भारत से नेपाल की सीमा में प्रवेश करने के लिए वाहनों को अब देना होगा अधिक शुल्क

काठमांडू । अब भारत से नेपाल की सीमा में प्रवेश करने के लिए वाहन मालिकों को पहले के मुकाबले अधिक जेब ढीली करनी होगी. नेपाल सरकार ने राजस्व में बढ़ोतरी करने के लिहाज से यह कदम उठाया है. बढ़ी दरों से सीमावर्ती इलाकों के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं.
यूपी का पीलीभीत जिला पड़ोसी देश नेपाल की सीमा सटा है. ऐसे में यहां दोनों ही ओर के तमाम लोगों का दिन भर आना-जाना लगा रहता है. भारत से नेपाल की सीमा में प्रवेश करने पर दो पहिया व चार पहिया वाहनों से शुल्क वसूला जाता है. अब इस शुल्क में नेपाल की आरे से वृद्धि कर दी गई है, जबकि भारत की ओर से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है.
इतना बढ़ाया गया शुल्क
पीलीभीत के रास्ते भारत से नेपाल जाने पर पहले जहां दोपहिया वाहनों को 150 रुपये शुल्क अदा करना होता था. वहीं अब इसे बढ़ा कर 200 रुपये कर दिया गया है. चार पहिया वाहनों को पहले 500 रुपए एंट्री फीस देनी होती थी, जिसे अब बढ़ाकर 600 रुपए कर दिया गया है. यह एंट्री शुल्क प्रतिदिन की दर व नेपाली रुपए के हिसाब से वसूला जाता है. हालांकि, तीन पहिया व मालवाहक वाहनों के शुल्क में बढ़ोतरी नहीं की गई है. तीन पहिया वाहन से 400 रुपए व मालवाहक वाहन से 1700 रुपए का शुल्क प्रतिदिन की दर से नेपाल की ओर से लिया जाता है. बढ़ी हुई दरों की पुष्टि नेपाल के त्रिवेणी कस्टम प्रमुख चंडिराज गेलाल ने की है.
एक ओर जहां नेपाल सरकार ने प्रतिदिन के हिसाब से लिया जाने वाली एंट्री फीस में बढ़ोतरी की है. वहीं नेपाल से भारत आने वाले नेपाल नंबरों से भारत की सीमा में प्रवेश करने पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है.
कहा जाता है कि भारत व नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है. भारत व नेपाल के नागरिक कमाने खाने के लिहाज से एक दूसरे के देशों में आते-जाते रहते हैं. वहीं दोनों ही देशों में लोगों की रिश्तेदारियां भी हैं. पीलीभीत की बात की जाए तो यहां के भी सैकड़ों गांव वाले ऐसे हैं, जिनका दिन में कई-कई बार नेपाल की सीमा में आवागमन होता है. हालांकि, दो घंटे तक के समय के लिए नेपाल प्रवेश करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता, लेकिन फिर भी बढ़ी दरों ने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है.

