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चौंठचन्द्र पर्व सम्पन्न

 

DSC05232कैलास दास, जनकपुर, १३ भदौ । मैथिल समुदाय ने शुक्रवार नियमनिष्ठा के साथ चौंठचन्द्र पर्व हर्षौल्लास पूर्वक मनाया  ।

भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि अर्थात शुक्रवार सुबह से ही ब्रतालु महिला दिन भर उपवास कर साम में गणेश और चन्द्रमा के साथ ही अन्य देवी देवता के पूजा पाठ कर यह पर्व मनाया है ।

इस पर्व के माध्यम से मैथिल कला संस्कृति जागर होता है । खासकर यह पर्व में आँगन मे पूजा किया जाता है । चामलको पिठार को कलात्मक अरिपन बनाकर उसके उपर  पूजा का सामग्री सब रखकर धार्मिक विधिपूर्वक पूजापाठ किया जाता है ।

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यह पर्व में नयाँ मटी के वर्तन, दही केरा, मिठाई, फलफूल के साथ ही विभिन्न प्रकार का पकवान राखकर देवी देवता को चढाने का चलन है ।

भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि साम को चन्द्रमा के दर्शन करने मिथ्या कलङ्क नही लगाता है ऐसा विश्वास किया जा रहा है ।

भविष्यपुराण में उल्लेख अनुसार द्वापरयुग में भगवान् कृष्ण ने स्यमन्तक मणि चोरी करने का आरोप था । मिथ्या कलङ्क लगने के बाद उसे निवारण के लिए उन्होने भी चौंठचन्द ्रको विधिपूर्वक पूजा कर मिथ्या कलङ्क से मुक्त हुआ था ।

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इसका साथ ही एक बार ब्रह्मा से भेटघाट कर  भगवान् गणेश जब आपस लौट रहे थे तो उसका लम्बोदर रुप देखकर चन्द्रमा ने व्यङग्य किया और आवेश मेंं आ कर गणेश ने चन्द्रमा को सोन्दर्यता उपर घमण्ड है तुम सुन्दरता क्षीण हो जाऐगो श्राप दिया था ।

तत्पश्चात चन्द्रमा के शक्ति क्षीण होने के बाद देवताओं के सल्लाह में चन्द्रमा ने गणेश के घोर तपस्या किया तब गणेश प्रसन्न होकर भएर चन्द्रमा को श्राप से मुक्त करने के साथ ही इस तिथि में जो भी तुम्हारा पूजा करेगा उसको मिथ्या कलङ्क नही लगेगा वरदान देने के बाद यह पर्व मनाते आ रहे धार्मिक विश्वास है ।

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