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नेपालगञ्ज में ईरान के राष्ट्रपति रईसी की शोकसभा सम्पन्न

 

नेपालगञ्ज/ (बाँके) पवन जायसवाल । ।बाँके जिला के नेपालगञ्ज स्थित महेन्द्र पुस्तकालय में ईरान के दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी और उन के अन्य पदाधिकारियों के लिये  शोकसभा शनिवार को आयोजन किया गया ।

 वह शोकसभा में आलिम उलेमा, पत्रकार, प्रोफेसर, कवि, लेखक, बच्चा, महिलाएँ समेत की सहभागिता रही थी । कार्यक्रम में मुस्लिम लगायत  हिन्दू धर्मावलम्बी प्रबुद्ध व्यक्तित्वों ने भी सम्वेदना व्यक्त किया था । वह कार्यक्रम की अध्यक्षता नेपालगञ्ज के मौलाना मंसूर आर्फी न किया था । गत साता ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी और अन्य पदाधिकारियों की हेलिकप्टर दुर्घटना में शहादत हुई थी ।

कार्यक्रम में ईब्राहीम रईसी और उन के शहीद साथियों की सम्मान में एक मिनेट मौन धारण किया गया था । अबू सहमा ने नात प्रस्तुत किया था और मौलाना हाफिज शाकीर अली, डा. तौफीक खान, हाजी कदीर अन्सारी, हाजी मेराज हिमालय, कारी सगीर अहमद खान, सर्वर नेपाली, मौलाना मेराज अहमद और मोहम्मद राशिद ने शहीदों को गीत, कविता, ÞÞल आदि वाचन करके श्रद्धाञ्जली अर्पित किया था । 

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वह शोक सभा के अध्यक्ष मौलाना मन्सूर आर्फी ने अनी व्क्तव्य में कहा कि शहीद रईसी मानवता के लिये आदर्श व्यक्तित्व थे । किसी का भी  डर दबाव में न पर के मानव कल्याणकारी नीतियों को निर्भीक होकर कार्यान्वयन करते थे ।

इसी तरह संविधान सभा सदस्य अब्दुल हमीद सिद्दीकी और पत्रकार शाहिदा शाह वाहिदी ने शहीदों तथा मुस्लिम समाज की बारे में अपनी  बिचार व्यक्त की थी । मौलाना कलीम अहमद आर्फी ने अपनी बिचारों में भारतीय प्रधानमन्त्री की भातृत्व भाव तथा  ईरानी राष्ट्रपति को दिया  संम्ेदना संदेश को उल्लेख करते हुये प्रशंसा किया था । 

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सो कार्यक्रम की आयोजन एक्टिव यूनियन आर्गनाइजेशन ने नेपालगञ्ज मुस्लिम समाज की सहयोग में किया थया था संस्था के महासचिव डा. जैनुल आबेदीन ने नेपाल और ईरानको मैत्रिक सम्बन्ध में प्रकाश डालते हुये उल्लेख किये थे दिवंगत डा. इब्राहीमी ने नेपाली हाजियों को निःशुल्क औषधोपचार तथा हज की वासस्थान में ईरान की ओर से निःशुल्क सरसफाई की व्यवस्था करने की प्रस्ताव समेत नेपाल हज कमिटि को दिये थे । उन की जीवन सदैव पीडितों की सहायता तथा विश्वशान्ति के लिये सार्थक प्रयासे करते बीता । हेलिकप्टर दुर्घटना की समय भी उन्हों ने अजरबैजान की खाने पानी की कमी से पीडित जनता के लिये पेयजल की व्यवस्था करने की एक परियोजना की उद्घाटन करके वापस लौट रहे थे । इस लिये उन की मौत को शहादत की दर्जा दिया गया है बताया ।

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वह शोकसभा में आलिम उलेमा, पत्रकार, प्रोफेसर, कवि, लेखक, बच्चा, महिलाएँ समेत की सहभागिता रही थी । कार्यक्रम में मुस्लिम लगायत  हिन्दू धर्मावलम्बी प्रबुद्ध व्यक्तित्वों ने भी सम्वेदना व्यक्त किया था

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