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जरूरी है नेपाल–भारत सीमा संवाद : सन्तोष मेहता

जरूरी है नेपाल–भारत सीमा संवाद
 
जरूरी है नेपाल–भारत सीमा संवाद
जरूरी है नेपाल–भारत सीमा संवाद

दुनिया के हर देश का एक सीमा चिन्ह होता है, एक राजनीतिक (और कभी–कभी भौतिक) विभाजन रेखा होती है जो यह चिन्हित करती है कि एक देश कहाँ समाप्त होता है और दूसरा देश या क्षेत्र कहाँ से शुरू होता है । सीमाओं को, पार करने के दिशानिर्देशों के आधार पर खुला या बंद सीमा के रूप में वर्गीकृत किया जाता है । सबसे कम प्रतिबंधित प्रकार की सीमा नीति एक खुली सीमा है, जिस पर लोग अपनी इच्छानुसार आने–जाने के लिए स्वतंत्र होते हैं । कई देशों में नियंत्रित सीमा–नीति है लेकिन सीमाएँ अनजाने में खुली हैं । इन देशों के पास अधिक प्रतिबंधात्मक सीमा नीति है लेकिन लागू नहीं हो पाती है क्योंकि सरकार के पास उचित सीमा नियंत्रण के लिए धन संसाधन की कमी होती है ।

पूर्ण खुली सीमा – पूर्ण खुली सीमा का अर्थ ही है कि ऐसे देशों में, नागरिक और गैर–नागरिक पासपोर्ट या आईडी या नागरिकता का अन्य प्रमाण दिखाए बिना अपनी इच्छा से सीमा पार कर सकते हैं । चाहे कोई अंतर्राष्ट्रीय आगंतुक हो उन्हें विशिष्ट दस्तावेजÞ ले जाने, अपनी पहचान साबित करने या देश में अपना उद्देश्य बताने की आवश्यकता नहीं होती है । पहचान दिखाए बिना का अर्थ पार पत्र अनुमति से सम्बंधित है । हालाँकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जहाँ खुली सीमाएँ है, वहीं वे महत्वपूर्ण आर्थिक चिंताएँ और सुरक्षा जोखिम भी रहेंगी ही । इस परिस्थिति में साझा आर्थिक चिंता और सुरक्षा नीति आवश्यक हो जाती है ।
सशर्त खुली सीमा – सशर्त खुली सीमा वाले देशों में मूल नागरिक आईडी प्रमाण के साथ अपनी इच्छा से सीमा पार कर सकते हैं, लेकिन अन्य लोग केवल विशिष्ट परिस्थितियों में या निश्चित शर्त एवं अनुमति ही देश में प्रवेश कर सकते हैं ।

यूरोप के २६ शेंगेन देशों की एक दूसरे के साथ खुली सीमाएँ होती हैं । कुछ देश पूर्ण खुली है तो कुछ सशर्त खुली है । यूरोपीय संघ की खुली सीमाएं यहां रहने का लाभदायक पहलू हैं । ग्रीस से स्वीडन तक कहीं भी बिना पासपोर्ट और वीजा के आ जा सकते हैं । अब अफ्रीका भी ऐसा ही करना चाहता है । अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर स्थित देशों ने अमेरिका जैसा बड़ा बाजार पाकर आर्थिक विकास में छलांग लगायी है । यूरोपीय संघ के देशों के बीच आपसी खुलेपन के कारण आकर्षक आर्थिक प्रगति संभव हो सकी है ।

हर जगह खÞासकर सीमावर्ती नागरिक के लिए खुली सीमाएँ एक सामाजिक मुद्दा या नैतिक दायित्व भी हैं । खुली सीमाओं के नीति ‘प्रतिभा पलायन’ का कारण बन सकती है जिसमें कुशल श्रमिक गरीब देशों को छोड़कर अमीर देशों में प्रवास करते हैं । लेकिन यह डर अप्रमाणित है । खुली सीमाएँ गरीबी को कम करने में मदद कर सकती हैं । खुली सीमाएँ गरीब देशों को विकसित होने में मदद कर सकती हैं । खुली सीमाएँ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रोत्साहित कर सकती हैं । खुली सीमाएँ यात्रा और व्यापार की बाधाओं को दूर करके अंतर्राष्ट्रीय निवेश के अवसर बढ़ा सकती हैं । खुली सीमाएँ वीजÞा कागजी कार्रवाई झंझट और सुरक्षा उपायों के कारण होने वाली देरी और जटिलताओं को समाप्त करके यात्रियों के यात्रा बेहतर बनाती हैं ।

