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महिला दिवस थीम ‘इक्विटी को गले लगाओं’

 

काठमांडू, २४ फागुन

 

कामायनी में जय शंकर प्रसाद जी ने महिलाओं के सम्मान में कहा है कि
‘नारी तुम केवल श्रद्धा हो
विश्वास–रजत– नग–पग तल में
पियूष सुता सी बहा करो
जीवन के सुंदर समतल में’
आज इन पंक्तियों को याद कर रही हूँ क्योंकि आज ८ मार्च यानी अंतराष्ट्रीय महिला दिवस है । आज दुनिया भर में यह दिवस मनाया जा रहा है । हालांकि यह एक दिन मनाने का विषय नहीं है । फिर भी महिलाओं को ध्यान में रखकर शुरुआत हुई । बहुत ईमादारिता के साथ इसकी शुरुआत हुई थी ।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत साल १९०८में हुई थी, जब न्यूयॉर्क शहर की सड़कों पर हजारों महिलाएं घंटों काम के लिए बेहतर वेतन और सम्मान तथा समानता के अधिकार को प्राप्त करने के लिए उतरी थी । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का प्रस्ताव क्लारा जेटकिन का था, उन्होंने साल १९१० में यह प्रस्ताव रखा था। पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस साल १९११ में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जÞरलैंड में मनाया गया था ।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को औपचारिक मान्यता वर्ष १९९६ में प्रदान की गई थी । संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे ‘अतीत का जश्न, भविष्य की योजना’ थीम के साथ शुरू किया गया था

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लेकिन आज के समय को अगर देखें तो हम पाते हैं कि आज की तारीख में महिलाएं पुरुषों से बहुत आगे निकल गई हैं । महिलाओं को जब–जब अवसर दिया गया, तब–तब उन्होंने पूरे विश्व को बता दिया कि वह पुरुष के बराबर ही नहीं, बल्कि कई मौकों पर वे उनसे कई गुना बेहतर साबित हुई हैं । आज विश्व पटल पर महिलाएं नए–नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं । अब वह समय नहीं रहा जब महिलाएं घर की चार–दिवारी में बंद की जाती थी। अब महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं । महलिाएं लगातार आगे बढ़ रही है लेकिन अभी भी बहुत कुछ पाना है उन्हें । जिस थीम को लेकर इसकी शुरुआत हुई है महिलाएं वहाँ तक अभी भी नहीं पहुँची हैं ।
आज विश्व में हर जगह लैंगिग समानता के बारे में चर्चा होती है परन्तु आज भी विश्व भर में आर्थिक सुधारों के बाद भी ७० प्रतिशत महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर हैं। आज भी विश्व में पुरुषो और महिलाओं की आमदनी में पर्याप्त विषमता है। इसके अलावा महिलाओं की विश्व में राजनीती के क्षेत्र में भागीदारी केवल २४ प्रतिशत है ।
हालांकि विश्व के कई देश हैं, जिनमें महिलाओं की साक्षरता दर १०० प्रतिशत है । उत्तर कोरिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं । इसके अलावा पोलैंड, रूस, और युक्रेन में साक्षरता दर ९९.७ प्रतिशत है । चीन में यह दर ९५.२ प्रतिशत है । अगर बात करें नेपाल की तो सन् २०११ के जनगणना अनुसार महिला साक्षरता दर ६५.९ प्रतिशत दिखाई गई है ।
यदि हम महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर के बारें में चर्चा करें तो हमारे देश नेपाल में यह ८१.४ प्रतिशत है, वियतनाम में ७२.७३ प्रतिशत, सिंगापुर में ६१.९७, यूके में ५८.०९, यूएसए में ६.७६, प्रतिशत है, तथा २०.७ प्रतिशत ही है ।
यानी इतना होने के बाद भी अवस्था बहुत सामान्य नहीं हुई है । प्रयास तो बहुत किउ जा रहे हें महिला सशक्तिकरण और महिला साक्षारता के लिए लेकिन अभी बहुत काम करना बांकी है ।
इस बार अंतराष्ट्रीय महिला दिवस का विषय ‘इक्विटी को गले लगाओं’  । इक्विटी सिर्फ अच्छी चीज नहीं है, यह बहुत जरुरी है । २०२३ के इस थीम का यह उद्देश्य है कि दुनिया को ‘क्यों समान अवसर प्राप्त नहीं है’ । सभी को समान अवसर प्राप्त हो यही सोचकर इसबार का थीम यह रखा गया है ।
महिलाओं के विषय में विकास से तात्पर्य उन्हें लेकर समाज में पूर्वाग्रहों, सोच और विचारों में परिवर्तन करना हैं । महिलाओं को समानता की नजÞर से देखना, उन्हें अपने विकास के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करना तथा उनकी शिक्षा के लिए कार्य करना, एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करना तथा उनका सम्मान करना है । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस–२०२३ की थीम महिलाओं के प्रति समानता के भाव को दर्शाता है तथा साथ ही सतत विकास के पथ को भी प्रदर्शित करता है ।

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