मधेस में राजनीतिक दलों की उदासीनता पर सुधीर शर्मा और विजय सिंह
जनकपुरधाम, 1 सेप्टेंबर । आज जनकपुरधाम में “मधेश मा राजनीतिक दलहरू को उदासीनता” विषयक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। समारोह का सुभारम्भ श्री मनोज कुमार साह ने संचालन के रूप में किया। नार्थ साउथ कलेक्टिवस के अध्यक्ष राकेश मिश्र ने परिचयात्मक शुरुआत की ।
पहला वक्ता के रूप में बोलते हुये डॉ विजयकुमार सिंह ने मधेश को गौतमबुद्ध की जन्मभूमि कहते हुये कहा कि मधेश हमेशा से शासित रहा है । उन्होंने कहा कि मधेश केवल 8 जिला ही नही 22 जिला तक है। शासकों का दृष्टिकोण ही गलत है वह मधेश को देखना ही नहीं चाहता । डा सिंह ने मधेश आंदोलन की चर्चा करते हुए कहा कि देश के रिस्ट्रक्चरिंग में इस आंदोलन का बहुत बड़ा योगदान है । उन्होंने राजनीतिक पार्टी पर आरोप लगया कि वह केवल सत्ता को देखता है और सत्ता में ही टिकना चाहता है। लेकिन जिम्मेवारी से भागता है । कोई भी दल जिम्मेदारी लेने को तैयार नही है । राजनीतिक पार्टी का मुख्य एजेंडा में देश निर्माण है नहीं । उन्होंने बताया कि मधेश भी उदासीन है । उन्होंने प्रश्न किया कि हालही में राजेश्वर नेपाली जी के निधन का समाचार राष्ट्रीय मीडिया में कहाँ आया ?
दूसरे वक्ता के रूप में कांतिपुर के पूर्व सम्पादक सुधीर शर्मा ने कहा कि संघीयता मुख्य रूप से मधेश आंदोलन का ही देन है । उन्होंने कहा कि संघ सरकार अभी भी संघीयता को पूर्ण रूपेण स्वीकार करने की स्थिति में नहीं दिखती है। उसकी मानसिकता ही यह है कि जो हम देतें हैं वह तुम लो । उन्होंने यह भी कहा कि मधेश आंदोलन में लगे हुए लोगों की मानसिकता भी यही है कि पावर में जाकर कुछ प्राप्त करें यानिकि सत्ता में कैसे टिके रहें उधर ही ध्यान रहता है। उन्होंने कहा कि पुराना पार्टी में पुराना नेता अब ज्यादा दिन नहीं चल सकता । उनका विचार था कि भारतीय शासक संघीयता और हिन्दू धर्म के विच भी बार्गेनिंग कर सकता है । चीन बिलकुल ही संघीयता के पक्ष में नहीं है ।




