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भारतीय राजदूतावास द्वारा विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन, विद्वानों द्वारा हिन्दी भाषा की महिमा गान !

 

काठमांडू, १० जनवरी । विश्व हिन्दी दिवस पर हिन्दी भाषा प्रेमियों ने हिन्दी भाषा की महिमा गान किया है । १० जनवरी अर्थात् विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर काठमांडू स्थित भारतीय राजदूतावास द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिन्दी भाषा को लेकर अपने–अपने विचार व्यक्त किए हैं । साथ ही नेपाल सरकार से हिंदी को उचित स्थान देने की मांग की गई ।
कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि तथा संघीय सांसद् (एमाले) मंगल प्रसाद गुप्ता ने कहा कि नेपाल बहुभाषिक और सांस्कृतिक देश है और ९० प्रतिशत नेपालियों के लिए हिन्दी भाषा अन्तर्राष्ट्रीय सम्पर्क भाषा है । हिन्दी भाषा को लेकर हिन्दी मंच नेपाल की ओर से की गई गतिविधियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दी भाषा के प्रति नेपाल सरकार की कोई भी रुची नहीं है, जिसके चलते यहां हिन्दी भाषा की अपेक्षित उत्थान नहीं हो पा रहा है । हिन्दी मंच नेपाल के अध्यक्ष भी रहे सांसद् गुप्ता ने कहा कि नेपाली भाषा को यहां जो सम्मान मिल रहा हैं, वही सम्मान हिन्दी को मिलना चाहिए ।
कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि तथा भाषा आयोग के अध्यक्ष गोपाल ठाकुर ने कहा कि हम जो हिन्दी नेपाल में बोलते हैं, उसे प्रवासियों ने नहीं बनाया है, वरन हम नेपालियों ने ही इसे बनाया है । अध्यक्ष ठाकुर ने कहा कि नेपाल के कुछ बुद्धिजिवी हिन्दी भाषा को भारत से आयातीत भाषा मानते हैं । उन्होंने आगे कहा– ‘ऐसे बुद्धिजवी कहते हैं कि भारत से कुछ लोग नेपाल आकर बैठे हैं, उनके द्वारा ही नेपाल में हिन्दी भाषा का विकास हुआ है ।’ लेकिन ठाकुर का मानना है कि ऐसी सोंच शतप्रतिशत गलत है । हिन्दी भाषा को ‘सीमा आर–पार’ की भाषा बताते हुए अध्यक्ष ठाकुर ने कहा कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और भाषा आयोग को मिल कर हिन्दी भाषा के उत्थान के लिए काम करना चाहिए । नेपाल में हिन्दी भाषा की प्रयोग और क्षेत्र विशेष को लेकर त्रिभुवन विश्वविद्यालय में हिन्दी भाषा अध्ययनरत विद्यार्थियों से अनुसंधान कराने के लिए भी उन्होंने आग्रह किया ।
इसीतरह नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रतिष्ठान के कुलपति निशा शर्मा ने हिन्दी भाषा की इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि हिन्दी अनुवाद की नहीं संवाद की भाषा है, जो नेपाल–भारत को ही नहीं, विश्व के कई देशों को आपस में जोड़ती है । कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए भारतीय दूतावास के काउंसलर गिताञ्जली ब्रैंडन ने कहा कि भौगोलिक सीमा से परे लोगों के दिलों को जोड़ने का काम हिन्दी भाषा ने किया है । उन्होंने कहा कि नेपाल के लोगों ने हिन्दी को दिल से अपनाया है । उनका यह भी मानना है कि हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रुप में और भी सशक्त बनाना है ।
हिन्दी दिवस के अवसर पर भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की ओर से प्रेसित शुभकामना सन्देश को भी काउंसलर गिताञ्जली ने कार्यक्रम के बीच पढ़कर सुनाया । अपनी शुभकामना सन्देश में प्रधानमन्त्री मोदी ने कहा है कि अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर हिन्दी भाषा की बढ़ती उपस्थिति भारत वासियों के लिए गर्व की बात है । उन्होंने यह भी कहा है कि भाषा एक सेतु के तरह है, जो अतित और भविष्य को जोड़ती है ।
कार्यक्रम के दौरान हिन्दी भाषा में पत्रकारिता तथा साहित्य लेखन से महत्वपूर्ण योगदान करनेवाले व्यक्तित्व, हिन्दी दिवस २०२४ के विजेता, कार्यक्रम में नाटक, नृत्य तथा कविता प्रस्तुत करनेवाले छात्र–छात्राओं को प्रमुख अतिथि के हाथों सम्मानित भी किया गया । कार्यक्रम में काठमांडू स्थिति डिएवी स्कूल, चांदबांग स्कूल, मॉर्डन इन्डियन स्कूल, राई स्कूल, केन्द्रीय विद्यालय और नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रतिष्ठान के छात्रछात्राओं ने कविता पाठ, नृत्य तथा नाट्य प्रस्तुति से सहभागियों को मनोरंजन प्रदान किया था । इस अवसर पर भारतीय दूतावास पिआईसी वीङ के प्रथम सचिव श्री वशिष्ठ नन्दन ने छात्र-छात्राओं को दूतावास की ओर से पुरस्कृत भी किया ।
कार्यक्रम की द्वितीय सत्र में ‘नेपाल–भारत मैत्री कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया । कवि सम्मेलन में नेपाल से दो (इम्तियाज बफा और सरीता पन्थी) शायरों की सहभागिता रही तो भारत से भी दो (चरणजीत सिंह चरण और दिनेश शर्मा) शायरों की सहभागिता रही । शायरों ने अपनी शायरी, गजल और मुक्तक से उपस्थित लोगों को मन्त्रमुक्त कर दिया ।
कार्यक्रम में डा. धनेष द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक ‘राजभाषा हिन्दी की गौरव गाथाः संवैधानिक दायित्व एवं कार्यान्वयन’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया है । कार्यक्रम का सफल संचालन पुस्तक के लेखक डा. द्विवेदी ने ही किया ।

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