Mon. Mar 9th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

क्या रंग लाएगा कांग्रेस का सड़क आन्दोलन ? : कंचना झा

कंचना झा, काठमांडू, जेठ १४ – राजनीतिक सरगर्मी या कहें कि सदन में अपनी बात को रखकर उसका सही मूल्यांकन नहीं हो रहा है । उसकी बातों को सुनकर अनसूना किया जा रहा है । राजनीति में कुछ समस्या ऐसी देखी गई है कि जिनका समाधान सड़क पर उतरने के बाद ही किया जाता है । कुछ इन्हीं बातों का ध्यान रखते हुए प्रतिपक्ष दल यानी कांग्रेस अपनी मांग को लेकर सड़क पर उतर आई । कल (रविवार) जेठ १३ गते पूरे दिन कांग्रेस काठमांडू उपत्यका के विभिन्न भागों से निकलकर लोग एक साथ सड़क पर उतर आए । काठमांडू १०, ललितपुर ३ तथा भक्तपुर २ के निर्वाचन क्षेत्र से लोगों को एकत्रित कर सरकार के विरुद्ध कांग्रेस ने भव्य विरोध सभा किया है ।

कृप्या इसे अवश्य सुनें 

 

कांग्रेस अचानक से सड़क पर नहीं उतर आई है । कांग्रेस ने बार बार विरोध किया है । अपनी असहमति जाहिर की,संसद अवरुद्ध किया, और नारेबाजी भी की । उसे जिस विषय पर आपत्ति है उसने सत्तापक्ष से खुलकर कहा है कि लेकिन सत्तापक्ष को जितनी गहराई से इन विषयों पर अध्ययन करना चाहिए था नहीं किया है । हारकर कांग्रेस ने सड़क आन्दोलन का सहारा लिया है ।
अब सवाल यह उठता है कि क्यों कांग्रेस को सरकार के विरुछ सड़क पर उतरना पड़ा । क्यों कांग्रेस सड़क से समस्या का समाधान करना चाहती है ? इसके लिए तो संसद है जहाँ वो अपनी बात रख सकते हैं । कांग्रेस के नेता बार बार संसद अवरोध कर रहे थे फिर भी जब उनकी बातों को नहीं सुना गया है तो, वे उतरे हैं सड़क पर ।
कांग्रेस के साथ ही अन्य दल शुरु से ही सहकारी धोखाधड़ी प्रकरण को लेकर गंभीर है और चाहती है कि सरकार इसमें निष्पक्ष होकर काम करें । इस प्रकरण में उप प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री रवि लामिछाने की संलग्ता है, इस बात की बार बार पुष्टि होने के बाद से ही कांग्रेस की मांग है कि सहकारी धोखाधड़ी प्रकरण की छानबीन के लिए संसदीय समिति बननी चाहिए । पहले तो सत्ता पक्ष इसके लिए तैयार नहीं थी लेकिन कांग्रेस द्वारा बार बार संसद अवरुद्ध किए जाने के कारण छानबीन समिति बनाने के लिए सत्तापक्ष मान गई । ये भी सरकार की अपनी नीति थी कि उसे नीति तथा कार्यक्रम पारित करना था । प्रधानमंत्री को विश्वास मत लेना था । जेठ १५ गते बजट प्रस्ताव लाना है । लेकिन संसद अवरुद्ध के कारण ये काम नहीं हो पा रहा था तो सत्तापक्ष ने छानबीन समिति पर अपनी सहमति जताई और एक समिति बनी भी ।
इसके बाद संसद में जिस तरह का रुख किया गया वह भी अपने आप में विचित्र थी । सबसे पहला काम यह किया कि प्रधानमंत्री ने कांग्रेस तथा अन्य दल के विरोध और नारेबाजी के बीच ही विश्वास मत लिया । दूसरा कांग्रेस के विरोध के बीच ही सरकार ने बिना किसी चर्चे के ही नीति तथा कार्यक्रम को पारित कर दिया । कांग्रेस तथा अन्य दल विरोध करते रहे, नारेबाजी करती रही लेकिन सरकार ने किसी बात का ध्यान नहीं रखते अपनी मनमानी की । अब रह गया है बजट तो सरकार ने इसके लिए भी तैयारी कर ही ली है । चाहे कितने भी विरोध हो, नारेबाजी हो, वह बजट संसद से लाया ही जाएगा ।
सत्ता गठबंधन इस विकल्प की तैयारी में भी है कि बजट अध्यादेश से लाया जाए । एमाले के प्रमुख सचेतक महेश बर्तौला ने खुलकर कहा है कि नारेबाजी आप करें, अवरोध पैदा करे कोई बात नहीं, इन सबके बाबजूद संसद से बजट आएगी । उन्होंने कहा कि संसद से बजट प्रस्तुत होगी । यदि नारेबाजी से अर्थमंत्री को दिक्क्त होगी तो वे कान में रुई डालेंगे और बजट पढ़ेंगे । यानी प्रतिपक्ष अपना विरोध का काम करेगी और सत्तापक्ष संसद में अवरोध के बावजूद अपना कार्य करेगी । हलांकी प्रधानमंत्री बहुत प्रयास कर रहे है कि संसद में अवरोध नहीं हो , संसद से ही बजट लाया जाए । इसकी पहल वो अपनी तरफ से कर रहे हैं । रविवार को वें देउवा निवास जाकर उनसे बातचीत की । मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि वो दोनों पक्षों के बीच सहिमति हो जाएगी । लेकिन सच्चाई यह है कि प्रतिपक्ष तथा सत्तापक्ष दोनों ही अपनी अपनी जिद पर अड़े हैं ।