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नेपाल और भारत के बीच १,७५३ किलोमीटर की बॉर्डर सीमा में, जिसके साथ नेपाल अपनी १,४०० किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा खुली सीमा प्रणाली के तहत एक अनूठी व्यवस्था है, जो एक देश से दूसरे देश में सीमा पार लोगों की अप्रतिबंधित आवाजाही की सुविधा प्रदान करती है । इन देशों के नागरिकों को दो देशों के भीतर यात्रा करने के लिए वीजÞा या पासपोर्ट रखने की आवश्यकता नहीं है नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा प्रणाली के बावजूद, कभी–कभी इसे कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से बंद किया गया है, जब सीमा के दोनों ओर भारत या नेपाल में चुनाव होते हैं, लेकिन इसे जल्द ही फिर से खोल दिया जाता है ।
नेपाल और भारत के बीच दोनों देशों के गठन से बहुत पहले से लोगों के बीच संबंध थे । आज जो नेपाल भारत बीच दशगजा है, दोनों तरफ के लोग एक ही देश में रहते भी थे । दशगजा तो सिर्फ राजनैतिक विभाजन है । ये उस वक्त की कहानी है जब आज का भारत या नेपाल आज जैसा नहीं था । प्रबुद्ध व्यक्ति समूह (ईपीजी) ने दोनों देशों की सरकारों को प्रस्ताव दिया है कि उन्हें नेपाल–भारत की खुली सीमा के प्रबंधन के लिए नागरिक पहचान पत्र जारी करना चाहिए । जिसके मुताबिक, एक निश्चित संख्या में चेक प्वाइंट से ही गुजरना संभव होगा और फोटोयुक्त पहचान पत्र पेश करना अनिवार्य होगा । यह प्रस्ताव राजनैतिक दृष्टि से आया हुआ प्रस्ताव है । हमारे रिश्ते को केवल राजनीतिक चश्मे से देखा जाए तो दोनों के बीच का रिश्ता नीरस है ।

वर्तमान में नेपाल–भारत सीमा के दोनों ओर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के कारण, स्थानीय निवासियों के लिए सीमा पार करना मुश्किल हो रहा है । अगर भारत लेजÞर तकनीक से लैस दीवारों (बिकभच धबििक) या नेपाल–भारत सीमा पर इन्फ्रारेड बाड़ (ष्लाचबचभम ाभलअष्लन) लगाता है तो स्थिति और भी खÞराब हो सकती है । वैसे भी खुली सीमाएँ और पारिवारिक संबंधों के विशेषण व्यावहारिक रूप से दिन–ब–दिन कमजोर होते जा रहे हैं । नेपाल और भारत के बीच खुला आवागमन १९५० की शांति और मैत्री संधि का प्रावधान है । दोनों देशों के बीच संबंध प्रकृति से पैदा हुए हैं और साझा इतिहास, संस्कृति, धर्म और सामाजिक मूल्यों से पोषित हैं । इस से उन हजÞारों–हजÞार लोगों का जीवन प्रभावित होंगे जो सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और यहां तक कि राजनीतिक कारणों के लिए हर दिन सीमा पार करते है । इसलिए सीमा बंद की परिकल्पना सीमांचल की जनता सपने में भी नहीं करती है फिर भी हमारे दोनों देशों के लोगों को हमारे बीच मौजूद खुली सीमा से लाभ होना चाहिए, हानि नहीं ।

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हाल ही में बार्डर पर पहचान पत्र दिखाने का प्रावधान लागू किया गया है । पहचान पत्र की व्यवस्था नेपाली सन्दर्भ में अव्यावहारिक है । नेपाल की सामाजिक–आर्थिक स्थिति उस अनुरूप विकसित नहीं हुई है । बड़ी संख्या में लोग नागरिकता प्रमाणपत्र से वंचित हैं । वैसे भी खुली सीमा की अवधारणा से यह बात मेल नहीं खाती है । अनुमान है कि नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों के छह से आठ मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए भारत पर निर्भर हैं । उनके लिए घर पर रहना मुश्किल है, क्योंकि उनके पास खेती या जीवन यापन के लिए अन्य वैकल्पिक साधनों के लिए पर्याप्त जÞमीन नहीं है । लेकिन मधेसियों के लिए सीमा पार करने का मतलब खरीदारी और आवागमन है । उसके रिश्तेदार से भेटघाट एवं पारिवारिक सामाजिक सांस्कृतिक कार्य, तीर्थयात्राएं और दैनिक खरीदारी हैं । लेकिन इसके अलावा, नेपाली भाषियों के लिए बड़ी संख्या में नौकरियां और व्यवसाय से जुड़े अवसर भी मौजूद हैं । भारत में बहुत कम संख्या में मधेसी कार्यरत हैं । उसमें भी अधिकांश की पहुंच निचले स्तर के श्रम बाजार तक है । फिर भी मधेसी का रिश्ता सामाजिक सांस्कृतिक है । जिसको खून का रिश्ता या भावना का रिश्ता कह सकते हैं । ऐसे रिश्ते में कोई फॉल्ट दीवारे नहीं हो सकती है ।
नेपाल और भारत खुली सीमा व्यवस्था का पालन करते आ रहे है । ऐसा इसलिए की दोनों देशों के बीच १९५० में हुई शांति और मित्रता समझौता दोनों देशों की राष्ट्रीयता वाले नागरिकों को एक दूसरे की सीमाक्षेत्र में एक नागरिक के रूप में स्वीकारे जाने की सहमति प्रदान करता है । इसलिए, धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, स्वास्थ संबंधी, आर्थिक, वाणिज्यिक और अन्य व्यापारिक जÞरुरतों हेतु, प्रतिदिन सैंकड़ों हजारों लोग दोनों देशों के सीमा पार से आना जाना करते है । कोविड के वक्त जब भारत –नेपाल बॉर्डर को बंद किया गया तो उस वजह से नेपाली अर्थव्यवस्था पर इसके काफी भारी असर पड़ा । और तो और, सीमा के नजदीक के मुख्यत भारतीय स्थानीय बाजार पर भी काफी भारी असर पड़ा कारण की वो सीमापार से आने वाले लोगों पर काफी हद तक निर्भर करते है ।

