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कला संवर्धन समिति’ द्वारा कला से संबंधित विशेष संगोष्ठी, पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह संपन्न

 2080-12-24 शनिश्चर के दिन, मधेस प्रदेश के रौतहट जिला के गरूडा में श्री सरस्वती राजनारायण प्रतिष्ठान, जनकपुर के अंतर्गत गठित ‘कला संवर्धन समिति’ द्वारा कला से संबंधित विशेष संगोष्ठी, पुस्तक विमोचन, अभिनंदन, पुरस्कार वितरण एवं सम्मान समारोह संपन्न हुआ।



रौतहट के गरुड़ में आयोजित एक कार्यक्रम में लेखिका रेनू गुप्ता की बज्जिका भाषा में लिखी बच्चों की साहित्यिक कृति ‘मेला’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि ‘मेला’ नेपाल में बज्जिका भाषा में बच्चों की कविताओं का पहला संग्रह है। इसके साथ ही गुप्ता की प्रकाशित कृतियों की संख्या सात हो गयी है।

कार्यक्रम में रेणु गुप्ता को पंद्रह हजार रुपये के वीणादेवी पुरस्कार और जनकपुर के साहित्यकार तथा मिथिला चित्रकला के भागीरथ विजय दत्त मणि जी को पंद्रह हजार रुपये के आनंदी देवी पुरस्कार, अंगवस्त्र तथा अभिनंदन पत्र प्रदान किया गया।

नृत्य एवं गायन के क्षेत्र में लगभग पचासी वर्षों का योगदान देने वाले लोकगायक एवं कलाकार अनुप सहनी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया है। 90 वर्षीय कलाकार सहनी ने पांच साल की उम्र में नृत्य और गायन शुरू कर दिया था। कार्यक्रम में कलाकार सहनी ने विभिन्न लोकगीत गाकर अपनी प्रतिभा का परिचय भी दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गरुडा नगर पालिका के प्रमुख कंथमणिप्रसाद कलवार ने कहा कि वे कला क्षेत्र का लगातार सम्मान कर रहे हैं और बज्जिका भाषा एवं साहित्य के साथ-साथ कलात्मकता के क्षेत्र में सक्रिय प्रतिभाओं की सराहना की।  नगर प्रमुख कलवार ने कलाकार सहनी को अपनी ओर से दो हजार एक सौ तथा श्री रामेश्वर रौनीयार जी ने एक हजार एक सय रुपये नकद देकर सम्मानित प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पूर्व मुख्य जिला पदाधिकारी राम विलास राय ने बज्जिका भाषा एवं कला की सराहना करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वह अपनी मातृभाषा, मातृभूमि एवं अपनी संस्कृति पर गर्व कर सके। इसी प्रकार पुरस्कृत एवं सम्मानित प्रतिभाएं गुप्ता, मणि एवं सहनी ने कहा कि समाज ने उन्हें और अधिक मजबूती से सेवा करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

अनिता-शिवा अंतर्राष्ट्रीय बज्जिका साहित्य पुरस्कार के संस्थापक शिवचंद्र साह, बज्जिका साहित्य समाज सरलाही के अध्यक्ष रामचन्द्र महतो कुशवाहा, बज्जिका प्रचार प्रसार समिति रौतहट के संयोजक बिंदा सहनी, बज्जिका के प्रथम प्रशिक्षक बिपिन बिहारी सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बज्जिका की स्थापना हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मधेश प्रांत की प्रमुख भाषा और बज्जिका साहित्य दिन प्रतिदिन उन्नति कर रहा है।

कार्यक्रम में धनुषा, महोत्तरी, सरलाही, रौतहट और बारा जिले के साहित्यकारों ने भाग लिया, बहुभाषी लेखक अजय कुमार झा, प्रसिद्ध कलाकार बृजकिशोर सहनी, बज्जिका जर्नलिस्ट सोसाइटी नेपाल के अध्यक्ष राजूकुमार श्रीवास्तव, लोक कलाकार गगनदेव पंडित, फाउंडेशन के सचिव रामचरित्र ठाकुर, बज्जिका के सचिव. साहित्य संगम रौतहट राम आधार पासवान, नवसर्जक साहित्य चौटारी मधेश प्रदेश के कोषाध्यक्ष अभिजीत राम, भूपन नारायण राम दास, राजेश महतो कुशवाहा, धनदेव जोशी, रवींद्र पटेल, रवींद्र पासवान, संगीता सहनी, सुधीर कुमार लाल, रूपेश रोदन, फाउंडेशन के संस्थापक रामेश्वर रौनियार ने लोकगीत, कविता, गीत, हास्य आदि प्रस्तुत किये।सम्मेलन सार्थक रहा।

संस्थान के अध्यक्ष इंजीनियर चंदेश्वर रौनियार ने कहा कि संस्थान मधेश प्रांत में साहित्य के सभी क्षेत्रों में काम करेगा और उन्होंने जीवन को एक कला बताया। पूर्वी साहित्य के धरोहर रौनियार ने कहा है कि भाषा अभिव्यक्ति का साधन है। कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सभी लोगों को फाउंडेशन की ओर से मधेश अस्मिता प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। बज्जिका साहित्य संगम रौतहट के अध्यक्ष किशुनदयाल श्रीकृष्ण ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में यह घोषणा की गई कि संयोजक संजय साह मित्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कला संवर्धन समिति का गठन किया गया है। सरस्वती राजनारायण फाउंडेशन के अंतर्गत घोषित कला संवर्धन समिति के सदस्य के रूप में शिवचंद्र साह, किशुनदयाल श्रीकृष्ण, रेनू गुप्ता एवं संगीता सहनी को नियुक्त किया गया है।



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