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रवि की गिरफ्तारी ! सभी एक ही थाली के चट्टे बट्टे : कंचना झा

 

कंचना झा, काठमांडू। शीशे के घर में रहकर दूसरों के घरों में पत्थर नहीं फेक सकते 


पूर्व गृहमंत्री रवि लामिछाने को शुक्रवार की रात गिरफ्तार कर लिया गया है । उन्हें कल रात ही पोखरा ले जाया गया है ।
ये सच है कि यदि कोई भ्रष्टाचारी है तो उसे सजा जरुर मिलनी चाहिए । उस तरीके से यदि उन्हें गिरफ्तार किया गया है तो ठीक है नहीं तो केवल लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया गया है तो गलत है । यहाँ कौन ऐसा है जो भ्रष्टाचारी नहीं है । हमारे देश में यदि बात करें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री, सचिव, कर्मचारी, व्यापारी या फिर मीडिया की तो कौन साफ चरित्र का है ? सबपर किसी न किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप लगा हुआ है अगर प्रचण्ड की बात करें तब भी यदि केपी ओली, शेर बहादुर देउवा की बात करे तब भी । जो भी सत्ता में आते हैं अपने पहले के नेता, प्रधानमंत्री, मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते ही हैं ।
हमारा देश क्यों आगे नहीं बढ़ रहा है । इसका एक ही प्रमुख कारण है और वह है भ्रष्टाचार । यहाँ छोटे मोटे ओहदे से लेकर बड़े पद पर बैठे लोग सभी एक पर एक भ्रष्टाचारी है । वो देश के लिए सोचते ही नहीं हैं उनमें केवल और केवल सत्ता और कुर्सी की भूख है । हलांकी इससे अलग रवि लामिछाने भी नहीं हैं ।
एक सामान्य पत्रकार जिसकी जिंदगी गुजर जाती है साईकिल से मोटर साईकिल तक आने में । बहुत से पत्रकार हैं जिनकी पूरी जिंदगी बीत गई पत्रकारिता करते लेकिन अभी भी वो एस्टेबिल्श नहीं हो पाएं है । लेकिन क्या रवि के केस में ऐसा हुआ ? नहीं । एक सामान्य पत्रकार, एक टीभी होस्ट ने एक मीडिया हॉउस ही खड़ा कर लिया । ऐसा नहीं है कि लोग उनके इस तरक्की से खुश नहीं थे । आम आदमी उनसे बहुत प्रभावित थे लेकिन उन्हें जल्दबाजी थी राजनीति को लेकर, पद पावर को लेकर । वो बहुत जल्दी राजनीति में आ गए ।
राजनीति में आने से पहले अपने टी भी शौ में उन्होंने बहुतो को गाली दी । खुलकर नाम लिया तो क्या वो छोड़ देते ? उन्हें आराम से तरक्की करने देते ?
निराशा से भरी जनता ने उनका खूब स्वागत किया । जवान लड़का है अच्छा बोलता है । टक्कर दे सकता है लेकिन एक पत्रकार रहकर बोलना, चीखना चिल्लाना आसान है । एक राजनीतिक व्यक्ति, एक मंत्री के पद पर बैठा व्यक्ति, उसे संभाल लेना आसान नहीं है । जिनके विरुद्ध उन्होंने उस समय चीख चीख कर बात की थी । वो क्या चुपचाप बैठ जाते ? वो भी तब जब उनका नाम सहकारी धोखाधड़ी प्रकरण में बार –बार लिया जा रहा है । अगर वो साफ और स्वच्छ छवि के रहते ? उनका नाम किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं होता, तो लोग उनका समर्थन करते लेकिन वो स्वयं शीशे के घर में रहकर दूसरों के घरों में पत्थर फेकने लगे । यहाँ उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है । वैसे अभी एमाले कार्यालय को लेकर जो जगह दान में दी गई है उसे लेकर भी बहुत सी बातें आ रही है । लोग इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं, बहुत सी शिकायतें दर्ज की गई हैं केपी ओली के खिलाफ तो एक कारण यह भी हो सकता है कि जनता का ध्यान इस ओर से हटाकर रवि पर चला जाए और ओली साहब अपनी मनमानी करते रहें ।
