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भारत द्वारा चावल निर्यात पर प्रतिबन्ध और तराई में बारिश का नहीं होना, मुश्किलें पैदा करेंगी

 

काठमान्डू  4 अगस्त

20 जुलाई को भारत ने ग़ैर बासमती सफ़ेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की और इसके तुरंत बाद ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी क़ीमतों में 15 फ़ीसदी के उछाल की चर्चा होने लगी.इसका असर नेपाल में भी खुदरा दुकानों पर दिखना शुरू हो गया है.

20 किलो के पैकेट की क़ीमत 3000 रुपए पहुँच गई है. जैसे ही भारत ने प्रतिबंध का एलान किया, थोक विक्रेताओं ने भी क़ीमतें बढ़ा दीं.

हफ़्ते पहले तक स्टीम चावल 1,900 रुपये प्रति बोरी से बढ़कर 2,000 रुपये और 2,100 रुपये प्रति बोरी हो गया है.हालांकि उत्पादकों ने कहा है कि उन्होंने चावल की क़ीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है. सरकार का कहना है कि सप्लाई बाधित होने की स्थिति में सरकार पूरी कोशिश करेगी कि क़ीमतें न बढ़ने पाएं.’ इस संबंध में वो भारत से बातचीत करने के लिए तैयार हैं.
कृषि विभाग के उप महानिदेशक और विभाग के प्रवक्ता जानुका पंडित ने कहा कि नेपाल का वार्षिक धान उत्पादन 55 लाख मीट्रिक टन है.

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उन्होंने कहा, “उसमें से 6 से 7 लाख मीट्रिक टन आयात किया जाता है.” जानुका के मुताबिक, “हमारे देश में पैदा होने वाले मोटे चावल को न खाने और बारीक और सफेद चावल की खपत के कारण इसका बहुत अधिक आयात हो रहा है.” नेपाल चावल, दाल और तेल उत्पादक संघ के अनुसार, ‘भारत से सालाना लगभग 15 लाख मीट्रिक टन धान या 2.5 लाख मीट्रिक टन चावल आयात करने की ज़रूरत है.’

संघ के महासचिव दीपक कुमार पौडेल ने कहा, “चावल लाने के बाद, उनमें से कुछ का उपयोग टूटे हुए चावल, भूसी आदि के उत्पादन में भी किया जाता है.” नेपाल नेशनल बैंक के आँकड़ों के अनुसार, जून में समाप्त वित्तीय वर्ष के 11 महीनों में लगभग 33 अरब रुपये मूल्य के धान और चावल का आयात किया गया था. मौजूदा समय में देश की जीडीपी में कृषि का हिस्सा 24% यानी लगभग एक चौथाई है और घरेलू कृषि उत्पादन में चावल का योगदान 15% है. यानी देश की अर्थव्यवस्था में चावल उत्पादन की बड़ी हिस्सेदारी है और खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से भी ये सबसे अहम है. पिछले साल नेपाल में 14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान लगाया गया था और उत्पादन करीब 55 लाख मीट्रिक टन हुआ था.

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नेपाल में घरेलू चावल उत्पादन पर संकट
भारत के चावल निर्यात पर प्रतिबंध के फ़ैसले के अलावा बारिश की कमी के चलते चावल उत्पादन को लेकर काफ़ी चिंता है.

ऐसी ख़बरें हैं कि तराई क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण समय पर धान की रोपाई नहीं हो सकी, वहीं दूसरी ओर लम्पी स्किन रोग के कारण किसानों के लगभग 50,000 मवेशियों की मौत हो गई है. जबसे ये बीमारी फैली है, तबसे 10 लाख से ज़्यादा मवेशी संक्रमित हो चुके हैं. नतीजन कई किसानों को धान रोपाई में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. ख़बरें हैं कि जुलाई के मध्य तक एक तिहाई खेतों में धान की रोपाई नहीं हो पाई है. अगर बरसात की बची अवधि में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो इसका सीधा असर चावल के उत्पादन पर पड़ेगा.

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नेपाल में धान की खेती काफी कुछ बरसात पर निर्भर है. कारोबारी और सरकारी अधिकारी इस बात पर एकमत हैं कि भारत के ताजा फ़ैसले का नेपाल पर असर होना तय है. भारत दुनिया में अग्रणी चावल निर्यातक देशों में से एक है. वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है. पिछले साल भारत ने 140 देशों को 25 लाख टन चावल निर्यात किया था. इस साल भारत में भी खाद्यान्नों की क़ीमत में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इस पर अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार ने बासमती को छोड़कर चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है.साथ ही यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध के कारण यूक्रेन के खाद्य निर्यात पर भी काफ़ी असर पड़ा है. इन्हीं कारणों से दुनिया भर में खाद्य क़ीमतें बढ़ती जा रही हैं.

 

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