भारतीय राजदूतावास द्वारा “नेपाल में हिन्दी” पुस्तक का विमोचन एवं परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन
काठमांडू, ३ भादव । भारतीय राजदूतावास, काठमांडू द्वारा ’नेपाल– भारत साहित्य महोत्सव’ के अंतर्गत ’पुस्तक विमोचन एवं परिचर्चा’ कार्यक्रम का आयोजन नेपाल–भारत पुस्तकालय में किया गया । कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि, नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश श्री गिरीशचंद्र लाल के कर–कमलों से बी.पी कोइराला फाउंडेशन के सहयोग से प्रकाशित हिंदी पुस्तक ‘किया गया । नेपाल के वरिष्ठ कवि श्री स्नेह सायमि और राजेंद्र शलभ की नेपाली से हिंदी में अनूदित काव्य संकलन ’उजाले के रंग’ तथा श्री स्नेह सायमि के नेपाली काव्य संकलन ‘चश्मा र आँखाको वार्ता’ पर परिचर्चा हुई । त्रिभुवन विश्वविद्यालय की हिंदी प्राध्यापक डॉ श्वेता दीप्ति, प्रतिष्ठित कवि श्री बिधान आचार्य और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रामदयाल राकेश ने कार्यक्रम में अपने विचार रखे ।

अपने विचार को रखते हुए डॉ श्वेता दीप्ति ने कहा कि –भाषा कभी तोड़ने का काम नहीं करती । वह हमेशा जोड़ती है । नेपाल से हिन्दी का बहुत ही पुराना रिश्ता है । नेपाल में शिक्षा का प्रसार एवं अध्ययन स्थल हिन्दी प्रदेश रहा है । यहाँ बहुत सी भाषाएं बोली जाती हैं । सभी की अपनी अपनी विशेषता है । इसलिए आवश्यकता है साथ चलने की । साथ चलने का अलग ही आनंद है ।
अपने विचारों को रखते हुए स्नेह सायमी ने भी कहा कि हिन्दी हमारे लिए नई भाषा नहीं है । उन्होंने कहा कि जनसंबंध को कभी तोड़ा नहीं जा सकता है ।
वरिष्ठ साहित्यकार रामदयाल राकेश ने ‘नेपाल में हिन्दी पुस्तक के लेखक डॉ कृष्णचन्द्र मिश्र को याद करते हुए कहा कि – आज कृष्णचन्द्र मिश्र हमारे बीच नहीं है । लेकिन वो हिन्दी के सच्चे सेवक थे । हिन्दी के प्रचार प्रसार में उन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया है ।
मुख्य अतिथि श्री गिरीशचंद्र लाल ने अपने संबोधन में नेपाल और भारत के सदियों पुराने संबंधों में साझी संस्कृति तथा दोनों देश की भाषाओं के महत्व पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लेखक, शिक्षक, भाषाविद एवं साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति थी । कार्यक्रम का संचालन श्री सत्येंद्र दहिया ने किया।



