बहुत पीछे नहीं जाएं कुछ वर्ष पहले की ही अगर बात करें तो ललीता निवास कांड, सोना तस्करी कांड, भूटानी शरणार्थी कांड, गिरीबंधु टी स्टेट कांड सबमें किसी न किसी बड़े नेताओं का नाम लिया जा रहा है यानी कोई साफ नहीं है । सभी बड़े नेताओं की इसमें सहभागिता है ।
अब सहकारी की बात अगर करें तो रवि के अलावे भी बहुत से सहकारी में बहुत से नेताओं का नाम लिया जा रहा है । अगर छानबीन की जाए तो हर पार्टी के नेता फंस जाएंगे । इसमें एक मितेरी सहकारी धोखाधड़ी प्रकरण भी है जिसका नाम सबने सुना है । उसमें धनराज गुरुंग उनकी पत्नी ज्योति तथा ऋषिकेश पोखरेल और उनकी पत्नी अंजला का नाम आता है । और भी बहुत से नाम हैं लेकिन उन्हें कब पकड़ा जाएगा ? केवल इसलिए नहीं पकड़ा जाएगा क्योंकि वे राज्य के ‘फ्रेमिङ’ में नहीं हैं । जनमत पार्टी के अध्यक्ष सीके राउत ने आज अपने फेसबुक पर लिखा है कि राज्य ने ‘फ्रेमिङ’ के आधार पर रास्वपा के सभापति एवं पूर्व गृहमन्त्री रवि लामिछाने को गिरफ्तार किया है । यानी जिसकी सरकार रहेगी वो अपने विरोधी पार्टी के या सरकार के विरोधी को ‘फ्रेमिङ’ के आधार पर गिरफ्तार करेगी । ये अभी के सरकार की ही बात नहीं है । अगली सरकार जिसकी होगी वो भी यही करने वाले हैं क्योंकि अभी यह नई बात है । नई समस्या है रवि भी जानते हैं कि उन्हें बांधकर ये लोग नहीं रख पाएंगे । कल वो फिर भी सत्ता में आएंगे । फिर मंत्री बनेंगे और अपने विरोधियों के साथ वो भी यही करेंगे ।
दूसरी बात क्या इतना आसान है सहकारी का पैसा खर्च करना ? नहीं । लेकिन यहाँ के सरकार की जो नीति है वो भी स्पष्ट नहीं है । नीति की कमी है । सहकारी को लेकर सरकार की जो नीतियां हैं उससे उनके काम करने का तरीका नहीं मिल पा रहा है । सरकार चाहे तो इसमें सुधार कर सकती है । कुछ नए नियम बना सकती है । जिससे काम करने में आसानी हो लेकिन सरकार चाहती ही नहीं है कि इसमें सुधार हो और लोग ढंग से काम कर सकें ।
जहाँ तक रवि लामिछाने की बात हैं तो उन्हें लेकर भी लोगों का नजरिया सकारात्मक नहीं है । उनके बारे में पहले भी बहुत सी बातें आई थी और आज भी आ रही है । स्वयं उनका चरित्र, उनकी छवि पर भी बहुत ज्यादा छींटाकशी की जा रही है । उनपर भी बहुत से आक्षेप लगाए जा रहे हैं ।
मीडिया की अगर कहे तो अमेरिका से भागा हुआ व्यक्ति है, चरित्र में भी साफ व्यक्ति नहीं है । कुछ एक वर्ष तक मीडिया में काम कर एक मीडिया हाउस को खड़ा करना क्या एक सामान्य व्यक्ति की हैसियत है ? तो कही न कही रवि भी फंसे तो हैं ।
अभी हलचल है उनकी गिरफ्तारी को लेकर । दो चार दिन के बाद रवि भी बाहर आ ही जाएंगे फिर मिलकर खेलेंगे नया खेल । क्योंकि ये तो मानी हुई बात है कि ये सभी एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं ।

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कंचना झा, कार्यकारी संपादक, हिमालिनी ऑनलाइन, www.himalini.com

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