तीन दल के नेता से राष्ट्रपति ने की मुलाकात, कहा प्रदेश को अधिकार दिलाने वाला कानून लाया जाए
काठमांडू, पुष २८– तीन दल के नेताओं से राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी कि संघीयता कार्यान्वयन को लेकर कानून जारी करने में देरी हो रही है । प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस, एमाले और माओवादी संघीयता प्रभावकारी कार्यान्वयन में ध्यान नहीं दे रहे हैं । इस बात को लेकर तीनों दल के नेताओ से राष्ट्रपति मिले हैं ।
संघीय संसद् से प्रहरी समायोजन सम्बन्धी ऐन, निजामती कर्मचारी समायोजन ऐन के साथ ही कुछ महत्वपूर्ण ऐन जो प्रदेश सरकार को परेशान कर रही है ये बातें सातों प्रदेश के मुख्यमन्त्री सार्वजनिक रूप में कहते आ रहेहैं । मुख्यमन्त्रियों ने संघीय सरकार की आलोचना की है ।
राष्ट्रपति कार्यालय ने जानकारी दी है कि इस बार प्रधानमन्त्री एवं माओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल, कांग्रेस सभापति शेरबहादुर देउवा और प्रमुख प्रतिपक्षी दल एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को राष्ट्रपति ने शुक्रवार स्वयं शीतल निवास बुलाकर इन बातों की ओर ध्यानाकर्षण कराया है । ‘सभी दलों ने मिलकर संघीयता को लाया है, अब कार्यान्वयन भी सभी को मिलकर करना होगा । राष्ट्रपति ने इसमें अपनी जिज्ञासा ली है । राष्ट्रपति के प्रेस सलाहकार किरण पोखरेल ने कहा कि ‘मुख्यतह प्रदेश को अधिकार सम्पन्न बनाने के लिए जल्द से जल्द कानून लाया जाए । इस ओर ध्यानाकर्षण करवाया है । राष्ट्रपति ने कहा कि इसमें सभी दल मिलकर आगे बढ़े ।’
पुष १३ में हेटौंडा में हुए सात प्रदेश के मुख्यमन्त्री ने मिलकर संघीयता कार्यान्वयन में संघ सरकार और संघीय संसद् जिज्ञासा नहीं दिखा रही है ये निष्कर्ष निकाला था । कोशी के मुख्यमन्त्री केदार कार्की, मधेश के मुख्यमन्त्री सरोजकुमार यादव, वागमती मुख्यमन्त्री शालिकराम जम्कट्टेल, गण्डकी मुख्यमन्त्री सुरेन्द्र पाण्डे, लुम्बिनी के डिल्ली चौधरी, कर्णाली के राजकुमार शर्मा और सुदूरपश्चिम के मुख्यमन्त्री कमलबहादुर शाह ने संघीयता कार्यान्वयन में दबाब देने के लिए हेटौंडा में सभा की थी । इसके बाद उन सभी ने प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल से मिलकर आगामी संसद् अधिवेशन में अत्यावश्यक ऐन पारित करने का आग्रह किया था । प्रधानमंत्री ने उनकी मांग पूरी की जाएगी कहा था ।
राष्ट्रपति पौडेल ने सरकार जनता को सहज और सुविधाजनक सेवा नहीं दे रही है इस पर भी ध्यानाकर्षण कराया है । एक वर्ष पूरे होने के अवसर में सरकार ने सरकारी कार्यालय से होने वाले सेवा प्रवाह में सुधार होने का दाबा किया । उसी तरह सुशासन में सुधार और सरकारी सेवा में भी सुधार करने का राष्ट्रपति ने आग्रह किया ।
इसी तरह राष्ट्रपति पौडेल ने त्रिभुवन विश्वविद्यालय में उपकुलपति प्रतिस्पर्धा से ही विज्ञों की नियुक्त करने का आग्रह कियाहै साथ ही विश्वविद्यालय में सुधार का अभियान शुरु करें भी कहा है ।

