आज प्रणय दिवस
काठमांडू, २ फागुन –
आज ‘वैलेंटाइन डे’ अर्थात् प्रेम दिवस मनाया जा रहा है । नेपाल के साथ ही विश्व के प्रायः सभी देश में १४ फरवरी प्रणय दिवस के रुप में मनाया जाता है । वैसे पहले मात्र एक दिन चलने वाला वैलेंटाइन डे अब वैलेंटाइन विक बन गया है और आज इसका सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम दिन है । नेपाली संस्कृति नहीं होते हुए भी पिछले कुछ वर्षो में इस दिन को लेकर नेपाल के युवा युवतियों में एक अलग ही उत्साह देखी जाती है । पे्रमिल जोडि़यां एक दूसरे को गुलाब का फूल देकर अपने प्रेम का इजहार करते हैं ।
सच्चाई तो यही है प्रेम एक शाश्वत भाव है जो ये कल भी था आज भी है और कल भी रहेगा । इसके लिए किसी विशेष दिन की आवश्यकता नहीं है । यह प्रकृति के कण–कण में प्रेम समाया है । प्रेम को एक दिन एक सप्ताह में नहीं बांटा जा सकता है । हर दिन प्रेम का दिन है । इस प्रेम को अनादिकाल से संत, महात्मा, लेखक, कवि, मनोवैज्ञानिक एवं कलाकार इसकी व्याख्या करते रहे हैं । वे अपनी रचना में, अपने सृजन में गीत, कविता, कहानी, उपन्यास तो कभी कलाकृतियों में प्रेम को व्यक्त करने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन प्रेम की सटिक परिभाषा कोई नहीं दे पाए ।
प्रेम को कोई सामान्य व्यक्ति परिभाषित कर ही नहीं सकता जब स्वयं भगवान श्री कृष्ण भी नहीं कर पाए । उन्होंने भी इसका अर्थ बतलाया है कि प्रेम का असली अर्थ है– समर्पण । निःस्वार्थ समर्पण और जो बिना कामना के, बिना लालच के किया जाए वो हैं प्रेम ।
यूँ तो प्रेम को लेकर सबके अपने–अपने मायने हैं । प्रेम को लेकर सबकी अपनी सोच है । माना जाता है कि प्रेम का संबंध आत्मा से होता है। प्रेम में समर्पण, विश्वास और वचनबद्धता की दरकार होती है, लेकिन आज समय बदल रहा है । ’ग्लोबलाइजेशन’ ने दुनिया को मुट्ठी में भर दिया है । इस बदलते युग में प्रेम भी बदल रहा है, युवक–युवतियों का साथ में घूमना, प्रेम का प्रदर्शन सरेआम करना अब फैशन कहलाने लगा । प्रेम में पहले बरसों इंतजार में गुजार दिए जाते थे, लेकिन अब कोई इंतजार में वक्त जाया नहीं करता।
जबकि जिसकी याद में इस दिन को मनाया जाता है उसने प्रेम के खिलाफ हुए लोगों से बगाबत की और फांसी चढ़ गया । कहते हैं २७० ईसवी रोम में एक संत वैलेंटाइन नामक व्यक्ति थे, जो प्रेम को बहुत बढ़ावा देते थे । उस समय रोम के राजा क्लाउडियस को प्यार और प्रेम संबंधों से सख्त नफरत थी और वो इसका जमकर विरोध करते थे । इस कारण संत वैलेंटाइन से उनकी नहीं बनती थी । राजा ने संत को जेल में बंद कर दिया और १४ फरवरी के ही दिन संत वैलेंटाइन को फांसी पर चढ़ा दिया था । तब से संत वैलेंटाइन की याद में १४ फरवरी को वैलेंटाइन डे के रुप में मनाया जाने लगा ।
समय के साथ अब प्रेम के स्वरूप, स्थायित्व और उसे अभिव्यक्त करने के माध्यमों में भी बदलाव आ रहा है । अब कबूतर बहुत काम नहीं कर सकते क्योंकि ‘मोबाइल’ और ‘इंटरनेट’ के जरिए हम प्रेम का पैगाम भेज रहे हैं । मैसेनजर पर बातें कर रहे हैं और सरेआम फेसबुक पर फोटो रख रहे हैं ।
प्रेम की भी अपनी मर्यादा है । यह अभी के समय में लोग नहीं सोच रहे हैं । आज प्रेम को लेकर लोगों की सोच बदल गई है । सामाजिक मूल्यों में बदलाव आ रहा है । अब प्रेम में भी युवा बहुत ‘प्रेक्टिकल’ हो चला है । मौसमों के बदलने की तरह उसके ‘ब्रेक अप’ और ‘पैच अप’ होते हैं । वह मानता है कि बिना गर्ल फ्रेंड के कॉलेज लाइफ में मजा नहीं है । लेकिन जब शादी की बात आती है तो वह घरवालों से बैर लेने के ‘मूड’ में नहीं होता और उनकी मर्जी को प्राथमिकता देता है ।

