Sun. Jul 26th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

जनकपुर दशहरे की छटा

 

कैलास दास/जनकपुर:भारत महाराष्ट्र का गणेश पूजा, कलकत्ता का काली पूजा और पटना का दर्ूगा पूजा जैसा ही प्रसिद्ध है जनकपुर का दशमी मेला । घटस्थापन से प्रारम्भ विजया दशमी मेला नेपाल-भारत के सीमावर्ती क्षेत्र के श्रद्धालुओं को आकर्षा, उत्साह श्रद्धाभाव और प्रेरणा उत्पन्न करता है ।
जनकपुर विजया दशमी तक धार्मिक सरसजावट तथा भक्तिगान के साथ यहाँ के प्रत्येक चौक चौराहे में किया गया डेकोरेसन और झिलीमिली विद्युतीय बल्ब बाहर से आए श्रद्धालु एवं स्थानीय को मनमुग्ध करता है ।
खासकर कहा जाए तो गंगासागर और धनुषसागर के नजदीक रहा राममन्दिर भीतर का चौक, राजदेवी मन्दिर, अमरखाना, बौधीमाई और देवी का अन्य मन्दिरों के साथ र्स्वर्गद्वार तथा शिव मन्दिर में जलता झिलीमिली बत्ती का प्रकाश जब पोखर के पानी में पडÞता है तो दृश्य बहुत ही मनमोहक होता है ।
प्राचीन सरोवर तथा मठ मन्दिर का इतिहास रहा जनकपुर में घटस्थापना से छठ पर्व तक विशेष मनोरम दृश्य देखने को मिलता है । दशमी मेला का मुख्य आकर्षा दशै मेला -सस्ता बजार) भी है । धनुषसागर पोखरी के दक्षिण तरफ रहा गोपाल धर्मशाला में करीब ४२ से ज्यादा वर्षसे यह मेला लगता आ रहा है और बजार में सामान खरीदने के लिए नेपाल-भारत के विभिन्न स्थानों से लोग आते है । यह सस्ता और गुणस्तरीय समान के लिए प्रसिद्ध है । इस मेला में काठमाण्डू से लेकर नेपाल के विभिन्न जिला से लोग स्टाल लगाने आते है ।
दशै मेला को पृष्ठभूमि में रखकर जनकपुर के धार्मिक तथा साँस्कृतिक सम्पदा को कैमरे में कैद करने के लिए हर साल नेपाल और भारत के अलावा अमेरिका, आष्टे्रलिया सहित के मुल्क से पर्यटक आते है ।
दशै उत्सव शुरु होने से एक महीना आगे से स्थानीय महावीर युवा कमिटी का सदस्यगण, राजा जनक का कुल देवी के रूप में पूजा करते आ रहे राजदेवी माता के मन्दिर के श्रृङगार-पटार मे व्यस्त होते है । वैसे ही राम युवा कमिटी, गणेश युवा कमिटी का सदस्यगण भी अन्य देवी-देवता के मन्दिर तथा धरोहर आसपास के सजावट में सक्रिय रहता है । विजया दशमी के अवसर पर राम मन्दिर, राजदेवी मन्दिर, बौधीमाई, फुलेश्वर माई, भैरव बाबा, जनक मन्दिर एवं शिव मन्दिर में किया गया सजावट स्वर्गीय अनुभूति देता है ।
राजदेवी मन्दिर के आसपास छठी शताब्दी के लोकसंस्कृति झिझिया गायन तथा नृत्य प्रतिस्पर्धा सभी को आकषिर्त करता है ।
झिझिया एक विशेष प्रकार का नृत्य है । इस नृत्य अन्तरगत घडÞे में अनगिनत छेद कर बीच में जलता हुआ दीप -डिबिया) रखकर उपर से मिट्टी का ढक्कन रख डाइन के गाली देते हुए नृत्य करती है ।
‘कोठा के उपरी डैनिया, खिड्की लगैले ना
खिडकी ओतबे डैनिया, गुणबा चलैलेना
आगे किछु होएतो डैनिया, गदहा पर बैठबौ ना
गदहा चढाए डैनिया, नमुआ हँसैबौ ना’
-अर्थात् डाइन अपने घर के सबसे उपर वाले कोठा में खिडÞकी बन्द कर बैठी है । हो सकता है वह छुपकर जादु टोना कर सकती है । देख डाइन !  कुछ हुआ तो तुम्हे गदहा पर बैठाकर पूरे गाँव घुमाँउगा ।)
पहले दशै तक खासकर ग्रामीण क्षेत्र में यह नृत्य ज्यादा लोकप्रिय था । लेकिन अब डाइन प्रति जिस प्रकार से जनविश्वास घट रहा है झिझिया नृत्य लोप होता जा रहा है । यह नृत्य अब केवल किसी विशेष उत्सव में मात्र गाया और नृत्य किया जाता है ।
सप्तमी तिथि के रात में करीब दो बजे से अष्टमी के दो बजे तक कम से कम पाँच लाख से ज्यादा श्रद्धालु राजदेवी मन्दिर में प्रसाद चढाते है । अष्टमी दिन माता राजदेवी के १४ हजार से ज्यादा बलि प्रदान होता है । सप्तमी और अष्टमी तिथि में जनकपुर में जो भीडÞ देखने को मिलता है शायद ही किसी स्थान में होगा ।
उसी प्रकार रामानन्द चौक में स्थानीय युवा क्लव द्वारा प्रत्येक वर्षभव्य रुप में दर्ुगा पूजनोत्सव आयोजित कर रहे है । अष्टमी से दशमी तक विभिन्न तरह के साँस्कृतिक नाचगान के साथ विविध कला झाँकी पर््रदर्शन करते है । खासकर जनकपुर के मुख्य द्वार पिडारी चौक तथा रामानन्द, विश्वकर्मा, विद्यापति, कदम चौक सहित के चौक चौराहे मं युवाओं की सक्रियता मिथिला के ऐतिहासिकता और भव्यता में ‘चार चाँद’ लगा देते है ।
प्रसंगवस धार्मिक पर्ूव त्योहार में जनकपुर के युवा जिस प्रकार के सक्रियता और उत्साह दिखता है  वह पहले और बाद में बरकरार रखे तो जनकपुर को सच में ‘राम राज्य’ बनाया जा सकता है ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *