Thu. Jul 9th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

कौन बनेगा सर्वोच्च अदालत का प्रमुख न्यायाधीश?

 

काठमांडू, ६ मई २०२६ । — नेपाल की न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल द्वारा **संवैधानिक परिषद् सम्बन्धी अध्यादेश** जारी करने के बाद प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह के नेतृत्व वाली सरकार अब इस पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ा सकती है।

वर्तमान स्थिति
सर्वोच्च अदालत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश **प्रकाशमान सिंह राउत** ६५ वर्ष की उमेर सीमा पूरी होने पर चैत १८, २०८३ (१ अप्रैल २०२६) को अवकाश प्राप्त कर चुके हैं। तब से **सपना प्रधान मल्ल** (Sapana Pradhan Malla) कार्यवाहक (Acting) प्रधान न्यायाधीश के रूप में पद संभाल रही हैं। वे नेपाल की दूसरी महिला हैं, जिन्होंने न्यायपालिका का नेतृत्व संभाला है (पहली सुषिला कार्की थीं)।

न्याय परिषद् द्वारा सिफारिश किए गए ६ न्यायाधीश
न्याय परिषद् ने प्रधान न्यायाधीश पद के लिए निम्नलिखित ६ न्यायाधीशों के नाम पहले ही संवैधानिक परिषद् को भेज दिए थे:

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 8 जुलाई 2026 बुधवार शुभसंवत् 2083

1. **सपना प्रधान मल्ल** (वरिष्ठतम)
2. कुमार रेग्मी
3. हरिप्रसाद फुयाल
4. डा. मनोज कुमार शर्मा
5. डा. नहकुल सुवेदी
6. तिलप्रसाद श्रेष्ठ

**संवैधानिक प्रावधान**: नेपाल के संविधान के अनुच्छेद १२९ के अनुसार, सर्वोच्च अदालत में कम से कम ३ वर्ष सेवा कर चुके न्यायाधीश प्रधान न्यायाधीश बनने के योग्य हैं।

परंपरा बनाम संवैधानिक विकल्प
परंपरा: नेपाल में अब तक **वरिष्ठता** (Seniority) के आधार पर प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति होती रही है। अगर इस परंपरा को बनाए रखा गया तो **सपना प्रधान मल्ल** स्थायी प्रधान न्यायाधीश बनेंगी। उनका कार्यकाल लगभग २०८५ कात्तिक (नवंबर २०२८) तक रहेगा।
– **सरकार का विकल्प**: अध्यादेश जारी होने के बाद सरकार ६ में से किसी भी योग्य न्यायाधीश को चुन सकती है। संवैधानिक परिषद् में प्रधानमंत्री की भूमिका निर्णायक हो गई है।

यह भी पढें   देश के विभिन्न राजमार्ग पूर्ण से अवरुद्ध

अध्यादेश के प्रमुख प्रावधान
अध्यादेश ने संवैधानिक परिषद् की बैठक के लिए गणपूरक संख्या कम कर दी है और प्रधानमंत्री (अध्यक्ष) के मत को निर्णायक बना दिया है। इससे बालेन सरकार को अपनी पसंद का व्यक्ति नियुक्त करने में आसानी होगी।

कानूनी विशेषज्ञों की राय
– **डॉ. भीमार्जुन आचार्य** (संविधानविद्): संविधान के अनुसार सरकार ६ में से किसी को भी प्रधान न्यायाधीश बना सकती है। वरिष्ठता अनिवार्य नहीं है।
– **राजु चापागाई** (वरिष्ठ अधिवक्ता): वरिष्ठता मिचना न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाएगा। बिना ठोस कारण के वरिष्ठ न्यायाधीश को छोड़कर कनिष्ठ को नियुक्त करना राज्य हस्तक्षेप माना जाएगा।

सर्वोच्च अदालत ने भी पहले अपने फैसलों में कहा है कि वरिष्ठता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, और अगर किया भी जाए तो उसके लिए **वस्तुनिष्ठ आधार** स्पष्ट होना चाहिए।

सम्भावित परिदृश्य
1. **सबसे सम्भावित** — वरिष्ठता के आधार पर **सपना प्रधान मल्ल** की नियुक्ति (परंपरा कायम रहेगी)।
2. **विवादास्पद** — अगर सरकार किसी अन्य न्यायाधीश को चुनती है तो न्यायपालिका में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगेगा और विवाद खड़ा हो सकता है।
3. नियुक्ति के बाद संसदीय सुनुवाइ समिति की मंजूरी और राष्ट्रपति द्वारा शपथ अनिवार्य है।

यह भी पढें   जयवीर देउवा एक सप्ताह के भीतर हाजिर हों

निष्कर्ष
बालेन शाह सरकार के पास अब मजबूत संवैधानिक औजार है, लेकिन न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी उसी पर है। नेपाल की जनता और कानूनी क्षेत्र दोनों नजरें इस नियुक्ति पर टिकी हुई हैं। यदि वरिष्ठता का सम्मान किया गया तो **सपना प्रधान मल्ल** नेपाल की दूसरी स्थायी महिला प्रधान न्यायाधीश बनेंगी, जो ऐतिहासिक होगा।

नवीनतम उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर (६ मई २०२६ तक)।
नियुक्ति होते ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *