Wed. Aug 12th, 2026
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सिद्धिदात्री तू जग की माता। तुम्ही भवानी सिद्धि विधाता।।

 

सिद्धिदात्री तू जग की माता।
तुम्ही भवानी सिद्धि विधाता।।
भक्तों की रक्षक सुखदाता।
तूं जगपालक भाग्य विधाता।।

रिद्धि सिद्धि के तुम ही दाता।
तव पूजन से सब हो जाता।।
तेरे नाम से मन सुख पाता।
कठिन काम को सिद्ध समाता।।

राधाकान्त तुम्हे ही ध्याता।
सबके सिर हस्त रखो हे माता।।
सब धन वैभव तुमसे आता।
जगदम्बा है तुझसे नाता।।

राधाकान्त गहे दिन राता।
सबके खातिर पाठ सुनाता।।
तेरे बिन अब और न भाता।
नवमी व्रत पुरन कर माता।।

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हवन समर्पण जो कर जाता।
अष्ट सिद्धि नव निद्धि को पाता।।
सकल सुमंगल फल को पाता।
राधाकान्त कहे नित माता।।

सिद्धिदात्री तव सब गुण गाता।
सबके कारज सिद्ध कर माता।।
भक्त जो तेरे द्वारे आता।
सिंह पीठ चढ़ी जग माता।।

सकल कार्य पुरन हो जाता।
दशमी तक जो भोग लगाता।।
सब भक्तन की लाज रखो माँ,
जो भी तेरे द्वारे आता।।


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माता सिद्धिदात्री आपके जीवन के सभी रोग शोक संताप मिटाकर,पूरे परिवार का जीवन खुशियों से भर दे, माता जी आप सबको उत्तम आयु, आरोग्यता, सुख सौभाग्य सन्तति सन्तान एवं सम्पूर्ण प्रसन्नता प्रदान करें।
*✒ ✍???? हरि ॐ गुरुदेव..! ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*

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