अमरशहीद खुदीराम बोस और इंकलाबी कवि गोपाल सिंह नेपाली पूरी शिद्दत से याद किए गए
दिनाँक 11.08.2023 को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा हिन्दी विभाग में स्वाधीनता आंदोलन के दो महान सपूतों -शहादत दिवस पर अमर शहीद खुदीराम बोस और गीतों के राजकुमार इंकलाबी कवि गोपाल सिंह नेपाली पूरी शिद्दत के साथ याद किए गए।इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए
विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र साह ने कहा कि गोपाल सिंह नेपाली युगधर्म के सशक्त कवि थे। उनकी कविताओं में राष्ट्रीय चेतना की प्रखरता के साथ-साथ मानवीय मूल्यों तथा मानवीय संवेदना की चरम अभिव्यक्ति हुई है। नेपाली
ने साहित्य और समाज को जिया था। नेपाली जी की रचनाओं में सहजता, सहृदयता तथा आत्मीयता का औदात्यपूर्ण स्वरूप परिलक्षित होता है।प्रो० साह ने कहा कि साहित्यिक-न्याय के तहत उनपर पर्याप्त शोधकार्य की जरूरत है। सहप्राचार्य डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने कहा कि आज राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन के दोनों महान सपूतों को पूरी शिद्दत से याद करने और उनके सपनों का मुल्क बनाने के लिए संकल्प लेने का दिन है। अमर शहीद खुदीराम बोस की शहादत और उनके सपनों का मुल्क बनाने के लिए मौजूदा फासिस्ट सत्ता से हमें टकराना होगा।वहीं गोपाल सिंह नेपाली आज के कवि और लेखक से कहीं ज्यादा बेहतर और क्रांतिकारी कवि, साहित्यकार और पत्रकार थे। वे स्वाधीनता आंदोलन के योद्धा थे। डॉ. सुमन ने विस्तार से गोपाल सिंह नेपाली के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व को रेखांकित किया। उन्हों ने यह भी कहा कि सत्ता के गलियारे में भटकनेवाले किसी भी राष्ट्रकवि से गोपाल सिंह नेपाली का कद ऊंचा था। उनके जीवन का सूत्र था –
‘”तुझ सा -लहरों में बह लेता, तो मैं भी सत्ता गह लेता। ईमान बेचता फिरता, तो मैं भी महलों में रह लेता।’ ‘मंच के संचालक विभाग के सह-प्राचार्य डॉ. आनंद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि इनका फिल्मी जगत में बहुत ही महत्त्वपूर्ण योगदान है, इनके द्वारा लिखे गीत आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं। डॉ.गुप्ता ने कहा कि उन्होंने अपने गीतों और कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय भावना को उजागर करने का काम किया है।
सहायक प्राचार्य डॉ० मंजरी खरे ने कहा कि वे एक प्रसिद्ध साहित्यकार, गीतकार और पत्रकार थे। वे साहित्य के अलावे गीतों के माध्यम से भी समाज से जुड़े रहे। उन्हाेंने ‘मुसाफिर कहाँ तेरा मंजिल, कहाँ तेरा ठिकाना’ कविता का पाठ भी किया।
डॉ.प्रीतम कुमार मिश्र ने इस अवसर पर कहा कि आज नेपाली जी की जयंती के साथ ही खुदीराम बोस का शहादत दिवस भी है। इसलिए आज का दिन बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्हाेंने कहा कि वे युगद्रष्टा थे, जो आनेवाली समस्या को पहले ही भांप लेते थे।
डॉ.गंगेश मिश्र ने कहा कि हमारे लिए सबसे गौरव की बात है कि बिहार में नेपाली जी जैसे साहित्यकार हुए। उन्होंने कहा कि साहित्यकार द्वारा लिखी गयी रचनाओं का कुछ- न- कुछ उद्देश्य होता है, जो राष्ट्र और समाज को जोड़ता है।
कनीय शोधप्रज्ञा सुभद्रा कुमारी ने उनके द्वारा रचित कविता ‘ तारे चमके तुम भी चमको ‘ का पाठ किया। इस मौके पर कनीय शोधप्रज्ञ सियाराम मुखिया, दुर्गानंद ठाकुर, ज्योति कुमारी, पुष्पा कुमारी और बड़ी संख्या में शोधपाठ्यक्रम तथा पत्रकारिता के छात्र-छात्राऍं उपस्थित थे।


