहीं । मैं तो कहती हूँ कि एक आप्सन ‘इनमें से कोई नहीं’ का भी होना चाहिए, ताकि अगर एक बार ऐसा हुआ तो हर पार्टी एक बार उम्मीदवार को चुनने से पहले जरूर सोचेंगे । मगर ये अभी तो नहीं हो सकता है । इसलिए मैं इसबार किसी पार्टी विशेष को मत नहीं दूँगी । एजेण्डा और व्यक्ति को देखकर अपना मत दूँगी ।
एक बात तो सभी ने कही कि वो जातिवाद या पार्टीवाद को प्राथमिकता में नहीं रखेंगे । सभी दुखी है कि अच्छा आप्सन नहीं है उनके पास । सभी वोटर असमंजस की अवस्था में हैं । या कहें कि किसी को भी अपने नेता पर जरा सा भी विश्वास नहीं है ।
इन सबसे बात करके इतना जरुर कहा जा सकता है कि सभी असमंजस में हैं । जनता अब नासमझ नहीं है वो अब जाग गई है मगर उसके पास अ‘ापसन नहीं है । बस कुछ दिनों का है इंतजार । सबकुछ सामने आ जाएगा ।

