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कालिदास की रचना शक्ति पर प्रश्न ! ‘रचयिता कौन ? विदुषी विद्योत्तमा या कालिदास ?’ पुस्तक विमोचन

 

लिलानाथ गौतम
काठमांडू, २८ जनवरी । तीसरी–चौथी शताब्दी (गुप्त साम्राज्य) के संस्कृत भाषा के महान् कवि और नाटककार ‘कालिदास’ की सृजनशीलता और रचना शक्ति पर प्रश्न उठानेवाली एक पुस्तक बाजार में आई है । ‘रचयिता कौन ? विदुषी विद्योत्तमा या कालिदास ?’ नाम देकर सार्वजनिक पुस्तक के लेखक हैं– डॉ. कमल किशोर मिश्र । लेखक मिश्र का दावा है कि उन्होंने यह पुस्तक २२ सालों की अनुसंधान के बाद पुनर्लेखन किया है ।
नेपाल स्थित स्वामी विवेकानन्द सांस्कृतिक केन्द्र, भारतीय राजदूतावास में २७ जनवरी को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के बीच पुस्तक का विमोचन किया गया है । नेपाल संस्कृति विश्वविद्यालय वाल्मीकि विद्यापीठ, नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान (नेपाल) की सक्रियता में आयोजित विमोचन समारोह में नेपाल और भारत के विद्वान लोगों की सहभागिता रही, जो संस्कृत भाषा और साहित्य से जुड़े हुए थे ।
स्वामी विवेकानन्द सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक आशाबरी बापट की प्रमुख आतिथ्यता में सम्पन्न कार्यक्रम में वक्ताओं ने कालिदास की साहित्यक रचना, उनकी रचना शक्ति, उनकी रचनाओं की विश्वव्यापी प्रभाव, मानव जीवन और दर्शन में उसका प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा की। प्रमुख अतिथि बापट ने कहा कि कालिदास की हर रचना में दूरदृष्टि है, जो मानव जीवन को प्रभावित करता है । उन्होंने कहा कि कालिदास प्राकृतिक सौन्दर्यता की वर्णन करते हैं तो वहां भी मानव जीवन और दर्शन प्रकट हो जाता है । बापट जी ने आगे कहा– ‘कालिदास रचित साहित्य में सरलता है, कोमलता है, उन्होंने सिर्फ काव्य नहीं लिखा, प्रकृतिक सौन्दर्य को लिखा, मानव जीवन और दर्शन को लिखा, जो सम्पूर्ण समाज के लिए एक उच्चतम आदर्श है ।’
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए पुस्तक लेखन में सहयोग करनेवाली लेखिका रेखा मोदी ने कहा कि कालिदास की नारी सौन्दर्यता संबंधी रचनाओं में काम वासना भी है, लेकिन अश्लीलता नहीं है । उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म–संस्कार में जिस तरह भोग्या वस्तु के रुप में नारी प्रस्तुत हो जाती है, उसका आदर्श स्वरुप कालिदास की रचनाओं में पाया जाता है । इसीतरह दूसरे वक्ता टंकनाथ शर्मा का कहना है कि कालिदास की रचना तत्कालीन समाज से लेकर आज तक स्तुतितुल्य है, जिन्होंने समाज और जीवन दर्शन को जीवन्तता प्रदान किया है । उन्होंने कहा कि कालिदास रचित साहित्य को समझने के लिए पश्चिमी धर्म–संस्कार और सामाजिक अभ्यास का चश्मा पहनकर नहीं, भारतीय जीवन–दर्शन और समाज संबंधी दृष्टिकोण से देखना होगा ।
भारत से आए हुए दूसरे विद्वान मुदसुदन ने कहा कि लेखक कमल किशोर ने यह पुस्तक प्रकाशित कर कालिदास की रचना शक्ति पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है । उन्होंने कहा कि कालिदास की रचना शक्ति के पीछे उनकी पत्नी विदुषी विद्योत्तमा का हाथ है, इसमें कोई शंका नहीं है । उन्होंने आगे कहा– ‘लेकिन आज तक इस तरह कालिदास के ऊपर प्रश्न उठाते हुए किसी ने भी पुस्तक नहीं लिखा है ।’ उन्होंने कहा कि कालिदास के हर छोटे–छोटे शब्दों में जीवन दर्शन और सौन्दर्य का रस्वासदन मिल जाता है ।
नेपाल के लिए ‘रचयिता कौन ? विदुषी विद्योत्तमा या कालिदास ?’ नामक पुस्तक का आधिकारिक विक्रेता रत्न पुस्तक भण्डार है ।

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