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किसी भी संस्करण का राजतन्त्र मधेशी और थारुओं के लिए घातक होगा : वृषेशचन्द्र लाल


जलेश्वरः १३ जनवरी । तराई-मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी के अध्यक्ष वृषेशचन्द्र लाल ने राजतन्त्र का कोई भी संस्करण मधेशी और थारुओं के लिए घातक होगा बताया है । उन्होंने तराई-मधेश के लोगों से संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र के समर्थन में पूरी निष्ठा और दृढता से खड़े रहने की अपील की है । अध्यक्ष लाल ने कहा -‘राजतन्त्र का मतलब है एक व्यक्ति के हाथ में शक्ति केन्द्रित होना और जनताको हटा कर किसी व्यक्ति को सर्वोच्च शिखर पर बैठाना । आज मधेशी और थारु जिस भेदभाव से पिड़ित हैं उसका सबसे बड़ा कारण राजतन्त्र का होना ही था ।‘ उन्होंने यह भी कहा कि शाहवंश का इतिहास नाक कान काटनेबालों, पागल राजाओं, राज्य की सम्पूर्ण सत्ता और शक्ति व्यक्ति के पास गिरवी रखनेबाले व्यभिचारी राजाओं, अपनी ही वंश की हत्या करनेबाला और ड्रगिस्ट पागल राजकुमारों का इतिहास है ।
आज महोत्तरी के जलेश्वर में तमलोपाद्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्वोधित करते हुए अध्यक्ष वृषेशचन्द्र लाल ने प्रादेशिक संरचना और राष्ट्रियसभा के औचित्य के बारे में प्रश्न उठानेबालों पर प्रहार करते हुए कहा कि वे प्रतिगमन के पृष्ठपोषक हैं । अध्यक्ष लाल ने प्रादेशिक संरचना जनता की पहिचान और प्रदेश में स्वशासन की प्रत्याभूति से जुड़ा है और राष्ट्रीयसभा संघीय संसद में प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करता है कहते हुए इन्हें और मजबूत और अधिकार सम्पन्न करते जाना आज की आवश्यकता है, बताया । अध्यक्ष वृषेशचन्द्र लाल ने कहा कि प्रदेश सरकारों को प्रदेश को कैसे विकास के पथ में आगे बढ़ाना है इसकी स्पष्ट दृष्टि होना चाहिए जो दुर्भाग्य से नहीं है । उन्होंने प्रदेश सरकार से स्पष्ट दृष्टि और प्राथमिकताओं को सार्वजनिक करने की मांग की ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपना विचार रखते हुए तमलोपा के वरिष्ठ नेता डा. विजय कुमार सिंह ने कहा कि आन्दोलन मुद्दों पर आधारित होते हैं, आन्दोलन सत्ता प्राप्ति और पद के लिए नहीं होता । उन्होंने आगे कहा, -‘कुछ लोग मधेश आन्दोलन के शक्ति और उर्जा को सत्ता और पद के दुरुपयोग कर इसे नष्ट करने की कोशिश की है । आज जो परिस्थिति है उसके लिए ये ही जिम्मेदार हैं ।‘
डा. विजयकुमार सिंह ने यह भी बताया कि वर्त्तमान निर्वाचन प्रणाली को राजनीतिक दलों ने विकृत कर दिया है और इससे वांछित प्रतिनिधित्व का चुनाव मुश्किल हो गया है । निर्वाचन प्रणाली में आमूल परिवर्तन की आवश्यकता है कहते हुए डा. सिंह ने कहा कि पूर्ण समानुपातिक प्रणाली में जनता व्यक्ति, जात, धर्म अथवा पैसा से नहीं पार्टी के कार्यक्रम और उसके प्रति नेतृत्व की प्रतिवद्धता के आधार पर भोट देते हैं । अभी निर्वाचन में पैसा का खेल या जो भी धांधली हो रहा है उसका इलाज पूर्ण समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली ही है । यही कारण है कि तमलोपा पूर्ण समानुपातिक प्रणाली की मांग करती आ रही है ।
तमलोपाद्वारा आज सम्पन्न कार्यक्रम में केन्द्रिय सदस्य दिलिप पाण्डेय, रामजी राय, धीरेन्द्र सिंह, सतीश लाल दास, असगर अली, भोलानाथ झा, उमेशकुमार मण्डल, रामकृपाल साह, भगिरथ लाल, सत्यनाराण साह, मो. युसुफ साफी ने भी अपना अपना मनतव्य रखा था ।

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