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ओली को भारत विरोधी या चीन समर्थक कहना सही नहीं है : के वी राजन

 

काठमान्डू 17अगस्त

पूर्व विदेश सचिव के वी राजन नेपाल में भारत के राजदूत रहे हैं। पिछले दिनों इनकी किताब ‘काठमांडू क्रॉनिकल्स’ आई। जिसका विमोचन काठमान्डू में भी किया गया था । नवभारत टाइम्स में अमन श्रीवास्तव द्वारा लिया गया एक अन्तरवार्ता प्रकाशित हुआ है जिसमें  जब उनसे के पी शर्मा ओली के संदर्भ में यह पूछा गया कि क्या  नेपाल के प्रधानमंत्री  के पी शर्मा ओली के भारत विरोधी हैं तो उन्होंने कहा कि के पी शर्मा ओली को ऐसे प्रॉजेक्ट किया जाता है कि वह एंटी इंडिया हैं और चीन के समर्थक। यह सच है कि कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनसे भारत को चोट लगी है। लेकिन यह भी सच है कि कई बार ओली का प्रधानमंत्रित्व काल बहुत पॉजिटिव था। ओली अच्छे से समझते हैं कि उनके इंटरेस्ट में क्या है, नेपाल के इंटरेस्ट में क्या है और नेपाल-भारत संबंध के लिए क्या जरूरी है। मेरे समय में वह जब होम मिनिस्टर थे, कम्युनिस्ट सरकार में उन्होंने अपने पांडित्य से बहुत मदद की। तब वह भारत समर्थक कहलाते थे। उनके घर पर पत्थर फेंकते थे कम्युनिस्ट पार्टी के लोग कि आप तो भारत समर्थक हैं। हमारे मीडिया वगैरह में भी हमें इस तरीके से शायद प्रॉजेक्ट नहीं करना चाहिए कि वह भारत विरोधी या चीन समर्थक हैं। यह सच नहीं है।
नेपाल में भारत विरोधी भावना की दो वजहें हैं। एक तो जो विश्वास होना चाहिए, नैचरल ट्रस्ट, उसमें थोड़ी-बहुत कमी रही है। दूसरी बात, दोनों देशों में शायद इसके बारे में ज्यादा विचार भी नहीं किया गया है और कोशिश भी नहीं की गई कि कैसे इन मसलों को अड्रेस किया जाए ।   जहाँ तक खुली सीमा की बात है तो दोनों देशों में ओपन बॉर्डर का प्रॉब्लम काफी सीरियस था, क्योंकि इसका दुरुपयोग पाकिस्तान काफी खुले तरीके से कर रहा था। इसमें भारत के विरोध में कई एक्टिविटीज चल रही थीं- स्मगलिंग, नारकोटिक्स या टेररिज्म की। इसमें पाकिस्तान का रोल काफी स्पष्ट था, लेकिन 2001 के बाद दोनों देश काफी सीरियस हुए। उन्होंने बॉर्डर मैनेजमेंट के बारे में काफी गंभीरता से सोचा और उसमें कई इंप्रूवमेंट आए हैं। ओपन बॉर्डर दोनों देशों के लिए बहुत बड़ा असेट है, क्योंकि ये दोनों को बहुत फायदा देता है। वैसे भी रोटी-बेटी के रिश्ते के बारे में हम कहते हैं। ओपन बॉर्डर के कारण एक बहुत ही यूनीक संबंध बन जाते हैं। इसका हमें पूरा उपयोग करना चाहिए ताकि हमारे रिश्ते और भी मजबूत बन सकें।

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नवभारत टाइम्स में प्रकाशित अन्तरवार्ता के अाधार पर

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