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जसपा, जनमत, लोसपा इस उम्मीद में बैठी है कि सरकार उसे मनाएगी : कंचना झा

 

कंचना झा, काठमांडू, ५ माघ । जनता समाजवादी पार्टी ने सरकार को समर्थन तो दे दिया है लेकिन वो पद के बँटवारे को लेकर असंतुष्ट है और अभी सरकार में नहीं जाना चाहती है । वैसे सच तो यही है कि इस गठबंधन सरकार ने मधेश दल को कोई खास जगह ही नहीं दी है । उसने न केवल जसपा वरन लोसपा और जनमत को भी कोई खास जगह नहीं
अभी तक जसपा ने एमाले–माओवादी गठबन्धन से अलग होने की धोषणा नहीं की है लेकिन पार्टी के नेताओं ने गठबन्धन के प्रति असन्तुष्टि जताना शुरु कर दिया है ।
जसपा के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने बताया कि जसपा के सरकार में जाने की सम्भावना कम हो रही है । शक्ति बँटवारा समझदारी के साथ विभिन्न विषयों के कारण से हमारी सरकार में जाने की सम्भावना कम हुई है । अध्यक्ष यादव ने बुधबार ही नेपाली कांग्रेस के सभापति शेरबहादुर देउवा से मुलाकात की है । अपनी इस मुलाकात में मधेश प्रदेश के मुख्यमन्त्री को विश्वास मत देने के विषय में बातचीत हुई । उसी क्रम में सभामुख के चुनाव के बारे में भी चर्चा हुई ।
जसपा ने आज संसदीय दल की बैठक बुलाई है । आज के ही बैठक में सभामुख के निर्वाचन में किसे सहयोग करें यह भी तय कर लेंगे । स्रोत के अनुसार मन्त्रालय को जिस तरह से बाँटा गया है उससे जसपा के नेताओं का मन नहीं मान रहा है । महत्वपूर्ण और विकास मन्त्रालय छोड़कर वन, युवा जैसे मन्त्रालय हमारे भाग में आया । इन मन्त्रालय में हम क्यों जाए ? जसपा के एक केन्द्रीय सदस्य ने कहा सम्मानजनक शक्ति का बँटवारे में कम से कम उपराष्ट्रपति जसपा के भाग में आना चाहिए था साथ ही कम से कम विकास और महत्वपूर्ण मन्त्रालय भी हमारे पक्ष में आना चाहिए था ।

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जसपा संसदीय दल के नेता रामसहाय यादव ने भी कहा कि सम्माजनक शक्ति की बँटवारे नहीं होने के कारण सरकार में हम नहीं जाएंगे । उन्होंने शक्ति बँटवारे के बारे में पुनर्विचार करने के लिए प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल से आग्रह किया है । मन्त्रालय, संवैधानिक आयोग के साथ ही अन्य विषयों में सम्माजनक शक्ति बँटवारा होना चाहिए था । अगर पुनर्विचार होता है तो हम सरकार में जा सकते हैं । प्रतिनिधि सभा में १२ सिट लाने वाली जसपा को मन्त्रालय के साथ ही शक्ति बँटवारे के समय में नजर अन्दाज किया गया है । वहीं संख्या के हिसाब में एक ही रहने वाली राप्रपा को ज्यादा महत्व दिया गया है ।
सरकार में जाने की तैयारी में रहे लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) को अन्तिम समय में नहीं बुलाया गया । प्रतिनिधि सभा में चार सीट रहे लोसपा से शरतसिंह भण्डारी और सर्वेन्द्रनाथ शुक्ल के अलावे एक लोग सरकार में जाने की तैयारी में थे । लोसपा को सरकार में जाने के लिए अध्यक्ष महन्थ ठाकुर ने एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली तथा माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल के साथ भी मुलाकात की थी । स्रोत के अनुसार ओली और दाहाल ने लोसपा को सरकार में लाने का आश्वासन भी दिया था । लोसपा को एक न एक मन्त्रालय मिलना तय था । यहाँ तक की सरकार में जाने के लिए भण्डारी ने ‘लबिङ’ भी की थी । लेकिन अन्तिम समय में लोसपा को बुलाया ही नहीं गया । स्रोत के अनुसार लोसपा को सरकार में लेजाने में एमाले अध्यक्ष ओली ने रोक दिया था । चुनाव के अन्तिम समय में लोसपा एमाले का साथ छोड़कर नेपाली कांग्रेस–माओवादी केन्द्र गठबन्धन में सहभागी हुई थी शायद यही कारण रहा होगा । शायद इसी कारण से लोसपा को सरकार में ले जाने के लिए ओली ने अस्वीकार किया होगा ।
जनमत पार्टी भी सरकार के पद बँटवारे से खुश नहीं है । वह भी कम से कम दो मंत्रालय की मांग कर रही है । उसे एक मंत्रालय दिया गया था जिसे उसने अस्वीकार कर दिया है और उम्मीद में बैठी है कि सरकार उसे मनाएगी ।

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kanchan jha
कंचना झा
कार्यकारी संपादक
www.himalini.com

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