भारत मना रहा है अपना ७४वां गणतंत्र दिवस, आज ही है सरस्वती पूजा भी : कंचना झा
कंचना झा, काठमांडू, १२ माघ – आज २६ जनवरी यानी एतिहासिक दिन । गणतंत्र दिवस । भारत मना रहा है अपना ७४वां गणतंत्र दिवस । १९५० को आज ही दिन पूरे देश में संविधान लागू किया गया था । प्रत्येक वर्ष देशवासी पूरे उमंग और उत्साह के साथ यह दिन मनाते हैं । देशवासी इसे राष्ट्रीय त्योहार के रुप में मनाते हैं । इस दिन का भारत के इतिहास में बहुत अहम जगह है । यह दिन भारतीय नागरिकों की लोकतांत्रिक रूप से अपनी सरकार चुनने की शक्ति को दर्शाता है । भारत के इतिहास में यह दिन कई तरह से महत्वपूर्ण है । यही वजह है कि इस दिन को पूरे देश में हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस राष्ट्रीय त्योहार की अपनी अलग खासियत है, जिसके चलते लोग इसे धूमधाम से मनाते है ।
२६जनवरी, १९५० को संविधान लागू होने के साथ ही भारत को पूर्ण गणराज्य घोषित किया गया था । इसलिए हर साल इस दिन को राष्ट्रीय पर्व कहकर, गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाता है। १९४७ में जब भारत को आजादी मिली तो इसके बाद इसे लोकतांत्रिक बनाने के मकसद से देश का संविधान बनाना शुरू किया गया । इसे बनाने में २ साल ११ महीने और १८ दिन लगा । इस संविधान को २६नवंबर, १९४९ में ही देश की संविधान सभा ने स्वीकार किया । इसके बाद अगले ही साल २६जनवरी, १९५० को यह संविधान पूरे देश में लागू किया गया था।
गणतंत्र दिवस की अवसर पर प्रधानमंत्री नहीं राष्ट्रपति ही झंडा फहराते हैं ।
साथ ही आज बड़ा ही सुन्दर संयोग मिला हुआ है । आज श्रीपंचमी यानी माँ सरस्वती की अराधना का भी दिन है । जिसे हम बसंत पंचमी,श्रीपंचमी या फिर सरस्वती पूजा कहते हैं । खासकर यह पर्व छात्र– छात्राएं बहुत उमंग से मनाते हैं । देवी विद्यादायिनी है । विद्या के साथ– साथ सादगी का प्रतीक हैै माँ सरस्वती । माँ विणावादिनी हैं ।
यह पर्व माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है । इस बार यह पर्व २६ जनवरी को पड़ा है । बच्चें इस दिन किताब की पूजा करते हैं । माँ सरस्वती की अबीर से पूजा की जाती है ।
कहते हैं ज्ञान की देवी माँ सरस्वती शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही ब्रह्मा जी के मुख से प्रकट हुई थी । इसलिए बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है ।