कांग्रेस की मांग है सहकारी धोखाधड़ी प्रकरण की छानबीन के लिए संसदीय समिति बने । इसमें सहमति हुई तो लेकिन बात कार्यादेश (टीओरआर) को अटक गई । कांग्रेस का कहना है कि इस प्रकरण में संलग्न व्यक्ति कौन–कौन हैं ? इसके बारे में भी उल्लेख होनी चाहिए । अगर ऐसा नहीं हुआ तो छानबीन नहीं हो पाएगी । हम अपनी बात पर अड़े रहेंगे । लेकिन सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि संस्था के नाम का उल्लेख करने के बाद व्यक्तियों के नाम का उल्लेख करना कोई जरुरी नहीं है । सत्ता पक्ष भी अपनी इस बात पर अड़े हैं । और इसमें कांग्रेस सहमत नहीं है । कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कार्यादेश (टीओरआर) को लेकर बात नहीं बनी तो हम अवरोध करते रहेंगे । यानी जब संसद में उनकी बात को नहीं सुना गया तब सड़क आंदोलन का सहारा लेकर अपनी मांग को रख रहे हैं ।
कल के विरोध सभा को संबोधन करते हुए विरोध पार्टी महामन्त्री विश्वप्रकाश शर्मा ने कहा कि सड़क में कांग्रेस के आने का कारण है । उन्होंने कहा कि ‘संसद में सरकार की भूमिका जबरदस्ती की रही है । प्रधानमंत्री के विश्वास मत को लेकर भी उन्होंने कहा कि विश्वास मत के लिए २१ दिन बाकी था लेकिन विरोध और नारेबाजी के बीच प्रधानमंत्री ने विश्वास मत लिया । जिस तरह से वें प्रस्तुत हुए वो क्या जरुरी था ? प्रधानमन्त्री को विनम्रता का पाठ पढ़ाने और संयम का पाठ सिखाने के लिए ही हम सड़क पर उतरे हैं और आज प्रदर्शनी मार्ग में उपस्थित हैं ।
महामंत्री शर्मा के मुताबिक वे सहकारी घोटाले को लेकर सत्ता पक्ष के झूठ का सच प्रचारित करने के लिए सड़क पर उतरे हैं । उन्हाेंने यह भी कहा कि आज हम सड़क का सहारा लेकर जनता को सरकार का सच दिखा रहे हैं । आज इस देश में गृह मंत्रालय समेत कई जगहों पर ऐसी स्थिति है कि झूठ को सच का मुखौटा पहनाया जा रहा है । कल के सड़क आन्दोलन में शर्मा ने अपने एक धंटे के लम्बे भाषण में बहुत सी बातों का उल्लेख किया । उन्होंने कहा कि ओली लामिछाने का बचाव कर रहे हैं इसका प्रमुख कारण है सत्ता । प्रचण्ड के नेतृत्व वाली सरकार को बनाए रखने के लिए लामिछाने के नेतृत्व वाली रास्वपा का समर्थन जरुरी है । सत्ता में बने रहने के लिए लामिछाने का बचाव जरुरी है । इसलिए ओली नहीं चाहते कि छानबीन समिति के बहाने लामिछाने को आगे लाया जाए ।
वैसे यह कोई पहली बार नहीं हुआ है कि कोई राजनीतिक दल किसी विषय पर सदन से लेकर सड़क पर उतरी है । इससे पहले भी कई भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर राजनीतिक दलों ने सदन अवरुद्ध किया था । वहाँ बात नहीं बनी तो सड़क पर उतरे थे । अनगिनत घोटाला है जिन्हें गिनवाना संभव भी नहीं है । बहुत बार ऐसा हुआ है कि भ्रष्टाचार को लेकर सड़क पर उतरे हैं राजनीतिक दल । दो चार दिन तक खूब हो हल्ला भी किया । नारेबाजी भी की और पता नहीं कहाँ क्या मिल जाता है कि आंदोलन समाप्त कर दिया जाता है । वो फाइल कुछ इस तरह से बंद होता है कि फिर खुलने की कोई गुंजाइश ही नहीं होती है । अब देखें कि क्या रंग लाती है कांग्रेस द्वारा किया जा सड़क आंदोलन ।

यह भी पढें   रक्सौल के मनु कुमार ने IB (ED) में चयनित हो लहराया सफलता का परचम, क्षेत्र में खुशी की लहर.

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *