मधेश प्रदेश सरकार की कामकाजी भाषा हिंदी होनी चाहिए
विनोदकुमार विश्वकर्मा, जनकपुरधाम । २२ जुलाई ,२०२३ को हिंदी केन्द्रीय विभाग, त्रिभुवन विश्वविद्यालय द्वारा जनकपुरधाम स्थित रमण टावर के सभागार में “मधेश की राजनीति में हिंदी भाषा का अन्तःसम्बन्ध” विषयक परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी केन्द्रीय विभाग की विभागाध्यक्ष डा. संजीता वर्मा ने की तथा मुख्य अतिथि केन्द्रीय शिक्षा, विज्ञान तथा तकनीकी राज्य मंत्री प्रमिला कुमारी यादव रहीं ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय शिक्षा, विज्ञान तथा तकनीकी राज्य मन्त्री प्रमिला कुमारी यादव ने अपने वक्तव्य में कहा कि, “प्राचीन काल से ही हिंदी भाषा नेपाल और भारत के सम्बन्ध को जोडने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करती आई है, इसलिए इसे सम्पर्क भाषा की मान्यता देना अपरिहार्य है .” उनका कहना था कि मधेश के भीतर नागरिक स्तर पर और राजनीतिक रुप से दोनों देशों के बीच महत्त्वपूर्ण संदेश आदान –प्रदान करने के लिए भी हिंदी का महत्ववपूर्ण योगदान रहा है ।
विशिष्ट अतिथि प्रतिनिधि सभा सांसद रेखा यादव और किरण कुमार साह ने कहा कि , “मधेश में हिंदी भाषा सूचना, भावनात्मक, विचार आदान –प्रदान तथा अभिव्यक्ति का सहज माध्यम के रुप में है, इसलिए हिंदी भाषा को मधेश प्रदेश में मान्यता दिलाने के लिए सदन और सरकार पर दबाव देने की जरुरत है “
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डा .संजीता वर्मा ने “मधेश की राजनीति में हिंदी भाषा का अन्तःसंबन्ध” शीर्षक पर कार्यपत्र प्रस्तुत किया । प्रस्तुत कार्यपत्र में डा. वर्मा ने हिंदी की विगत की स्थिति और वर्तमान की स्थिति के बारे में सबको अवगत कराया । डा. वर्मा ने बताया कि नेपाल में हिंदी भाषा तथा शिक्षा के प्रचार – प्रसार और राजनीतिक पुनर्जागरण में हिंदी भाषा का अतुलनीय योगदान रहा है, इसीलिए मधेश प्रदेश सरकार को इसे उचित महत्त्व देना आवश्यक है । उन्होंने यह भी कहा कि भाषा, साहित्य और शिक्षा के विकास व विस्तार के साथ ही दोनों देशों की खुली सीमा के कारण मधेश तथा अन्य क्षेत्रों में सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक सम्बन्ध को मजबूत करने में भी हिंदी भाषा के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है । अपनी प्रस्तुति के अन्तर्गत उन्होंने कहा कि नेपाल में प्रजातान्त्रिक जागरण लाने में हिंदी भाषा और साहित्य के असाधारण योगदान को हम सभी जानाते हैं . सन् १९५१ तक नेपाल में शिक्षा और प्रशासन की भाषा हिंदी ही थी . उन्होंने आगे कहा कि अभी भी वाणिज्य, व्यापार, संचार मनोरंजन तथा शैक्षिक जगत् में इसका महत्त्वपूर्ण प्रभाव है, इसीलिए इसके वैधानिक प्रयोग को मधेश के सभी स्तर और क्षेत्र में मान्यता देना आवश्यक है ।
मधेश प्रज्ञा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष राम भरोस कापड़ी ने दोनों देशों के बीच रहे धार्मिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक सम्बन्ध को आम जनता के स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने की जरुरत है, इसीलिए सरकार से हिंदी को उचित सम्मान देने का उन्होंने आग्रह किया।
कार्यक्रम में हिंदी भाषा के अभियानी सुदर्शन लाल कर्ण, प्रोफेसर डा आशा सिन्हा, प्रोफेसर उपेन्द्र प्रसाद कमल, प्रोफेसर चन्देश्वर प्रसाद यादव, प्रोफेसर बालकेश्वर ठाकुर, जनकपुरधाम के पूर्व मेयर बजरंग प्रसाद साह तथा पूनम झा ‘मैथिली’ ने हिंदी भाषा को भारतीय भाषा के रुप नहीं बल्कि बडी संख्या में रही नेपालियों की सम्पर्क भाषा तथा मातृभाषा के रुप में समझने का सभी से आग्रह किया ।
अवसर पर हिंदी केन्द्रीय विभाग के सहायक प्रोफेसर विनोदकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि,”हिंदी भाषा को औपचारिक रुप में मान्यता देकर अध्ययन – अध्यापन का कार्य हो रहा है फिर भी आम नागरिक और राजनीतिक स्तर पर इस भाषा के प्रति भारतीय भाषा का जो भ्रम है उसे दूर करने के लिए और भाषा को समझने में और अधिक सहयोग पहुँचाने के उद्देश्य से हिंदी केन्द्रीय विभाग देश के सभी प्रदेशों में यह परिचर्चा कार्यक्रम करने जा रहा है “
कार्यक्रम का समुद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन तथा विभागाध्यक्ष डा. संजीता वर्मा द्वारा रचित विभागीय कुल गीत से किया गया . कुल गीत का गायन हिंदी केन्द्रीय विभाग की पूर्व छात्रा अंशु झा ने अपने मधुर स्वरों से किया .
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए सहायक प्रोफेसर डा लक्ष्मी जोशी ने कहा कि, “हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो मधेश की सभी भाषाओं को एकता के सूत्र में बाँधने की क्षमता रखती है ” उन्होने कहा कि विद्यापति या मैथिली भाषा का प्रचार भी हिंदी साहित्य के महान् विद्वान आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के माध्यम से ही हुआ है ।
अवसर पर सभी अतिथियों को मधेश की पहचान लाल रंग का गमछा पहनाकर स्वागत किया गया । इसी प्रकार राजनीतिक कर्मी, समाजसेवी तथा हिंदी प्रेमी बलराम महतो को अभिनन्दन –पत्र से सम्मानित किया गया . यह सम्मान मुख्य अतिथि केन्द्रीय शिक्षा, विज्ञान तथा तकनीकी राज्य मन्त्री प्रमिला कुमारी यादव के हाथों द्वारा प्रदान किया गया . इसी प्रकार मुख्य अतिथि के साथ- साथ विशिष्ट अतिथियों को विभाग की ओर से सम्मान चिन्ह दिया गया जिसमें सभी भाषाओं के प्रेम से भरा गीत रचा हुआ था .
कार्यक्रम का संचालन हिंदी केन्द्रीय विभाग के सहायक प्रोफेसर विनोदकुमार विश्वकर्मा ने अत्यन्त आकर्षक रुप से किया और विभागाध्यक्ष डा. संजीता वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया . कार्यक्रम में मधेश प्रदेश के विधायकों, राजनीतिक कर्मियों, प्राध्यापकों, साहित्यकारों और अनेक विद्वानों ने भाग लिया .





