Thu. May 28th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

मौत का वह सफर : मूरलीधर अग्रवाल

 

मौत का वह सफर

लगता था अब करीब हैं उसकी मंजिल
खूब सजी थी सफर में उसकी महफिल।
कोई हंस रहा था तो किसी की टूटने वाला था दिल
किसी की राहे आसन थी तो किसी की थी काँटों सी मुश्किल ।।

कोई थे परीचित तो किसी की थी पहली मुलाकात
बहुत से लोग कर रहे थे आपस में बात।
मगर छुट ने वाला था किसी का किसी से साथ
सुनहरी शाम होने वाली थी ख़ौफ़ नाक रात।।

यह भी पढें   विराटनगर के उद्योगपति व समाजसेवी घनेश्यामजी राठी का निधन

अंजाम देने वाली थी एक अनोखी घटना
दावत पर था किसी का यौवन तो किसी का बच पना।
लब थे खामोश और भूल गए थे सब मुस्कराना
कोई घर से लौट रहा था तो किसिको था घर जाना।।

मां, लौटूंगा जल्दी ये उन में से किसी के शब्दों में असर था
क्या पता था किसी की भूल का या क़ुदरत का ही ये क़हर था।
जिंदगी से तार टूट जाने का अब तो हर किसी को डर था
कैसे कहुँ वो सफर मौत का एक सफर था।।

यह भी पढें   प्रधानमंत्री बालेन ने की इयू से आबद्ध देशों के राजदूतों तथा मिशन प्रमुखों से मुलाकात
मूरलीधर अग्रवाल, बिराटनगर

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed