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सरकार में शामील होकर संघीयता का विरोध करने का अधिकार है, स्पष्टीकरण मांग हो सकता हैः प्रधानमन्त्री

 
पुष्पकमल दाहाल (प्रचण्ड) फाईल तस्वीर

काठमांडू, २४ जनवरी । प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने दावा किया है कि संघीयता का विरोध करनेवालों से स्पष्टीकरण लिया जाएगा । उनका कहना है कि वर्तमान मन्त्रिपरिषद् के कुछ सदस्य संघीयता का विरोध कर रहे हैं । उनका कहना है कि ऐसे मन्त्रियों से स्पष्टीकरण मांग हो सकता है । उन्होंने कहा कि मन्त्रिमण्डल में रहकर संघीयता और गणतन्त्र के विरुद्ध बोलेन का छुट किसी को भी नहीं है ।
प्रधानमन्त्री नियुक्त होने के बाद पहली बार राष्ट्रीयसभा बैठक को सम्बोधन करते हुए प्रधानमन्त्री प्रचण्ड ने कहा– ‘मेरे ही क्याविनेट के एक मन्त्री संसद् में आकर संघीयता खारिजी के लिए बोल रहे हैं । इसमें मेरा गम्भीर ध्यानाकर्षण हुआ है । यह स्पष्टीकरण का विषय हो सकता है ।’ उनका कहना है कि मन्त्रिपरिषद् से बाहर रह कर अपनी विचार रखने का अधिकार सभी सदस्य और राजनीतिक दल को है, लेकिन मन्त्रिमण्डल में रहकर संघीयता और लोकतान्त्रिक गणतन्त्र के विरुद्ध बोलने का और प्रचार करने का अधिकार किसी को भी नहीं है । उन्होनें आगे कहा– ‘यह नैतिक और कानूनी दृष्टिकोण से भी ठीक नहीं है ।’
शुरु से ही संघीयता, समावेशीता और मानुपातिक लोकतन्त्र और गणतन्त्र के पक्ष में बहस होता आया है, लेकिन इसका कार्यान्वयन प्रभावकारी नहीं हो पा रहा है । प्रधानमन्त्री प्रचण्ड का मानना है कि कार्यान्वयन पक्ष कमजोर होते हुए भी संघीयता का विकल्प अन्य कोई भी व्यवस्था नहीं है । उन्होंने कहा– ‘शुरु से ही संघीयता और लोकतन्त्र के संंबंध में फरक मत रखनेवाले लोग थे । आज भी अधिक रुप में इसका विरोध नहीं हुआ है । इसके कार्यान्वयन के संबंध में कुछ कमजोरी अवश्य हुई है । इसीलिए लोगों में असन्तुष्टियां है । लेकिन इसका विकल्प नहीं है ।’

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