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नेपाल में हिंदी के पुरोधा राजेश्वर नेपाली इतिहास थे, इतिहास हैं और इतिहास रहेंगे

 

काठमांडू, २० भादव । वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार राजेश्वर नेपाली को स्मरण करते हुए आज राजधानी काठमांडू में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया ।

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आज नेपाल भारत पुस्तकालय काठमांडू में भारतीय राजदूतावास, हिन्दी मासिक पत्रिका हिमालिनी तथा संवाद फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वाधान में एक कार्यक्रम का आयोजन कर नेपाल में हिन्दी के पुरोधा श्री राजेश्वर नेपाली के योगदान की चर्चा की गई ।
उन्हें याद करते हुए साहित्यकार परमेश्वर कापडि़ ने कहा कि –वो एक ‘इन्साइक्लोपिडिया’थे । जिन्हें दूसरों के बारे में अच्छी बातें याद रहती थी ।
इसी तरह हिमालिनी के प्रबंध निदेशक ई. सच्चिानंद मिश्र ने कहा कि उनके बारे में बोलना बहुत कठीन है । राजेश्वरजी चाहते थे कि हिन्दी को नेपाल में एक सम्मापूर्वक जगह मिले जो अभी तक नहीं मिली है । वो हिन्दी को भी अपनी मातृभाषा मानते थे ।
वरिष्ठ पत्रकार युगनाथ पौडेल ने राजेश्वरजी नेपाली के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वो हमेशा कहते थे कि मधेश को जोड़ने का काम करती है हिन्दी ।
संतोष साह फाउण्डेशन के संस्थापक संतोष साह ने कहा कि राजेश्वर नेपाली जी के लिए सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके द्वारा लिखे कुछ आलेख या उनके बारे में जो बातें हमें मालुम नहीं है, उन्हें एक जगह एकत्र कर एक पुस्तक का रुप दें ।
उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए हिमालिनी के सम्पादक तथा त्रिभुवन विश्वविद्यालय की हिन्दी प्राध्यापक डॉ श्वेता दीप्ति ने कहा कि उनके जाने से एक युग का अंत हुआ है । राजेश्वर नेपाली इतिहास थे, इतिहास हैं और इतिहास रहेंगे ।
राजेश्वर नेपाली को याद करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम दयाल राकेश ने कहा कि हिन्दी के विकास में उनका अमूल्य योगदान रहा है । उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नेपाली जो हिन्दी सम्मेलन किया करते थे अब उसका भार कौन लेगा ? इस अवसर पर साहित्यकार श्री गंगा प्रसाद अकेला ने भी नेपाली जी के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।

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कार्यक्रम का संचालन करते हुए भारतीय दूतावास के श्री सत्येन्द्र दहिया ने राजेश्वरजी नेपाली का संक्षिप्त परिचय दिया ।
राजेश्वर नेपाली का जन्म वि.सं. २००२ भादव १८ गते को हुआ । वो सभी भाषा का सम्मान करते थे । हिन्दी के लिए वो शुरु से ही लड़ते आए थे । वो बहुत बड़े समर्थक थे हिन्दी के । पिछले कुछ वर्षो से वो बीमार चल रहे थे । २८ अगस्त २०२३ को जनकपुर के मैक्स अस्पताल में उनका निधन हो गया । ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शांति दें ।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्याकर, लेखक तथा शिक्षक उपस्थित थे ।

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