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ओडिशा के KIIT कॉलेज द्वारा परीक्षा स्थगित करने की तैयारी, केवल 182 नेपाली छात्र ही लौटें हैं

 
प्रकृति की अंतिम यात्रा
11 फाल्गुन 2081 (23 फरवरी 2025), काठमांडू
ओडिशा के कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) में एक नेपाली छात्रा की रहस्यमयी मौत के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति ने न केवल कॉलेज प्रशासन बल्कि ओडिशा सरकार को भी हिलाकर रख दिया है। इस घटना के बाद कॉलेज छोड़कर गए सैकड़ों नेपाली छात्र-छात्राओं में से अब तक सिर्फ 182 ही वापस लौटे हैं, जबकि वहां कुल 1,169 नेपाली छात्र पढ़ाई कर रहे थे। छात्रों की मानसिक स्थिति को देखते हुए कॉलेज ने आगामी सेमेस्टर की परीक्षाएं स्थगित करने का फैसला किया है। ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने विधानसभा में घोषणा की है कि जरूरत के हिसाब से परीक्षाओं की नई तारीखें तय की जाएंगी।
क्या है पूरा मामला?
पिछले रविवार को KIIT के गर्ल्स हॉस्टल के एक कमरे में 20 साल की नेपाली छात्रा प्रकृति लम्साल मृत पाई गईं, जिनका स्थायी पता नेपाल के रूपंदेही जिले में है। कॉलेज प्रशासन ने इसे आत्महत्या का मामला बताकर सामान्य करने की कोशिश की, लेकिन छात्रों और उनके परिवार का कहना है कि यह हत्या का मामला हो सकता है। प्रकृति के भाई सिद्धांत सिग्देल ने बताया कि उनकी बहन ने दो बार कॉलेज के इंटरनेशनल रिलेशन ऑफिसर (IRO) को शिकायत दी थी कि बीटेक तीसरे साल के छात्र अद्विक श्रीवास्तव (21) उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। पहली शिकायत पर अद्विक को कुछ दिनों के लिए निलंबित किया गया, लेकिन उसने यातना जारी रखी। दूसरी शिकायत के बाद भी कॉलेज ने ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके परिणामस्वरूप यह दुखद घटना घटी।
घटना के दिन दोपहर 3 से 4 बजे के बीच प्रकृति का शव हॉस्टल में मिला। उनके रूममेट्स उस वक्त बाहर थे। मौत की खबर मिलते ही आरोपी अद्विक रविवार रात को भुवनेश्वर के बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कोलकाता भागने की कोशिश में था, लेकिन छात्रों के हंगामे और पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते उसे पकड़ लिया गया।
छात्रों पर कॉलेज का अमानवीय व्यवहार
प्रकृति की मौत के बाद न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कॉलेज प्रशासन ने सख्ती दिखाई। सोमबार को प्रशासन ने नेपाली छात्रों को हॉस्टल और कॉलेज छोड़ने का आदेश जारी किया। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज के सुरक्षाकर्मियों और बाउंसरों ने उनके कमरों में घुसकर उन्हें बाहर निकाला और विरोध करने पर लाठियां बरसाईं। इस व्यवहार से नाराज छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी, जिसके बाद मामला और गरमा गया। ओडिशा विधानसभा में भी इसकी गूंज सुनाई दी और सरकार ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की। कथित तौर पर कुटपिट में शामिल कुछ लोग गिरफ्तार भी हुए हैं।
छात्रों की मांगें और कॉलेज का रुख
भारत में रह रहे कुछ नेपाली छात्र कॉलेज लौट आए हैं, लेकिन नेपाल पहुंच चुके छात्र अभी वापस आने को तैयार नहीं हैं। उनकी मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो, कंप्यूटर साइंस विभाग के निदेशक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास के काउंसलर संजीव शर्मा दास ने बताया कि कॉलेज प्रशासन ने अभिभावकों को ईमेल भेजकर छात्रों को वापस बुलाने और सुरक्षा का भरोसा दिलाने की कोशिश की है। फिर भी, छात्रों में डर और अविश्वास बना हुआ है।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
ओडिशा सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि नेपाली छात्रों को भविष्य में KIIT में किसी तरह की परेशानी न हो।” दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना हुई है, लेकिन कॉलेज के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। दूतावास के अधिकारियों का कहना है कि कॉलेज ने शुरू में मामले को दबाने की कोशिश की, जिससे छात्रों का गुस्सा और बढ़ा।
आगे क्या?
यह घटना अब सिर्फ प्रकृति की मौत और जांच तक सीमित नहीं रही। यह कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही, छात्रों की सुरक्षा और भारत-नेपाल के शैक्षिक रिश्तों पर भी सवाल खड़ा कर रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, उम्मीद है कि सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी। तब तक, KIIT में पढ़ रहे नेपाली छात्रों का भविष्य अनिश्चितता के साये में है।

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