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ब्याज दर की मार से जूझता व्यापारी वर्ग, कई उद्योग बंद, कई बंद होने की कगार पर

 

काठमान्डू  3 अगस्त

 

 

देश की अर्थव्यवस्था पर बैंकों की नीति और कुछ राजनीतिक करण का बुरा असर पड़ा है।  ऋण मिलना मुश्किल हो रहा है। अगर मिल भी रहा है तो ब्याज इतना है कि उद्योगपति ब्याज लेने से कतरा रहे हैं। जिसके कारण सीमावर्ती क्षेत्र के छोटे और बड़े करीब पचास इंडस्ट्रीज बंद हो चुके हैं।

उद्योगपतियों का कहना है कि अगर ऐसा ही रहा तो सारे उद्योग धंधे बंद कर हमें भी बाहर कमाने जाना पड़ सकता है।  इस वित्त वर्ष की शुरुआत में  सरकार ने बढ़-चढ़ कर यह एलान किया था कि नेपाल की आर्थिक वृद्धि दर इस साल आठ फीसदी रहेगी। लेकिन छमाही समीक्षा के बाद यह अनुमान गिरा कर चार फीसदी कर दिया गया। नेपाल में वित्त वर्ष सावन से शुरू होता है। जिसके बाद भी बैंकों के व्याज दर में कमी नहीं हुई।

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सरकार ने चालू खाते का घाटा नियंत्रित रखने और विदेशी मुद्रा कोष में वृद्धि के लिए ब्याज दर बढ़ाने की नीति अपनाई। उस कारण देश में उपभोक्ता मांग घट गई। उसका असर जीडीपी वृद्धि दर के घटने के रूप में सामने आ रहा है। इसके पहले 2015-16 में नेपाल में आर्थिक वृद्धि दर 1.9 फीसदी रही थी, जो (अगर 2019-20 के कोरोना काल को छोड़ दें तो) सबसे कम वृद्धि दर का अब तक का रिकॉर्ड है। सरकार की नीतियों के कारण रूपन्देही, नवलपरासी जिले के करीब पचास छोटी बड़ी इंडस्ट्रीज बंद है। जिसमे प्रमुख स्टील, सीमेंट, बेकरी, दूध मिल्क फूड्स, फ्लोर एवं कुछ प्लास्टिक इंडस्ट्रीज शामिल हैं।

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रूपन्देही उद्योग संघ के महासचिव कृष्ण प्रसाद धिमीरे ने बताया कि यह दुखद है कि सरकार की पक्षपातपूर्ण और गलत नीतियों के कारण उद्योग बंद हो गए हैं। रूपन्देही और नवलपरासी जिले में पचास इंडस्ट्रीज बंद होने से हजारों की संख्या में लोगों के पास रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

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