प्राज्ञ हरि प्रसाद तिमिल्सिना को विद्यावारिधि उपाधि प्रदान
नेपालगञ्ज/(बाँके) पवन जायसवाल । बाँके जिला की नेपालगञ्ज में रही महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पस नेपालगञ्ज के उप–प्राध्यापक हरिप्रसाद तिमिल्सिना को नेपाल की दूसरी विश्वविद्यालय नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय ने विद्यावारिधि उपाधि प्रदान की है ।
नेपाल की पश्चिम नेपाल में भाषा साहित्य समालोचना और समग्र वाङ्मय की विकास में विगत ३ दशक से निरन्तर सक्रिय रहे नेपालगञ्ज की महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पस के उप–प्राध्यापक हरिप्रसाद तिमिल्सिना को नेपाल की दूसरी विश्वविद्यालय नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय ने विद्यावारिधि उपाधि प्रदान की है ।
दैलेख जिला के महाबु गाँवपालिका वार्ड नं.–६ टाकुरी में बि.सं.२०२३ साल में जन्म हुई और बाँके जिला की नेपालगञ्ज उप–महानगरपालिका वार्ड नंं–१८ निवासी नेपालगञ्ज को कर्म स्थल बनाते हुये प्राध्यापन और साहित्य सेवा में एक साथ सक्रिय रहे हरि प्रसाद तिमिल्सिना ने नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय अनुसन्धान केन्द्र में बि.सं. २०७४ वैशाख महनिे से कक्षा प्रारम्भ करके ३ सेमेस्टर की अध्ययन पश्चात् हुई परीक्षा उत्तीर्ण करके उन्हों ने बि.सं.२०७५ पौष महीने के २२ गते से स्थायी करार करके ’सिद्धिचरण श्रेष्ठ की खण्डकाव्य में रसविधान’ शीर्षक की अनुसन्धान में संलग्न रहे थे । २०८१ माघ २६ गते हरि प्रसाद तिमिल्सिना का अन्तिम वाक् परीक्षा ख्क्ष्ख्ब् सम्पन्न किया । भाइबा की क्रम में हरि प्रसाद तिमिल्सिना ने की प्रस्तुति, शोधप्रबन्ध की परीक्षण और मूल्याङ्कन पश्चात नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षाध्यक्ष प्रा डा भीमप्रसाद खतिवडा के अध्यक्षता में बैठी अनुसन्धान केन्द्र की मिटिङ्ग ने हरि प्रसाद तिमिल्सिना को विद्यावारिधि उपाधि प्रदान करने की निर्णय की थी ।
३ सौ७० पृष्ठ लम्बी शोध प्रबन्ध में हरि प्रसाद तिमिल्सिना ने पौरस्त्य साहित्य समालोचना की महत्वपूर्ण साहित्यिक मान्यता रससिद्धान्त की गहन सैद्धान्तिक अध्ययन करके उसी आधार में नेपाली साहित्य की स्वच्छन्दतावादी धारा की सहप्रवर्तक वरिष्ठ साहित्यकार सिद्धिचरण श्रेष्ठद्वारा रचित उर्वशी, मङ्गलमान, भीमसेन थापा, आँसु, कान्तीमती लगायत नौ खण्डकाव्य की समिचिन विवेचना करते हुये वह खण्डकाव्य में रस कैसे प्रयोग किया गया वह बातों की अनुशीलन किया था ।
शोधकर्ता हरि प्रसाद तिमिल्सिना कविता, कथा निबन्ध, नियात्रा, समालोचना जैसी साहित्य की विविध विधा में सशक्त रूप में कलम चलाते आ रहे और लोपोन्मुख सोनाहा, कुछबधिहा, खुना, राजी, कुमाल जाति की भाषा, साहित्य एवं संस्कृति खोज अध्ययन भी उन्हों ने किया है । लुम्बिनी प्रदेश में प्रचलित परम्परागत गीतसङ्गीत की सर्वेक्षण तथा अध्ययन, लुम्बिनी प्रदेश के लोक कथाएँ की सङ्कलन और अध्ययन समेत की है । विगत १६ वर्ष से नेपालगञ्ज की महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पस में नेपाली पत्रकारिता विषय की प्राध्यापन करते आ रहे हैं और भेरी साहित्य समाज लगायत विभिन्न भाषा साहित्यिक सङ्घसंस्था की नेतृत्व करके संस्थागत योगदान कर रहे है हरि प्रसाद तिमिल्सिना अपने में प्राज्ञिक व्यक्तित्व है । उन्हों ने विद्यावारिधि तह की उच्च अध्ययन नेपालगञ्ज, लुम्बिनी होते हुये समग्र देश की प्राज्ञिक उन्नयन में महत्वपूर्ण होने की अपेक्षा रही है ।


