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भारत और चीन के बीच की कम हाेती तल्खियाँ, फिर से शूर हाे रही कैलाश मानसरोवर की यात्रा

 

काठमान्डू 28 जनवरी

चीन एवं भारत के बीच की दूरी कम हाेती प्रतीत हाे रही है । क्याेंकि बरसाें से बंद भारत और चीन फिर से कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुरू करने जा रहे हैं . दोनों देश सीधी उड़ान पर भी सहमत हो चुके हैं. भारत और चीन ने सोमवार को अपने रिश्तों के पुननिर्माण की दिशा में यह अहम घोषणा की. इसके तहत इस साल गर्मी के मौसम में कैलाश मानसरोवर की यात्रा फिर से शुरू होगी.

कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत भारत और चीन के रिश्तों में मील का पत्थर है. 2020 के बाद से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बंद हैं. कैलाश मानसरोवर यात्रा पांच साल बाद शुरू होगी. साल 2020 में भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो झील के पास झड़पें हुई थीं. इन झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था. तनाव इतना था कि दोनों देशों ने सीमा पर अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी थी. हर तरह के संबंध तोड़ दिए थे. कैलाश मानसरोवर की यात्रा बंद हो गई थी. भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान की सेवा बंद हो गई थी. मगर अब सब पहले की तरह नॉर्मल होने जा रहा है.
भारत और चीन के बीच रिश्ते सुधरने की सबसे अहम वजह है वार्ता यानी बातचीत.  2020 में रिश्तों में दरार पड़ने के बाद भी दोनों देशों ने लगातार बातचीत की है. इन्हीं बातचीत का नतीजा है कि अब दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य होने लगे हैं. हालांकि, इसकी पटकथा दिल्ली से 3750 किलोमीटर दूर स्थित रूस के कजान शहर में लिखी गई. जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई. पिछले साल अक्टूबर महीने पीएम मोदी और शी जिनपिंग कजान शहर में थे. मौका था ब्रिक्स समिट का. ब्रिक्स समिट के इतर पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई. इस मुलाकात में ही सीमा पर शांति और दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने पर सहमति बनी थी. इसी दौरान सीमा पर तनाव कम करने, कैलाश मानसरोवर यात्रा और डायरेक्ट फ्लाइट की बहाली पर पीएम मोदी ने जिनपिंग को समझाया था. यही वह मुलाकात थी, जिसके बाद भारत और चीन के बीच बातचीत का चैनल सक्रिय हो गया था.
इन बातचीत और मुलाकातों ने भारत और चीन के बीच रिश्तों को नया मुकाम दिया. इसका असर हुआ कि अब भारत और चीन के बीच रिश्ते सुधरते दिख रहे हैं. इसका एक और उदाहरण यह भी है कि चीन अब भारत का सबसे बड़ा कारोबारी भागीदार बन चुका है. पहले यह तमगा अमेरिका के पास था.

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