मुस्ताङ के २९ वर्षीय योगेश गौचन ने जीत हासिल की
काठमांडू, ५ मंसिर –नेपाली कांग्रेस के टिकट नहीं देने पर बहुत से लोग नाराज थे । लेकिन कुछ भाग्यशाली भी रहें और अपने आप को साबित किया है । यानी इसबार के चुनाव में जब नेपाली कांग्रेस से सहजै टिकट पाना सहज नहीं हो रहा था फिर भी एक नया चेहरा जिसे टिकट दिया गया वो हैं मुस्ताङ के २९ वर्ष के युवक योगेश गौचन ।
इसबार के चुनाव में एक लहर सी थी कि हम युवाओं को आगे आने दें । ऐसे में अपने राजनीति यात्रा की शुरुआत में ही योगेश ने ६० वर्षीय प्रभावशाली एमाले के नेता प्रेम तुलाचन को हराकर एक इतिहास रचा है ।
लगभग ४ दशक से मुस्ताङ की राजनीति में सक्रिय कांग्रेस नेता रोमी गौचन थकाली ने इस बार प्रतिनिधि सभा का टिकट स्वयं नहीं लेकर अपने पुत्र योगेश को टिकट दिया । जब योगेश को टिकट देने की बात आई थी तो सभी ने एक स्वर में कहा था कि यहाँ जिला में प्रभावशाली एमाले के नेता प्रेम तुलाचन के आगे योगेश की एक नहीं चलेगी । कारण स्पष्ट था कि २०७४ साल के निर्वाचन में प्रेम तुलाचन ही रोमी गौचन को हराकर संसद तक पहुँचे थे ।
योगेश ने तीन हजार ९९२ मत लाकर चुनाव जीत लिया है । एमाले के तुलाचन को तीन हजार ७८ मत प्राप्त हुआ । १० हजार ९५७ मतदाता मुस्ताङ में हैं जिसमें निर्वाचन में ७ हजार २३० मत डाला गया ।
भारत में ब्याचल और ऑफ बिजनेस म्यानेजमेन्ट को समाप्त करके योगेश राजनीति के साथ ही व्यापार में संलग्न हैं ।
निर्वाचित योगेश के पिता रोमी का चार दशक से ज्यादा कांग्रेस मुस्ताङ के राजनीति में एकछत्र पकड़ कायम रखा हुआ था । रोमी ने २०५६ और २०७० साल में निर्वाचन में जीत हासिल किया था । पूर्व मन्त्री समेत हुए रोमी २०६४ और २०७४ में चुनाव हारे थे । एक तरह से कहें तो योगेश को भी राजनीति विरासत में ही मिली है । लेकिन उन्होंने यह साहस दिखाया कि वो चुनाव में खड़े हुए और जीत हासिल की ।