 

नेपाल भारत के बीच की खुली सीमा एक व्यापक अवधारणा है, जिसमें दो संप्रभु क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक, पर्यावरणीय, आपदा, जीवन स्तर में सुधार, आवाजाही में आसानी, संवाद और आपसी सौहार्द्र में समानताएं तलाशी जाती हैं । इसीलिए दसगजा दोनो तरफ में समृद्धि, सद्भाव और समन्वय की खोज के लिए ’खुली सीमा’ की अवधारणा महत्वपूर्ण हो गई है । दोनों देश की सीमा क्षेत्र की हकीकत यह है कि कोई भी देश अपने बूते प्रगति और उन्नति हासिल नहीं कर सकता, सामाजिक वैमनस्यता को खत्म करना ही काफी नहीं है । यदि हम परस्पर निर्भरता को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों के जीवन स्तर को समान रूप से नहीं बदल सकते, तो असंतुलन बना रहेगा । भारत २०४७ तक पूरी तरह से विकसित देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, अगले पांच वर्षों में मौजूदा पांचवीं शक्ति से तीसरी शक्ति बन रहे हैं । इस वक्त नेपाल को नजर अंदाज करना संतुलित नहीं होगा ।

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खुली सीमा हो तो दोनों देशों को एक–दूसरे की चिंताओं और हितों को समझने की जरूरत है । खुली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा सुरक्षा बलों के लिए एक चुनौती उत्पन्न करती है । निश्चित रूप से मानव तस्करी, निषिद्ध माल, नकली भारतीय मुद्राओं, हथियार और ड्रग्स की तस्करी, आतंकवादियों और विद्रोहियों को सरल निर्गमन खुली सीमा की चुनौती है । हमें खुली सीमा से उभरने वाली समस्याओं के वैध समाधान की तलाश करने की जरूरत है, लेकिन सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के मुक्त आवागमन के अधिकारों को प्रभावित किए बिना । ‘खुली सीमा को खतरे के बजाय अवसर के रूप में कैसे लें ? खुली सीमाओं से लाभान्वित होने वाले नागरिकों की क्या जिम्मेदारी होगी ? इस बारे में व्यापक और खुली बातचीत होनी चाहिए । ऐसा कार्य दोनो देशको आधिकारिक रूप से करनी चाहिए । सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को चौकीदार माना जाये, चौकीदार बनाया जाए । इसके लिए दोनो देश की बाजार व्यवस्था, मूल्य एवं सामान महत्व वाली मुद्रा आदि महत्वपूर्ण हो जाते हैं । दोनों देश की राजनैतिक व्यवस्था, स्थायित्व एवं नेपाल भारत मैत्री सरकार भी एक दूसरे को प्रभावित करती है । नेपाल–भारत सीमा का खुलापन दोनों तरफ की आदत बन गयी है । इसलिए नागरिक स्तर से सीमांचल जागरण आवश्यक है । खुली सीमाओं की सीमित समस्याओं को बताकर असीमित अवसरों का दरवाजा बंद कर देना बुद्धिमानी नहीं है ।

भारत और नेपाल के बीच के सामाजिक–आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूती देने के लिए, जÞरूरी है कि दोनों देशों के बीच निजी वाहनों द्वारा होने वाली सीमापार गतिविधियों की पुनर्विवेचना की जाए । कस्टम पॉइंट्स पर तैनात नेपाली अधिकारी, भारतीय वाहनों को नेपाल दाखिल होने के लिए प्रतिदिन के आधार पर कुछ शुल्क लेकर नेपाल के भीतर आने की अनुमति दे देते है । वहीं दूसरी तरफ, नेपाली नंबर वाले वाहनों से भारत आने को इच्छुक नेपाली जनता को काठमांडू स्थित भारतीय एम्बेसी या फिर बीरगंज स्थित कॉनसुलेट जनरल ऑफिस से अनुमति लेनी पड़ती है । भारतीय लोगों को अपनी भारतीय नंबर वाले वाहनों से सीमापार नेपाल जाने के लिए दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास से ऐसी कोई भी अनुमति की जÞरुरत नहीं पड़ती है । वास्तव में शुल्क लेना वा आवागमन में लंबा अवरोध या बाधाए जैसी ऐसी कोई भी विसंगति या दैनिक जीवन से सम्बंधित खरीदारी में जो सीमा वार पार गतिविधियों के जरिए हो रही हो वो १९५० में भारत–नेपाल के बीच हुए शांति और मित्रता संधि की भावनाओं के खिलापÞm है । हम सीमांचल के नागरिक के भावना के खिलाफ है ।

संतोष मेहता

 

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